मद्रास हाई कोर्ट जज को निशाना बनाकर प्रदर्शन पर सुप्रीम कोर्ट सख्त, तमिलनाडु सरकार से मांगा जवाब
New Delhi : मद्रास हाई कोर्ट के एक जज को निशाना बनाकर तमिलनाडु में किए जा रहे विरोध-प्रदर्शनों को लेकर सुप्रीम कोर्ट ने कड़ा रुख अपनाया है। शीर्ष अदालत ने इस मामले को गंभीर मानते हुए राज्य सरकार के वरिष्ठ अधिकारियों से जवाब तलब किया है। याचिका में आरोप लगाया गया है कि हाई कोर्ट के एक फैसले के बाद जज के खिलाफ खुलेआम प्रदर्शन, आपत्तिजनक नारेबाजी और सोशल मीडिया पर मानहानि की गई।
कैसे शुरू हुआ विवाद
मामला मद्रास हाई कोर्ट के जस्टिस जी.आर. स्वामीनाथन के एक आदेश से जुड़ा है। उन्होंने मदुरै के थिरुपरंकुंद्रम पहाड़ी स्थित भगवान मुरुगन को समर्पित प्राचीन मंदिर के पारंपरिक दीप स्तंभ में दीप जलाने की अनुमति दी थी। हिंदू श्रद्धालु तमिल कार्तिक महीने की पूर्णिमा पर ‘कार्थीगई दीपम’ उत्सव मनाना चाहते थे, लेकिन राज्य सरकार ने दीप स्तंभ के पास मस्जिद होने का हवाला देते हुए इसकी अनुमति देने से इनकार किया था।
जज के खिलाफ लगाए गए भड़काऊ नारे
हाई कोर्ट के आदेश के बाद कुछ संगठनों और राजनीतिक दलों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिए। इन प्रदर्शनों में जस्टिस स्वामीनाथन को व्यक्तिगत रूप से निशाना बनाया गया और उनके खिलाफ जाति व धर्म के आधार पर भड़काऊ और आपत्तिजनक नारे लगाए गए। आरोप है कि सोशल मीडिया और कुछ मीडिया प्लेटफॉर्म्स पर भी जज के खिलाफ अपमानजनक टिप्पणियां की गईं।
वकील की याचिका में गंभीर आरोप
तमिलनाडु के वकील और बीजेपी नेता जी.एस. मणि ने इस मामले को सुप्रीम कोर्ट में उठाया है। याचिका में कहा गया है कि इस तरह की गतिविधियों से न सिर्फ न्यायपालिका की गरिमा को ठेस पहुंची है, बल्कि राज्य में सार्वजनिक व्यवस्था भी प्रभावित हुई है। याचिकाकर्ता का आरोप है कि राज्य सरकार ने अब तक प्रदर्शनकारियों के खिलाफ कोई ठोस कार्रवाई नहीं की।
सुप्रीम कोर्ट ने जताई चिंता
इस मामले की सुनवाई सुप्रीम कोर्ट की जस्टिस अरविंद कुमार और जस्टिस पी.बी. वराले की पीठ के समक्ष हुई। बेंच ने कहा कि जजों को निशाना बनाकर की जा रही गतिविधियां न्याय व्यवस्था के लिए बेहद चिंताजनक हैं।
कोर्ट ने तमिलनाडु सरकार के वकील को तलब करते हुए राज्य के मुख्य सचिव, गृह सचिव, डीजीपी और चेन्नई पुलिस आयुक्त को नोटिस जारी किया है।
दो हफ्ते में रिपोर्ट तलब
जस्टिस अरविंद कुमार ने निर्देश दिया कि संबंधित अधिकारी दो सप्ताह के भीतर अपनी रिपोर्ट दाखिल करें। रिपोर्ट का अध्ययन करने के बाद सुप्रीम कोर्ट आगे की कार्रवाई पर फैसला करेगा।