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बंगाल में वोट कटने के आरोपों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, ममता बनर्जी को नई याचिका दाखिल करने की अनुमति
 

 

नई दिल्ली: पश्चिम बंगाल में मतदाता सूची के विशेष गहन पुनरीक्षण (SIR) के दौरान काटे गए वोटों और विधानसभा सीटों पर जीत के कम अंतर को लेकर सुप्रीम कोर्ट में नई याचिकाएं दाखिल करने का रास्ता साफ हो गया है। सर्वोच्च न्यायालय ने पश्चिम बंगाल की पूर्व मुख्यमंत्री ममता बनर्जी समेत अन्य याचिकाकर्ताओं को इस मुद्दे पर नई याचिकाएं दायर करने की अनुमति दे दी है।

सोमवार को मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत और न्यायाधीश जॉयमाल्या बागची की पीठ ने मामले की सुनवाई करते हुए यह निर्देश जारी किया। अदालत में तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) के सांसद और वरिष्ठ अधिवक्ता कल्याण बनर्जी ने दलील दी कि राज्य की 31 विधानसभा सीटों पर जीत का अंतर उन वोटों की संख्या से भी कम था, जिन्हें मतदाता सूची से हटाया गया था।

चुनाव आयोग ने क्या कहा?

सुनवाई के दौरान चुनाव आयोग ने सुप्रीम कोर्ट में अपना पक्ष रखते हुए कहा कि इस तरह के विवादों के लिए चुनाव याचिका ही उचित कानूनी माध्यम है। आयोग ने यह भी स्पष्ट किया कि एसआईआर प्रक्रिया और वोट जोड़ने या हटाने के खिलाफ अपीलों के मामलों में वह जवाबदेह है।

सुप्रीम कोर्ट ने दोनों पक्षों की दलीलें सुनने के बाद याचिकाकर्ताओं को नई याचिकाएं दाखिल करने की अनुमति दे दी। इसे चुनावी प्रक्रिया में पारदर्शिता और निष्पक्षता सुनिश्चित करने की दिशा में अहम कदम माना जा रहा है।

पश्चिम बंगाल चुनाव के आंकड़े

हाल ही में हुए पश्चिम बंगाल विधानसभा चुनाव में 294 सदस्यीय विधानसभा में भारतीय जनता पार्टी (भाजपा) ने 207 सीटों पर जीत दर्ज की, जबकि तृणमूल कांग्रेस (टीएमसी) को 80 सीटें मिलीं। चुनाव में 90 प्रतिशत से अधिक मतदान रिकॉर्ड किया गया था।

मालदा हिंसा मामले में NIA को निर्देश

इसी दौरान सुप्रीम कोर्ट ने पश्चिम बंगाल के मालदा जिले में 1 अप्रैल को हुई हिंसा के मामले में राष्ट्रीय जांच एजेंसी (NIA) को दो महीने के भीतर जांच पूरी करने का निर्देश दिया है। इस घटना में भीड़ ने सात न्यायिक अधिकारियों को करीब नौ घंटे तक बंधक बना लिया था।

पीठ ने कहा कि जांच पूरी होने के बाद एनआईए सक्षम अदालत के समक्ष अपनी रिपोर्ट दाखिल करे। सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एस.वी. राजू ने अदालत को मामले की विस्तृत स्थिति रिपोर्ट देने की बात कही।