SC की बंगाल सरकार को सख्त फटकार: पूछा- इतनी देर क्यों, 5 फरवरी को लिस्ट देते तो...
New Delhi : सुप्रीम कोर्ट ने सोमवार को पश्चिम बंगाल सरकार की याचिका पर सुनवाई करते हुए राज्य को कड़ी फटकार लगाई। मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत की अगुवाई वाली बेंच ने बंगाल सरकार से सवाल किया कि माइक्रो ऑब्जर्वर नियुक्त करने के लिए क्लास-2 अधिकारियों की लिस्ट चुनाव आयोग को देने में इतनी देरी क्यों हुई। कोर्ट ने स्पष्ट कहा कि अगर पिछली सुनवाई (4 फरवरी) के अगले दिन ही लिस्ट दे दी जाती, तो आयोग समय पर फैसला ले सकता था।
बंगाल सरकार ने 8,505 अधिकारियों की लिस्ट सौंपी
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार के वकील श्याम दीवान ने मुख्य न्यायाधीश को बताया कि पश्चिम बंगाल सरकार स्पेशल इन्टेंसिव रिवीजन (SIR) के लिए माइक्रो ऑब्जर्वर के काम में सहयोग के लिए 8,505 क्लास-2 अधिकारियों को चुनाव आयोग को उपलब्ध कराने के लिए तैयार है। सुनवाई के दौरान ही यह लिस्ट चुनाव आयोग को सौंप दी गई।
सीजेआई की टिप्पणी और फटकार
मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत ने कहा:
- यह अच्छा होगा। स्थानीय अधिकारी परिस्थितियों को बेहतर समझते हैं। आप जल्द लिस्ट दे दें।
- 4 फरवरी को सुनवाई हुई थी। अगर 5 फरवरी को लिस्ट दे देते, तो आयोग अब तक फैसला ले चुका होता।
चुनाव आयोग की तरफ से बताया गया कि अभी तक न तो लिस्ट मिली थी और न ही अधिकारी उपलब्ध करवाए गए थे। इस पर कोर्ट ने राज्य सरकार को फटकार लगाई।
कोर्ट के सख्त निर्देश
सुप्रीम कोर्ट ने SIR प्रक्रिया को सुचारू और निष्पक्ष बनाने के लिए निम्नलिखित निर्देश दिए:
- राज्य सरकार सुनिश्चित करे कि सभी 8,505 अधिकारी अपने-अपने डिस्ट्रिक्ट इलेक्टोरल ऑफिसर (ERO) को रिपोर्ट करें।
- चुनाव आयोग अपने हिसाब से उन्हें काम सौंपे।
- आयोग इन अधिकारियों के बायो डेटा और कार्य अनुभव को देखकर माइक्रो ऑब्जर्वर बनाने का फैसला ले।
- इन अधिकारियों को संक्षिप्त प्रशिक्षण दिया जाए।
- इनकी अंतिम नियुक्ति का निर्णय ERO लेंगे।
- ERO को मतदाताओं के कागजात की जांच के लिए एक हफ्ता और समय दिया जाए।
पिछली सुनवाई की पृष्ठभूमि
4 फरवरी को हुई पिछली सुनवाई में पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी खुद कोर्ट में पेश हुई थीं और SIR प्रक्रिया पर सवाल उठाए थे। उन्होंने दूसरे राज्यों से माइक्रो ऑब्जर्वर बुलाने का विरोध किया था। चुनाव आयोग ने तब कहा था कि राज्य सरकार ने अधिकारी नहीं दिए, इसलिए बाहर से बुलाने पड़ रहे हैं। कोर्ट ने राज्य को क्लास-2 अधिकारी उपलब्ध करवाने का निर्देश दिया था।
यह सुनवाई मतदाता सूची के स्पेशल रिवीजन और SIR प्रक्रिया की निष्पक्षता से जुड़े विवाद को लेकर हो रही है। कोर्ट ने दोनों पक्षों से आशंकाओं का समाधान करने और प्रक्रिया को पारदर्शी बनाने पर जोर दिया।