भारत बनेगा Chip Manufacturing Hub! Semicon 2.0 के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये, 12 कंपनियां निवेश को तैयार
भारत ने सेमीकंडक्टर निर्माण को बढ़ावा देने के लिए Semicon 2.0 के तहत 1.27 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की अधिसूचना जारी की है। सरकार का लक्ष्य चिप डिजाइन और निर्माण का मजबूत इकोसिस्टम तैयार करना है। अगले वर्षों में घरेलू चिप उत्पादन, निवेश और रोजगार के अवसर तेजी से बढ़ने की उम्मीद है।
नई दिल्ली: मोबाइल फोन निर्माण के बाद अब भारत सेमीकंडक्टर यानी चिप निर्माण के क्षेत्र में अपनी पकड़ मजबूत करने की तैयारी में है। केंद्र सरकार ने सोमवार को Semicon 2.0 के तहत सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए 1.27 लाख करोड़ रुपये के प्रोत्साहन की अधिसूचना जारी की। इस राशि का इस्तेमाल तय नियमों के तहत भारत में सेमीकंडक्टर से जुड़े निवेश और निर्माण को बढ़ावा देने के लिए किया जाएगा।
सरकार का लक्ष्य देश में चिप डिजाइन से लेकर निर्माण, पैकेजिंग और टेस्टिंग तक का पूरा इकोसिस्टम तैयार करना है, ताकि भारत आने वाले वर्षों में सेमीकंडक्टर के क्षेत्र में आत्मनिर्भर बनने के साथ वैश्विक सप्लाई चेन का भी अहम हिस्सा बन सके।
Semicon 1.0 में 76 हजार करोड़ का था प्रावधान
सरकार ने इससे पहले Semicon 1.0 के तहत सेमीकंडक्टर सेक्टर में कंपनियों को भारत में निर्माण शुरू करने के लिए 76,000 करोड़ रुपये का प्रावधान किया था। इस योजना के तहत वर्ष 2022 में देश में सेमीकंडक्टर निर्माण की दिशा में काम शुरू हुआ।
सरकार के मुताबिक, अब तक देश में तीन कंपनियां अलग-अलग तरह के चिप का निर्माण शुरू कर चुकी हैं। इसे भारत में सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम के शुरुआती विस्तार के तौर पर देखा जा रहा है।
अगले 1-2 साल में जरूरत का 10% चिप भारत में बनेगा
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्री अश्विनी वैष्णव ने बताया कि अगले एक से दो वर्षों में भारत अपनी घरेलू जरूरत का करीब 10 प्रतिशत चिप देश में ही बनाने की स्थिति में पहुंच सकता है।
उन्होंने कहा कि वॉशिंग मशीन से लेकर विभिन्न औद्योगिक क्षेत्रों में इस्तेमाल होने वाले चिप का निर्माण भारत में शुरू हो चुका है। इसका मतलब है कि घरेलू इलेक्ट्रॉनिक्स और औद्योगिक उत्पादन में इस्तेमाल होने वाले सेमीकंडक्टर के लिए भारत की विदेशी निर्भरता धीरे-धीरे कम करने की दिशा में काम हो रहा है।
85 हजार इंजीनियरों को मिली ट्रेनिंग
सेमीकंडक्टर सेक्टर के विस्तार के साथ कुशल इंजीनियरों की जरूरत भी बढ़ रही है। सरकार के मुताबिक, पिछले चार वर्षों में करीब 85 हजार इंजीनियरों को सेमीकंडक्टर सेक्टर के लिए प्रशिक्षित किया जा चुका है।
मंत्री अश्विनी वैष्णव के अनुसार, भारत में सेमीकंडक्टर उत्पादन जिस गति से बढ़ रहा है, उसे देखते हुए आने वाले वर्षों में करीब एक लाख इंजीनियरों की जरूरत पड़ सकती है।
वैश्विक स्तर पर भी सेमीकंडक्टर उद्योग के लिए बड़ी संख्या में प्रशिक्षित मानव संसाधन की आवश्यकता होगी। अनुमान है कि वर्ष 2032 तक दुनिया में सेमीकंडक्टर निर्माण से जुड़े कामों के लिए करीब 10 लाख इंजीनियरों की जरूरत होगी और भारत इस मांग को पूरा करने में बड़ी भूमिका निभा सकता है।
सिर्फ चिप फैक्ट्री नहीं, पूरा इकोसिस्टम तैयार करने की तैयारी
सेमीकंडक्टर निर्माण केवल चिप फैक्ट्री लगाने तक सीमित नहीं है। इसके लिए देश में कच्चे माल, विशेष केमिकल, गैस, मशीनरी, उपकरण और अन्य जरूरी कंपोनेंट से जुड़ा पूरा सप्लाई नेटवर्क तैयार करना होता है।
सरकार का मानना है कि इस पूरे इकोसिस्टम के विकसित होने से रोजगार के अवसर भी तेजी से बढ़ेंगे। मंत्रालय के अनुमान के मुताबिक, सेमीकंडक्टर सेक्टर से जुड़े पूरे इकोसिस्टम को मिलाकर हर साल 50 से 60 हजार प्रत्यक्ष रोजगार पैदा होने की संभावना है।
Semicon 2.0 में इन क्षेत्रों पर रहेगा फोकस
इलेक्ट्रॉनिक्स एवं आईटी मंत्रालय के मुताबिक, Semicon 2.0 के तहत सरकारी सहायता को सेमीकंडक्टर सेक्टर के कई महत्वपूर्ण हिस्सों तक पहुंचाया जाएगा। इनमें प्रमुख रूप से चिप डिजाइन, मशीनरी और मैटेरियल, फैब सेटिंग, ATMP यानी असेंबलिंग, टेस्टिंग, मार्किंग और पैकेजिंग, OSAT यानी,, आउटसोर्स्ड सेमीकंडक्टर असेंबली एंड टेस्ट, रिसर्च एंड डेवलपमेंट, टैलेंट डेवलपमेंट शामिल हैं।
छह साल की होगी Semicon 2.0 योजना
Semicon 2.0 की अवधि छह साल निर्धारित की गई है। सरकार के अनुसार, करीब 12 कंपनियां भारत में निवेश करने में रुचि दिखा चुकी हैं।
Semicon 1.0 के जरिए देश में चिप निर्माण का शुरुआती इकोसिस्टम विकसित होने के बाद अब कंपनियां लंबी अवधि की रणनीति के साथ निवेश की तैयारी कर रही हैं। सरकार का मानना है कि सेमीकंडक्टर उद्योग में निवेश का असर सिर्फ अगले कुछ वर्षों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि कंपनियां अगले 20 से 30 वर्षों की संभावनाओं को ध्यान में रखकर अपनी योजनाएं तैयार कर रही हैं।
स्टार्टअप्स के लिए भी खुलेगा रास्ता
Semicon 2.0 में बड़े उद्योगों के साथ स्टार्टअप्स के लिए भी अवसर पैदा करने पर जोर है। नई कंपनियां चिप डिजाइन, टेक्नोलॉजी, रिसर्च और सेमीकंडक्टर से जुड़े अन्य क्षेत्रों में अपनी भूमिका बना सकती हैं। सरकार का मुख्य उद्देश्य देश में ऐसा आत्मनिर्भर और प्रतिस्पर्धी सेमीकंडक्टर इकोसिस्टम तैयार करना है, जिसमें डिजाइन से लेकर निर्माण और टेस्टिंग तक की क्षमताएं भारत में विकसित हों। अगर यह योजना तय दिशा में आगे बढ़ती है तो आने वाले वर्षों में भारत सिर्फ मोबाइल फोन का बड़ा निर्माता ही नहीं, बल्कि दुनिया की चिप सप्लाई चेन में भी एक महत्वपूर्ण केंद्र बन सकता है।