सुप्रीम कोर्ट ने 'यादव जी की लव स्टोरी' पर याचिका खारिज की, फिल्म का टाइटल यादव समुदाय को नहीं दिखाता नकारात्मक, 27 फरवरी को रिलीज
नई दिल्ली I Supreme Court of India ने फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के टाइटल को लेकर दायर याचिका को खारिज कर दिया है। याचिका में फिल्म पर प्रतिबंध लगाने या उसका नाम बदलने की मांग की गई थी। अदालत ने स्पष्ट किया कि फिल्म का शीर्षक यादव समुदाय को किसी भी प्रकार से नकारात्मक रूप में प्रस्तुत नहीं करता।
यह याचिका विश्व यादव परिषद के प्रमुख की ओर से दाखिल की गई थी। उनका तर्क था कि फिल्म में एक हिंदू लड़की और मुस्लिम युवक की इंटर-फेथ मैरिज की कहानी दिखाई गई है, जिससे समुदाय की छवि प्रभावित हो सकती है। हालांकि, सुप्रीम कोर्ट ने इस दलील को स्वीकार नहीं किया।
जस्टिस बी.वी. नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने सुनवाई के दौरान कहा कि रिकॉर्ड में मौजूद सामग्री देखने के बाद उन्हें ऐसा कोई आधार नहीं मिला, जिससे यह साबित हो कि फिल्म का टाइटल यादव समुदाय को गलत या अपमानजनक तरीके से दर्शाता है। बेंच ने टिप्पणी की कि केवल किसी समुदाय का नाम फिल्म के शीर्षक में होने से यह नहीं माना जा सकता कि उसे नकारात्मक रूप में पेश किया गया है।
अदालत ने हाल ही में आए ‘घूसखोर पंडित’ मामले का भी उल्लेख किया, जहां ‘घूसखोर’ शब्द का अर्थ ‘भ्रष्ट’ होता है और वह सीधे तौर पर नकारात्मक संकेत देता है। लेकिन ‘यादव जी की लव स्टोरी’ के शीर्षक में ऐसा कोई शब्द नहीं है जो समुदाय की छवि को ठेस पहुंचाता हो।
पीठ ने संविधान के अनुच्छेद 19(2) के तहत अभिव्यक्ति की स्वतंत्रता पर रोक लगाने से इनकार करते हुए कहा कि फिल्म का शीर्षक आपत्तिजनक नहीं है। याचिकाकर्ता के वकील ने यह भी दलील दी कि उन्हें इंटर-कास्ट या इंटर-फेथ विवाह से आपत्ति नहीं है, बल्कि फिल्म में महिला के चित्रण पर सवाल है। अदालत ने इसे काल्पनिक कहानी (फिक्शन) मानते हुए हस्तक्षेप से इंकार कर दिया।
अब फिल्म ‘यादव जी की लव स्टोरी’ 27 फरवरी 2026 को देशभर के सिनेमाघरों में रिलीज होगी। इस फैसले को फिल्म निर्माताओं के लिए बड़ी कानूनी राहत माना जा रहा है।