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सुप्रीम कोर्ट का बड़ा फैसला: वोटर लिस्ट की जांच को मंजूरी, अब संदिग्ध नागरिकों की होगी जांच

 

देश में निष्पक्ष और पारदर्शी चुनावों को लेकर Supreme Court of India ने बुधवार को एक अहम फैसला सुनाया। मुख्य न्यायाधीश सूर्य कांत की अध्यक्षता वाली पीठ ने चुनाव आयोग द्वारा कराए जा रहे विशेष गहन पुनरीक्षण (Special Intensive Revision-SIR) को संवैधानिक और वैध ठहराया है।

कोर्ट ने साफ कहा कि लोकतंत्र की मजबूती के लिए मतदाता सूची की शुद्धता बेहद जरूरी है और स्वतंत्र एवं निष्पक्ष चुनाव कराना संवैधानिक जिम्मेदारी है। इस फैसले के बाद पश्चिम बंगाल और बिहार जैसे राज्यों में वोटर लिस्ट से संदिग्ध नाम हटाने की प्रक्रिया तेज होने के संकेत मिल रहे हैं।

क्या है SIR और क्यों बढ़ा विवाद?

Election Commission of India ने बिहार और पश्चिम बंगाल समेत कई राज्यों में मतदाता सूची अपडेट करने के लिए SIR अभियान शुरू किया था। इसके तहत उन मतदाताओं से दस्तावेज मांगे जा रहे हैं, जिनके नाम 2002 या 2003 की वोटर लिस्ट में मौजूद नहीं थे।

आयोग का कहना है कि इस प्रक्रिया का उद्देश्य फर्जी दस्तावेजों के आधार पर वोटर लिस्ट में शामिल हुए अवैध या संदिग्ध नागरिकों की पहचान करना है।

सुप्रीम कोर्ट ने क्या कहा?

सुप्रीम कोर्ट ने अपने फैसले में कहा कि चुनाव आयोग को संविधान के अनुच्छेद 324 के तहत मतदाता सूची की सत्यता जांचने का अधिकार है। कोर्ट ने यह भी माना कि नागरिकता का सीमित सत्यापन चुनाव प्रक्रिया का हिस्सा हो सकता है।

अदालत ने यह भी स्पष्ट किया कि केवल आधार कार्ड या साधारण वोटर आईडी नागरिकता का अंतिम प्रमाण नहीं माने जा सकते। यदि किसी व्यक्ति की नागरिकता पर संदेह हो, तो आयोग जांच कर सकता है।

संदिग्ध नागरिकों की सूची गृह मंत्रालय को भेजी जाएगी

कोर्ट ने निर्देश दिया कि यदि SIR प्रक्रिया के दौरान कोई व्यक्ति अपनी नागरिकता साबित नहीं कर पाता है, तो उसका मामला गृह मंत्रालय को भेजा जाएगा। इसके बाद नागरिकता अधिनियम के तहत अंतिम फैसला लिया जाएगा।

साथ ही अदालत ने यह भी कहा कि जिन लोगों के नाम वोटर लिस्ट से हटाए जाएंगे, उनकी सूची कारणों सहित सार्वजनिक की जाए, ताकि पूरी प्रक्रिया में पारदर्शिता बनी रहे।

बंगाल और बिहार में सबसे ज्यादा असर

इस फैसले का सबसे बड़ा असर पश्चिम बंगाल और बिहार में देखने को मिल सकता है। जानकारी के मुताबिक बिहार में SIR प्रक्रिया के दौरान ड्राफ्ट सूची से करीब 65 लाख नाम हटाए गए थे। वहीं पश्चिम बंगाल में भी लाखों मतदाताओं के दस्तावेजों की जांच चल रही है।

उत्तर 24 परगना, मालदा और मुर्शिदाबाद जैसे सीमावर्ती जिलों में इस फैसले के बाद प्रशासनिक गतिविधियां और तेज हो सकती हैं। इन इलाकों में पहले से ही नागरिकता और Citizenship Amendment Act को लेकर राजनीतिक बहस जारी है।

विपक्ष को लगा झटका

Association for Democratic Reforms और कई विपक्षी दलों ने SIR प्रक्रिया को ‘पिछले दरवाजे से NRC’ लागू करने की कोशिश बताते हुए सुप्रीम कोर्ट में चुनौती दी थी। हालांकि अदालत ने इन दलीलों को खारिज कर दिया।

All India Trinamool Congress समेत विपक्षी दल लगातार इस प्रक्रिया का विरोध कर रहे थे। वहीं राजनीतिक विशेषज्ञों का मानना है कि सुप्रीम कोर्ट के इस फैसले से आने वाले समय में बंगाल और बिहार की राजनीति पर बड़ा असर पड़ सकता है।