{"vars":{"id": "130921:5012"}}

जनधन खातों पर RTI का बड़ा खुलासा: हर चौथा खाता निष्क्रिय, 5.72 करोड़ अकाउंट में 5.72 जीरो बैलेंस

 

प्रधानमंत्री जनधन योजना (PMJDY) को लेकर सामने आए ताजा आंकड़ों ने योजना की मौजूदा स्थिति पर एक नई तस्वीर पेश की है। एक RTI के जवाब के मुताबिक, देश में खुले करीब 59 करोड़ जनधन खातों में से लगभग 15.36 करोड़ खाते निष्क्रिय हैं। यानी हर चार में से करीब एक जनधन खाता फिलहाल इस्तेमाल में नहीं है। इतना ही नहीं, 5.72 करोड़ से ज्यादा खातों में एक भी रुपया जमा नहीं है।

वित्त मंत्रालय के तहत आने वाले वित्तीय सेवा विभाग (Department of Financial Services) ने एक्टिविस्ट चंद्रशेखर गौर की RTI अर्जी के जवाब में यह जानकारी दी है। RTI का जवाब 1 सितंबर 2026 को जारी किया गया। इसमें 12 अगस्त 2026 तक देशभर के जनधन खातों की स्थिति का राज्यवार आंकड़ा दिया गया है।

देश में कितने जनधन खाते हैं?

RTI के मुताबिक, 12 अगस्त 2026 तक देश में कुल 59,03,74,907 जनधन खाते खुले हुए थे। इन खातों में कुल मिलाकर 3.15 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा की रकम जमा थी।

हालांकि, खातों की बड़ी संख्या के साथ-साथ निष्क्रिय और जीरो बैलेंस खातों का आंकड़ा भी सामने आया है। कुल खातों में से 15,36,77,009 खाते निष्क्रिय पाए गए। वहीं 5,72,35,490 खातों में कोई बैलेंस नहीं था।

यानी जनधन योजना के तहत बैंकिंग व्यवस्था से जुड़े लोगों की संख्या बहुत बड़ी है, लेकिन इन खातों का एक बड़ा हिस्सा नियमित रूप से इस्तेमाल नहीं हो रहा है।

जनधन खातों की पूरी तस्वीर
कुल जनधन खाते: 59.03 करोड़
कुल जमा राशि: ₹3.15 लाख करोड़ से ज्यादा
निष्क्रिय खाते: 15.36 करोड़
जीरो बैलेंस खाते: 5.72 करोड़
महिला और ट्रांसजेंडर खाताधारक: 32.89 करोड़
पुरुष खाताधारक: 26.14 करोड़
उत्तर प्रदेश में सबसे ज्यादा जीरो बैलेंस खाते

राज्यों की बात करें तो उत्तर प्रदेश जनधन खातों के मामले में सबसे आगे है। राज्य में करीब 10.51 करोड़ जनधन खाते हैं। इनमें से 95.92 लाख खातों में जीरो बैलेंस पाया गया।

जीरो बैलेंस खातों की संख्या के मामले में उत्तर प्रदेश के बाद बिहार, पश्चिम बंगाल, असम और महाराष्ट्र का नंबर आता है।

निष्क्रिय खातों के मामले में भी उत्तर प्रदेश सबसे ऊपर है। इसके बाद बिहार, मध्य प्रदेश, पश्चिम बंगाल और महाराष्ट्र शामिल हैं।

कुल जनधन खातों की संख्या के लिहाज से राज्यों की स्थिति देखें तो उत्तर प्रदेश के बाद बिहार में करीब 7.01 करोड़, पश्चिम बंगाल में 5.73 करोड़, राजस्थान में 3.87 करोड़ और महाराष्ट्र में 3.85 करोड़ जनधन खाते हैं।

सरकार के पास किन जानकारियों का केंद्रीय रिकॉर्ड नहीं?

RTI के जवाब में एक अहम बात यह भी सामने आई है कि केंद्र सरकार के पास जनधन खातों के बैलेंस, जीरो बैलेंस और निष्क्रिय खातों का जेंडर के आधार पर अलग-अलग केंद्रीय रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं है।

इसके अलावा, 100 रुपये से कम बैलेंस वाले खातों, पिछले पांच साल में बंद किए गए खातों और संदिग्ध लेनदेन या साइबर फ्रॉड की वजह से ब्लॉक अथवा फ्रीज किए गए खातों का भी केंद्रीय स्तर पर अलग रिकॉर्ड उपलब्ध नहीं होने की जानकारी दी गई है।

RTI के तहत केंद्र की ओर से 36 राज्यों और केंद्रशासित प्रदेशों का राज्यवार डेटा उपलब्ध कराया गया है।

क्यों शुरू की गई थी जनधन योजना?

प्रधानमंत्री जनधन योजना की शुरुआत अगस्त 2014 में राष्ट्रीय वित्तीय समावेशन मिशन के तौर पर की गई थी। इसका उद्देश्य देश के हर परिवार तक बैंकिंग सुविधाएं पहुंचाना, कम से कम एक बेसिक बैंक खाता उपलब्ध कराना, लोगों को वित्तीय सेवाओं से जोड़ना और उन्हें सामाजिक सुरक्षा योजनाओं का लाभ दिलाना था।

योजना के जरिए बड़ी संख्या में ऐसे लोगों को बैंकिंग सिस्टम से जोड़ा गया, जो पहले औपचारिक बैंकिंग व्यवस्था से बाहर थे।

लेकिन अब RTI से सामने आए आंकड़े एक दूसरी तस्वीर भी दिखाते हैं। एक तरफ जनधन खातों की संख्या 59 करोड़ से ज्यादा हो चुकी है और इनमें 3.15 लाख करोड़ रुपये से अधिक जमा हैं, वहीं दूसरी तरफ करोड़ों खाते निष्क्रिय हैं और 5.72 करोड़ से ज्यादा खातों में कोई पैसा जमा नहीं है।

ऐसे में ये आंकड़े इस बात पर सवाल जरूर खड़े करते हैं कि बैंकिंग व्यवस्था से जुड़ने के बाद कितने खाताधारक वास्तव में अपने जनधन खातों का नियमित इस्तेमाल कर रहे हैं।