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कुछ बाहरी ताकतों ने पैदा किए दुर्भाग्यपूर्ण हालात, NLSIU के दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत का बड़ा बयान
 

 

बेंगलुरु। भारत के मुख्य न्यायाधीश (CJI) सूर्यकांत ने शनिवार को बेंगलुरु स्थित नेशनल लॉ स्कूल ऑफ इंडिया यूनिवर्सिटी (NLSIU) के 34वें दीक्षांत समारोह में बड़ा बयान दिया। उन्होंने कहा कि कुछ बाहरी ताकतों के कारण पैदा हुई अप्रत्याशित और दुर्भाग्यपूर्ण परिस्थितियों ने समारोह के आयोजन को लेकर अनिश्चितता पैदा कर दी थी। एक समय ऐसा लगने लगा था कि कार्यक्रम उम्मीद के मुताबिक आयोजित नहीं हो पाएगा।

विश्वविद्यालय के चांसलर के रूप में समारोह को संबोधित करते हुए CJI सूर्यकांत ने पिछले कुछ सप्ताह के दौरान सामने आई चुनौतियों का जिक्र किया। उन्होंने कहा कि तमाम अनिश्चितताओं और कठिन परिस्थितियों के बावजूद दीक्षांत समारोह का सफल आयोजन होना महत्वपूर्ण है।

पहले स्थगित करना पड़ा था दीक्षांत समारोह

दरअसल, विश्वविद्यालय का 34वां दीक्षांत समारोह पहले 12 सितंबर को आयोजित होना था। हालांकि, मुख्य न्यायाधीश सूर्यकांत और बार काउंसिल ऑफ इंडिया (BCI) के अध्यक्ष मनन कुमार मिश्रा को आमंत्रित किए जाने के विरोध में छात्रों और पूर्व छात्रों की आपत्तियों के बाद कार्यक्रम स्थगित कर दिया गया था।

इसके बाद विश्वविद्यालय प्रशासन ने समारोह की नई तारीख 17 अक्टूबर तय की। विवाद और विरोध के बावजूद शनिवार को कार्यक्रम आयोजित किया गया, जिसमें विद्यार्थियों को डिग्रियां प्रदान की गईं।

न्याय और स्वतंत्र विचारों का सम्मान करने की दी सलाह

दीक्षांत समारोह में CJI सूर्यकांत ने कानून की पढ़ाई पूरी करने वाले विद्यार्थियों को संबोधित करते हुए कहा कि कानूनी पेशे में केवल कानूनों और न्यायिक फैसलों की जानकारी होना पर्याप्त नहीं है। इसके लिए साहस, विनम्रता और न्याय के प्रति प्रतिबद्धता भी जरूरी है।

उन्होंने कहा कि एक अच्छे कानूनी पेशेवर को अलग-अलग विचारों को सुनने और समझने की क्षमता विकसित करनी चाहिए। असहमति जताते समय भी दूसरों की गरिमा का सम्मान करना आवश्यक है।

मुख्य न्यायाधीश ने विद्यार्थियों से न्याय, निष्पक्षता और बौद्धिक स्वतंत्रता के मूल्यों को बनाए रखने की अपील की। उन्होंने कहा कि कानूनी शिक्षा का उद्देश्य केवल कानून की जानकारी हासिल करना नहीं, बल्कि समाज के विभिन्न दृष्टिकोणों को समझना भी है।

बाहरी ताकतों को लेकर नहीं किया स्पष्ट खुलासा

हालांकि, अपने संबोधन में CJI सूर्यकांत ने उन बाहरी ताकतों की पहचान स्पष्ट नहीं की, जिनका उन्होंने जिक्र किया। उनका बयान विश्वविद्यालय में पिछले कुछ सप्ताह से जारी विवाद और दीक्षांत समारोह के आयोजन को लेकर उत्पन्न अनिश्चितता के बीच सामने आया है।