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देश विभाजन पर RSS का बड़ा दावा, सुनील आंबेकर बोले- संघ आज जितना मजबूत होता तो नहीं बंटता भारत

 

New Delhi : राष्ट्रीय स्वयंसेवक संघ (RSS) के प्रचार प्रमुख सुनील आंबेकर ने कहा है कि यदि वर्ष 1947 में संघ आज की तरह मजबूत और व्यापक होता, तो देश का विभाजन टाला जा सकता था। उन्होंने भारत-पाकिस्तान विभाजन को देश के इतिहास की सबसे पीड़ादायक घटनाओं में से एक बताते हुए कहा कि उस समय RSS अपनी वर्तमान क्षमता के स्तर पर नहीं था।

मीडिया से बातचीत में सुनील आंबेकर ने कहा कि आजादी के समय संघ उतना संगठित और प्रभावशाली नहीं था, जितना वह बनना चाहता था या जितना आज है। उनका मानना है कि यदि उस दौर में संघ की ताकत अधिक होती तो देश के विभाजन जैसी स्थिति को रोका जा सकता था।

विभाजन के दौरान लोगों की मदद का दावा

आंबेकर ने कहा कि विभाजन के दौरान RSS कार्यकर्ताओं ने अपनी क्षमता के अनुसार राहत और सहायता कार्य किए। उन्होंने बताया कि हिंसा और विस्थापन से प्रभावित लोगों, विशेषकर हिंदू परिवारों को सुरक्षित स्थानों तक पहुंचाने और पुनर्वास में संघ ने महत्वपूर्ण भूमिका निभाई थी।

उन्होंने कहा कि विभाजन के बाद उस समय की राजनीतिक व्यवस्था को लेकर लोगों में व्यापक असंतोष और नाराजगी थी।

RSS पर लगाए जाने वाले आरोपों को बताया गलत

संघ के प्रचार प्रमुख ने कहा कि राजनीतिक लाभ के लिए RSS के बारे में कई तरह की भ्रांतियां फैलाई जाती हैं। उन्होंने कहा कि संघ किसी व्यक्ति, समुदाय या वर्ग से नफरत नहीं करता और न ही किसी को अपना दुश्मन मानता है।

आंबेकर के अनुसार, RSS समाज के सभी वर्गों को साथ लेकर चलने और संवाद के माध्यम से समस्याओं का समाधान खोजने में विश्वास रखता है।

पाकिस्तान से संवाद पर भी रखी राय

RSS के सरकार्यवाह दत्तात्रेय होसबले के पाकिस्तान से संवाद संबंधी बयान पर प्रतिक्रिया देते हुए सुनील आंबेकर ने कहा कि उनके वक्तव्य को व्यापक संदर्भ में समझने की आवश्यकता है।

उन्होंने कहा कि संघ हमेशा मानता रहा है कि लोगों के बीच संपर्क और संवाद बने रहना चाहिए। सामाजिक, सांस्कृतिक और व्यापारिक स्तर पर बातचीत लंबे समय में तनाव कम करने और समस्याओं के समाधान का रास्ता खोल सकती है।

सरकार को सलाह नहीं देता RSS

आंबेकर ने स्पष्ट किया कि सरकारों के बीच होने वाली बातचीत और कूटनीतिक फैसले पूरी तरह राजनीतिक विषय हैं। उन्होंने कहा कि RSS सरकार को विदेश नीति या द्विपक्षीय संबंधों पर सलाह नहीं देता और न ही ऐसे मामलों में निर्णय करता है।

उन्होंने कहा कि सरकारें अपने समय की परिस्थितियों और राष्ट्रीय हितों को ध्यान में रखकर फैसले लेती हैं। हालांकि, आधिकारिक वार्ता के ठप होने की स्थिति में भी लोगों के बीच संवाद और संपर्क बने रहना सकारात्मक माना जाना चाहिए।

RSS नेता के इस बयान के बाद विभाजन, संघ की भूमिका और भारत-पाक संबंधों को लेकर राजनीतिक बहस तेज होने की संभावना है।