ईरान संकट से टूटा रुपया, डॉलर के मुकाबले 92.62 पर पहुंचा रिकॉर्ड निचला स्तर
नई दिल्ली। ईरान में जारी संघर्ष का असर अब वैश्विक अर्थव्यवस्था पर साफ दिखाई देने लगा है। कच्चे तेल और गैस की आपूर्ति प्रभावित होने से अंतरराष्ट्रीय बाजार में कीमतों में तेज उछाल आया है। इस महंगाई का सीधा असर भारतीय मुद्रा पर पड़ा है, जहां रुपया अमेरिकी डॉलर के मुकाबले गिरकर अब तक के सबसे निचले स्तर 92.62 पर पहुंच गया है।
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर कच्चे तेल की कीमतों में इसी तरह बढ़ोतरी जारी रही, तो रुपये में और गिरावट आ सकती है और यह जल्द ही 94 से 95 के स्तर तक पहुंच सकता है।
लगातार दबाव में रुपया
मंगलवार को रुपया 92.62 प्रति डॉलर पर बंद हुआ, जिसने पिछले सप्ताह के अपने रिकॉर्ड निचले स्तर 92.4750 को भी पार कर लिया। बाजार विश्लेषकों के अनुसार, डॉलर की बढ़ती मांग और विदेशी निवेशकों की बिकवाली के चलते रुपये पर लगातार दबाव बना हुआ है।
एक्सचेंज के आंकड़ों के मुताबिक, विदेशी संस्थागत निवेशकों (FIIs) ने मंगलवार को भारतीय शेयर बाजार में 4,741.22 करोड़ रुपये के शेयरों की शुद्ध बिकवाली की। इससे भी रुपये की कमजोरी और बढ़ गई।
ईरान संघर्ष से 40% महंगा हुआ क्रूड ऑयल
ईरान में युद्ध जैसे हालात शुरू होने के बाद से ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में करीब 40 प्रतिशत तक उछाल देखा गया है। वैश्विक ऊर्जा आपूर्ति में आई इस बड़ी बाधा के कारण तेल आयात करने वाले देशों पर अतिरिक्त आर्थिक बोझ बढ़ गया है।
हालांकि, ताजा कारोबार में ब्रेंट क्रूड ऑयल की कीमतों में मामूली गिरावट दर्ज की गई और यह 1.32 प्रतिशत गिरकर 102 डॉलर प्रति बैरल पर ट्रेड करता दिखा, लेकिन कुल मिलाकर कीमतें अभी भी ऊंचे स्तर पर बनी हुई हैं।
डॉलर की मजबूती भी बनी बड़ी वजह
इस बीच, डॉलर इंडेक्स में भी हल्की मजबूती देखी गई है। यह इंडेक्स, जो छह प्रमुख मुद्राओं के मुकाबले डॉलर की स्थिति को दर्शाता है, 0.03 प्रतिशत बढ़कर 99.60 पर पहुंच गया। डॉलर की मजबूती के कारण भी रुपये पर दबाव बढ़ रहा है।
क्या कहते हैं एक्सपर्ट?
Finrex Treasury Advisors LLP के ट्रेजरी प्रमुख और कार्यकारी निदेशक अनिल कुमार भंसाली के अनुसार, “पिछले कुछ दिनों से रुपया एक सीमित दायरे में बना हुआ था और भारतीय रिजर्व बैंक 92.50 के स्तर को बचाने की कोशिश कर रहा था। लेकिन विदेशी निवेशकों और तेल कंपनियों की ओर से लगातार डॉलर की खरीदारी के कारण रुपये पर दबाव बढ़ गया है।”
उन्होंने यह भी संकेत दिया कि अगर हालात नहीं सुधरे, तो रुपये में और गिरावट देखने को मिल सकती है।
आगे क्या रहेगा असर?
विशेषज्ञों का मानना है कि कच्चे तेल की कीमतों में बढ़ोतरी का असर सिर्फ रुपये तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि इससे महंगाई भी बढ़ सकती है। पेट्रोल-डीजल की कीमतों में इजाफा होने की संभावना है, जिससे आम जनता की जेब पर सीधा असर पड़ेगा।
कुल मिलाकर, ईरान संघर्ष ने वैश्विक बाजारों में अनिश्चितता बढ़ा दी है और इसका असर भारतीय अर्थव्यवस्था पर भी गहराता जा रहा है। आने वाले दिनों में रुपये की चाल काफी हद तक अंतरराष्ट्रीय तेल कीमतों और वैश्विक हालात पर निर्भर करेगी।