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केंद्र सरकार का बड़ा फैसला: एथेनॉल उत्पादन में चीनी के इस्तेमाल पर रोक, अब मक्का और चावल से बनेगा एथेनॉल
 

 

मुंबई। केंद्र सरकार ने घरेलू बाजार में चीनी की पर्याप्त उपलब्धता सुनिश्चित करने और बढ़ती कीमतों पर नियंत्रण पाने के लिए बड़ा फैसला लिया है। सरकार ने एथेनॉल आपूर्ति वर्ष 2026-27 के दौरान चीनी के इस्तेमाल से एथेनॉल उत्पादन पर रोक लगाने का निर्देश दिया है। इसके तहत तेल विपणन कंपनियों की नई खरीद निविदा से गन्ने के रस, चीनी, चीनी सिरप और बी-हैवी शीरे से तैयार एथेनॉल को बाहर कर दिया गया है।

शुक्रवार, 16 अक्टूबर को जारी निविदा के मुताबिक, सरकारी तेल कंपनियों इंडियन ऑयल कॉरपोरेशन, भारत पेट्रोलियम और हिंदुस्तान पेट्रोलियम ने आगामी आपूर्ति वर्ष के लिए करीब 1,100 करोड़ लीटर एथेनॉल खरीदने के उद्देश्य से बोलियां आमंत्रित की हैं। यह आपूर्ति वर्ष 1 नवंबर 2026 से शुरू होकर 31 अक्टूबर 2027 तक चलेगा।

अब मक्का और चावल से होगा एथेनॉल का उत्पादन

नई व्यवस्था के तहत एथेनॉल उत्पादक मक्का, टूटे चावल, भारतीय खाद्य निगम (FCI) से प्राप्त अतिरिक्त चावल और सी-हैवी शीरे जैसे वैकल्पिक कच्चे माल से तैयार एथेनॉल की आपूर्ति के लिए बोली लगा सकेंगे। सरकार का उद्देश्य एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी पर निर्भरता कम करना और घरेलू बाजार में इसकी उपलब्धता बनाए रखना है।

महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश बनी चिंता

देश के प्रमुख गन्ना उत्पादक राज्यों महाराष्ट्र और कर्नाटक में कम बारिश के कारण गन्ने की पैदावार प्रभावित होने की आशंका जताई जा रही है। उत्पादन में संभावित गिरावट के बीच चीनी की कीमतों में तेजी ने सरकार की चिंता बढ़ा दी है। ऐसे में एथेनॉल उत्पादन के लिए चीनी के इस्तेमाल को सीमित करने के बजाय पूरी तरह शून्य करने का निर्णय लिया गया है।

पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण का लक्ष्य बरकरार

गौरतलब है कि भारत सरकार ने पेट्रोल में 20 प्रतिशत एथेनॉल मिश्रण (E20) को बढ़ावा दिया है। इसका उद्देश्य कच्चे तेल के आयात पर निर्भरता कम करना और प्रदूषण में कमी लाना है।

हालांकि, चीनी आधारित एथेनॉल को नई निविदा से बाहर किए जाने के बाद अब मक्का और चावल जैसे वैकल्पिक स्रोतों की भूमिका और महत्वपूर्ण हो जाएगी। सरकार के इस कदम से जहां घरेलू चीनी आपूर्ति को सहारा मिलने की उम्मीद है, वहीं एथेनॉल उद्योग को कच्चे माल के नए विकल्पों पर अधिक निर्भर रहना होगा।