दारोगा भर्ती को लेकर पटना में छात्रों का हल्लाबोल, बैरिकेडिंग तोड़ी, CM आवास घेरने की कोशिश
पटना। बिहार में प्रतियोगी परीक्षाओं को लेकर अभ्यर्थियों का आक्रोश मंगलवार को सड़क पर देखने को मिला। बिहार दरोगा भर्ती, बीपीएससी 70वीं परीक्षा समेत 13 सूत्री मांगों को लेकर बड़ी संख्या में छात्रों ने गांधी मैदान से राजभवन की ओर मार्च शुरू किया। विधानसभा के पास पहुंचने की कोशिश कर रहे अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर पर पुलिस और सीआरपीएफ ने बैरिकेडिंग लगाकर रोक दिया। इस दौरान कुछ छात्र बैरिकेडिंग पर चढ़ गए और आगे बढ़ने का प्रयास करने लगे। पुलिस और छात्रों के बीच झड़प की भी खबर है।
जेपी गोलंबर पर रोका गया मार्च
गांधी मैदान से राजभवन की ओर बढ़ रहे छात्र-अभ्यर्थियों को जेपी गोलंबर के पास पुलिस ने आगे जाने से रोक दिया। मौके पर पटना पुलिस के साथ सीआरपीएफ की टीम भी तैनात थी। बैरिकेडिंग के बावजूद कुछ छात्र उस पर चढ़ गए और सरकार के खिलाफ नारेबाजी करने लगे।
इसके बाद कुछ अभ्यर्थियों ने एग्जीबिशन रोड के रास्ते डाक बंगला चौराहे की ओर बढ़ने की कोशिश की, लेकिन पुलिस ने वहां भी उन्हें रोक दिया। प्रदर्शन के दौरान छात्रों और पुलिस के बीच तनाव की स्थिति बनी रही।
दरोगा भर्ती और बीपीएससी परीक्षा रद्द करने की मांग
प्रदर्शनकारी अभ्यर्थियों का आरोप है कि 1,799 पदों पर हुई बिहार दरोगा भर्ती परीक्षा में गड़बड़ी हुई थी। इस मामले की जांच आर्थिक अपराध इकाई (ईओयू) कर रही है, लेकिन अब तक परीक्षा रद्द नहीं की गई है। छात्रों की मांग है कि जांच पूरी होने तक परीक्षा को रद्द कर दोबारा कराया जाए।
अभ्यर्थियों ने बीपीएससी 70वीं परीक्षा में कथित धांधली की निष्पक्ष जांच और परीक्षा दोबारा कराने की भी मांग की। उनका आरोप है कि परीक्षा में बड़े पैमाने पर अनियमितताएं हुईं, लेकिन इसके बावजूद इसे रद्द नहीं किया जा रहा है। छात्रों ने बीएसएससी की परीक्षाओं में देरी का मुद्दा भी उठाया।
'सरकार सिर्फ जांच का आश्वासन दे रही'
प्रदर्शनकारी छात्रों का कहना है कि सरकार की ओर से बार-बार जांच का आश्वासन दिया जा रहा है, लेकिन उनकी समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम नहीं उठाए जा रहे हैं। अभ्यर्थियों का आरोप है कि प्रतियोगी परीक्षाओं में कथित गड़बड़ियों और भर्ती प्रक्रिया में देरी से लाखों छात्रों का भविष्य प्रभावित हो रहा है।
छात्रों ने कहा कि जब तक उनकी 13 सूत्री मांगों पर निर्णय नहीं लिया जाता, तब तक आंदोलन जारी रहेगा। उन्होंने मांगें पूरी नहीं होने पर आंदोलन को और तेज करने की चेतावनी भी दी।
रोमित के परिजन भी आंदोलन में शामिल
दरोगा भर्ती के अभ्यर्थी रोमित की आत्महत्या के बाद उनके परिजन भी मंगलवार को छात्रों के आंदोलन में शामिल होने पटना पहुंचे। रोमित की मां और उनके भाई ने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी से न्याय की गुहार लगाई।
परिजनों ने कहा कि यदि सरकार वास्तव में रोमित को न्याय दिलाना चाहती है, तो प्रतियोगी परीक्षाओं में हो रही कथित गड़बड़ियों को खत्म करने के लिए ठोस कदम उठाने होंगे। उन्होंने भर्ती प्रक्रिया में पारदर्शिता और भ्रष्टाचार पर रोक लगाने की मांग की।
'आज मैंने अपना बेटा खोया, कल बिहार कई बेटे न खो दे'
रोमित की मां ने भावुक होकर कहा कि उन्होंने अपना बेटा खो दिया है, लेकिन वह नहीं चाहतीं कि भविष्य में बिहार के किसी और परिवार को ऐसा दर्द झेलना पड़े। उन्होंने कहा कि जब तक प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था में सुधार नहीं होगा, तब तक न जाने कितने परिवारों को अपने बच्चों को खोने का दर्द झेलना पड़ सकता है।
परिजनों के मुताबिक, रोमित पढ़ाई में तेज था और उसने नेट की परीक्षा भी क्वालीफाई की थी। उसका सपना दरोगा बनने का था। परिवार का आरोप है कि भर्ती प्रक्रिया में कथित गड़बड़ियों और लगातार तनाव के बीच वह डिप्रेशन में चला गया, जिसके बाद उसने अपनी जान दे दी।
परिवार के लिए एक करोड़ रुपये और सरकारी नौकरी की मांग
अभ्यर्थियों ने रोमित के परिवार को एक करोड़ रुपये की आर्थिक सहायता और परिवार के एक सदस्य को सरकारी नौकरी देने की मांग की है। छात्रों का कहना है कि रोमित की मौत प्रतियोगी परीक्षाओं की व्यवस्था पर गंभीर सवाल खड़े करती है।
अभ्यर्थियों ने सरकार से छात्रों की समस्याओं और भर्ती परीक्षाओं में सामने आ रही कथित अनियमितताओं पर गंभीरता से कार्रवाई करने, परीक्षाओं में पारदर्शिता सुनिश्चित करने और लंबित मांगों का जल्द समाधान करने की अपील की है।