मौत की सजा पर शेख हसीना का आया बयान- मेरा पक्ष सुना ही नहीं ...
Dhaka/New Delhi : बांग्लादेश की राजनीति में बड़ा उलटफेर करते हुए इंटरनेशनल क्राइम ट्रिब्यूनल (ICT) ने देश की पूर्व प्रधानमंत्री शेख हसीना को मौत की सजा सुनाई है। यह फैसला पिछले साल जुलाई–अगस्त के दौरान हुए छात्र आंदोलन पर हुई घातक कार्रवाई के मामले में दिया गया है। हालांकि, भारत में रह रहीं शेख हसीना ने इस फैसले को एकतरफा, गैरकानूनी और राजनीतिक बदले की कार्रवाई बताया है।
ICT ने माना—हसीना थीं 'जुलाई विद्रोह' में हिंसा की मास्टरमाइंड
ट्रिब्यूनल ने कहा कि अभियोजन पक्ष ने “संदेह से परे” यह साबित कर दिया कि 15 जुलाई से 15 अगस्त 2023 के बीच छात्र विरोध प्रदर्शनों के दौरान हुई कार्रवाई में हसीना का सीधा हाथ था।
- संयुक्त राष्ट्र मानवाधिकार कार्यालय की रिपोर्ट के अनुसार, उस दौरान कम से कम 1,400 लोग मारे गए थे।
- कोर्ट इससे पहले हसीना को भगोड़ा घोषित कर चुका था।
पूर्व गृह मंत्री असदुज्जमां खान को भी मौत की सजा दी गई है, जबकि एक पूर्व पुलिस अधिकारी को सरकारी गवाह बनने पर 5 साल की सजा मिली।
“मेरा पक्ष सुना ही नहीं गया” — शेख हसीना
फैसले पर प्रतिक्रिया देते हुए शेख हसीना ने कहा:
- “यह फैसला मेरा पक्ष सुने बिना दिया गया है।”
- “ट्रिब्यूनल को एक गैर-निर्वाचित सरकार चला रही है जिसके पास जनता का कोई जनादेश नहीं है।”
- “ICT में कुछ भी अंतरराष्ट्रीय नहीं है। यह एक राजनीतिक अदालत बन चुकी है।”
उन्होंने आरोप लगाया कि न्यायाधिकरण ने केवल अवामी लीग के नेताओं पर मुकदमे चलाए, जबकि विपक्ष द्वारा की गई हिंसा को नजरअंदाज किया गया।
शेख हसीना ने कहा कि देश की मौजूदा “यूनुस सरकार” (डॉ. मोहम्मद यूनुस के नेतृत्व वाले अंतरिम शासन) अवामी लीग को खत्म करने की साजिश कर रही है।
- उनके अनुसार, “यूनुस की सेना ने देशभर में अवामी लीग के नेताओं-कार्यकर्ताओं के सैकड़ों घर लूटे। यह राजनीतिक सफाई का अभियान है।”
उन्होंने कहा कि यह फैसला बांग्लादेश के अंतिम निर्वाचित प्रधानमंत्री को हटाने और लोकतांत्रिक ताकतों को कमजोर करने का साधन बन गया है।
हसीना की मौत की सजा के बाद बांग्लादेश में राजनीतिक टकराव और बढ़ सकता है। अंतरराष्ट्रीय समुदाय में भी इस फैसले पर गंभीर सवाल उठ सकते हैं, क्योंकि हसीना दो दशक तक दक्षिण एशिया की सबसे प्रभावशाली नेताओं में रही हैं।