फर्जी AI-जनित फैसलों पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, मामला दोबारा NCLT को भेजा
New Delhi : न्यायिक प्रक्रिया में आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) के इस्तेमाल को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ी नाराजगी जताई है। अदालत ने नेशनल कंपनी लॉ ट्रिब्यूनल (NCLT) और नेशनल कंपनी लॉ अपीलेट ट्रिब्यूनल (NCLAT) के उन आदेशों को रद्द कर दिया, जिनमें AI द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक न्यायिक फैसलों का हवाला दिया गया था। सुप्रीम कोर्ट ने इसे न्याय व्यवस्था के लिए गंभीर खतरा बताते हुए कहा कि बिना मानवीय जांच के AI का उपयोग "अदृश्य विनाश" को न्योता देने जैसा है।
'भोपाल गैस त्रासदी जैसी हो सकती है स्थिति'
जस्टिस पी.एस. नरसिम्हा और जस्टिस आलोक अराधे की पीठ ने सुनवाई के दौरान AI से तैयार फर्जी कानूनी संदर्भों पर गहरी चिंता व्यक्त की। अदालत ने इसकी तुलना भोपाल गैस त्रासदी में मिथाइल आइसोसाइनेट गैस के रिसाव से करते हुए कहा कि यदि इस तकनीक का नियंत्रित और जिम्मेदारी से उपयोग नहीं किया गया, तो न्याय व्यवस्था को गंभीर नुकसान हो सकता है।
क्या है पूरा मामला?
मामला जम्मू-कश्मीर बैंक द्वारा पैन इंडिया यूटिलिटीज को दिए गए 200 करोड़ रुपये के ऋण से जुड़ा है। इस ऋण की कॉरपोरेट गारंटी एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स लिमिटेड ने दी थी। करीब 87.43 करोड़ रुपये बकाया रहने पर बैंक ने कंपनी के खिलाफ दिवालिया प्रक्रिया शुरू करने के लिए NCLT का रुख किया।
अगस्त 2024 में NCLT ने दिवालिया कार्यवाही की अनुमति दे दी, जिसे सितंबर 2025 में NCLAT ने भी बरकरार रखा।
AI ने गढ़ दिए छह फर्जी फैसले
सुप्रीम कोर्ट में सुनवाई के दौरान एस्सेल इंफ्राप्रोजेक्ट्स की ओर से वरिष्ठ अधिवक्ता माधवी दीवान ने बताया कि दोनों ट्रिब्यूनलों ने अपने आदेशों में SBI और ICICI बैंक से जुड़े छह ऐसे न्यायिक फैसलों का उल्लेख किया, जो वास्तव में कभी अस्तित्व में ही नहीं थे। ये सभी संदर्भ AI टूल द्वारा तैयार किए गए काल्पनिक केस थे।
वहीं, जम्मू-कश्मीर बैंक ने भी अदालत को बताया कि उसके वकीलों ने इन फैसलों का कोई उल्लेख नहीं किया था और इन्हें ट्रिब्यूनल ने स्वयं अपने आदेश में शामिल किया था।
सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?
सुप्रीम कोर्ट ने NCLT और NCLAT के आदेशों को पूरी तरह रद्द करते हुए मामला दोबारा सुनवाई के लिए NCLT को भेज दिया। अदालत ने स्पष्ट किया कि न्यायिक आदेशों में मनगढ़ंत या AI-जनित काल्पनिक फैसलों का इस्तेमाल किसी भी स्थिति में स्वीकार नहीं किया जाएगा और इस मामले में 'जीरो टॉलरेंस' की नीति अपनाई जाएगी।
AI का इस्तेमाल हो, लेकिन मानवीय निगरानी जरूरी
सुप्रीम कोर्ट ने कहा कि न्यायिक कार्यों में AI का सहायक उपकरण के रूप में उपयोग करने पर कोई रोक नहीं है, लेकिन हर जानकारी की मानवीय जांच और सत्यापन अनिवार्य है। अदालत ने बार काउंसिल ऑफ इंडिया को भी निर्देश दिया कि वह कानूनी पेशे पर AI के प्रभाव और उससे जुड़ी चुनौतियों का अध्ययन करने के लिए विशेषज्ञ समिति गठित करने पर विचार करे।