सुप्रीम कोर्ट की अहम टिप्पणी: साइबर ठगी के पीड़ितों को मिले मुआवजा, सरकार बढ़ाए जागरूकता अभियान
नई दिल्ली। देश में बढ़ते साइबर अपराधों को लेकर Supreme Court of India ने महत्वपूर्ण टिप्पणी करते हुए कहा है कि सरकार को साइबर घोटालों में अपनी मेहनत की कमाई गंवा चुके कमजोर और असहाय लोगों को मुआवजा देने पर विचार करना चाहिए। साथ ही जनता को जागरूक कर उनकी सुरक्षा के लिए ठोस कदम उठाए जाने चाहिए।
जस्टिस बीवी नागरत्ना और जस्टिस उज्जल भुइयां की पीठ ने परमजीत खरब को जमानत देते हुए ये टिप्पणियां कीं। खरब पर फर्जी बैंक खाते खुलवाने और उन्हें साइबर अपराधियों को बेचने का आरोप है। इन खातों के जरिए ऑनलाइन ठगी के पीड़ितों से वसूली गई रकम जमा कराई जाती थी।
सह-आरोपियों को मिल चुकी है जमानत
अदालत ने मार्च 2024 से हिरासत में बंद खरब को इस आधार पर जमानत दी कि मामले में अन्य सह-आरोपियों को पहले ही राहत मिल चुकी है। कोर्ट ने निर्देश दिया कि खरब अपना पासपोर्ट निचली अदालत में जमा करेगा और हर महीने के पहले सोमवार को संबंधित पुलिस स्टेशन में हाजिरी लगाएगा। साथ ही उसे गवाहों को प्रभावित न करने और सबूतों से छेड़छाड़ न करने की सख्त हिदायत दी गई है। शर्तों के उल्लंघन पर जमानत रद्द की जा सकती है।
बुजुर्गों की सुरक्षा पर विशेष जोर
सुनवाई के दौरान जस्टिस नागरत्ना ने सरकार से कहा कि पुलिस को बुजुर्गों की सुरक्षा के लिए विशेष कदम उठाने चाहिए। उन्होंने सुझाव दिया कि टीवी और रेडियो पर ऐसे जागरूकता संदेश प्रसारित किए जाएं, जिनसे लोगों को पता चले कि साइबर अपराधी किस तरह ठगी को अंजाम देते हैं। अदालत ने कहा कि कई लोगों ने अपनी जीवनभर की कमाई गंवाई है, इसलिए उन्हें अपराधियों के तौर-तरीकों से अवगत कराना बेहद जरूरी है।
‘संचार साथी’ ऐप की जानकारी
सुनवाई के दौरान अतिरिक्त सॉलिसिटर जनरल एसडी संजय ने बताया कि साइबर अपराधी बेहद चालाकी से लोगों को निशाना बनाते हैं। उन्होंने कहा कि वह स्वयं भी एक बार ठगी का शिकार होते-होते बचे थे। उन्होंने कोर्ट को ‘संचार साथी’ ऐप की जानकारी दी, जिसके जरिए लोग साइबर अपराध, मोबाइल चोरी या पहचान की चोरी की शिकायत दर्ज करा सकते हैं।