घरेलू गैस के दाम बढ़ने पर आया सरकार का बयान, जानिए क्या दी सफाई
Jun 7, 2026, 13:10 IST
केंद्र सरकार ने घरेलू रसोई गैस (LPG) उपभोक्ताओं को झटका देते हुए 14.2 किलोग्राम वाले घरेलू सिलेंडर की कीमत में 29 रुपये की बढ़ोतरी कर दी है। नई दरों के अनुसार दिल्ली में घरेलू एलपीजी सिलेंडर अब 913 रुपये की जगह 942 रुपये में मिलेगा।
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती दरों पर एलपीजी उपलब्ध कराई जा रही है।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को राहत
सरकार के अनुसार Pradhan Mantri Ujjwala Yojana (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा। 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद उज्ज्वला योजना के पात्र परिवारों को घरेलू गैस सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध होगा।
हालांकि, सब्सिडी वितरण को लेकर भी चर्चा है। पिछले वर्ष सरकार ने साल में नौ बार सब्सिडी देने की घोषणा की थी, जबकि वर्तमान व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को सीमित संख्या में सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान का दावा
केंद्र सरकार का कहना है कि उपभोक्ता केवल 942 रुपये का भुगतान कर रहे हैं, जबकि वास्तविक लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां और सरकार स्वयं वहन कर रही हैं।
सरकार के मुताबिक घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इससे पहले यह नुकसान करीब 41,338 करोड़ रुपये था। इस घाटे की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने को मंजूरी दी है।
कई देशों से अब भी सस्ता LPG
सरकार ने दावा किया है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें अभी भी कई पड़ोसी देशों और विकसित देशों की तुलना में कम हैं। सरकार के अनुसार पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में उपभोक्ताओं को गैस के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
सरकार का यह भी कहना है कि वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई। साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था भी की गई।
क्यों बढ़ाए गए दाम?
सरकार के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, आयात लागत में इजाफा और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का दावा है कि कीमतों में यह सीमित बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को वैश्विक बाजार के पूरे प्रभाव से बचाने और देशभर में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
हालांकि, महंगाई के दौर में रसोई गैस की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।
कीमतों में बढ़ोतरी के बाद सरकार ने इस फैसले का बचाव करते हुए कहा है कि अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में भारी उछाल के बावजूद भारत में उपभोक्ताओं को दुनिया के कई देशों की तुलना में सस्ती दरों पर एलपीजी उपलब्ध कराई जा रही है।
उज्ज्वला योजना लाभार्थियों को राहत
सरकार के अनुसार Pradhan Mantri Ujjwala Yojana (PMUY) के लाभार्थियों को सब्सिडी का लाभ मिलता रहेगा। 300 रुपये की सब्सिडी मिलने के बाद उज्ज्वला योजना के पात्र परिवारों को घरेलू गैस सिलेंडर 642 रुपये में उपलब्ध होगा।
हालांकि, सब्सिडी वितरण को लेकर भी चर्चा है। पिछले वर्ष सरकार ने साल में नौ बार सब्सिडी देने की घोषणा की थी, जबकि वर्तमान व्यवस्था के तहत लाभार्थियों को सीमित संख्या में सब्सिडी का लाभ मिल रहा है।
तेल कंपनियों को भारी नुकसान का दावा
केंद्र सरकार का कहना है कि उपभोक्ता केवल 942 रुपये का भुगतान कर रहे हैं, जबकि वास्तविक लागत का बड़ा हिस्सा सार्वजनिक क्षेत्र की तेल कंपनियां और सरकार स्वयं वहन कर रही हैं।
सरकार के मुताबिक घरेलू एलपीजी की बिक्री पर सार्वजनिक क्षेत्र की पेट्रोलियम कंपनियों को पिछले वित्तीय वर्ष में लगभग 60 हजार करोड़ रुपये का नुकसान हुआ। इससे पहले यह नुकसान करीब 41,338 करोड़ रुपये था। इस घाटे की आंशिक भरपाई के लिए केंद्र सरकार ने तेल कंपनियों को 30 हजार करोड़ रुपये की वित्तीय सहायता देने को मंजूरी दी है।
कई देशों से अब भी सस्ता LPG
सरकार ने दावा किया है कि भारत में घरेलू एलपीजी की कीमतें अभी भी कई पड़ोसी देशों और विकसित देशों की तुलना में कम हैं। सरकार के अनुसार पाकिस्तान, नेपाल, बांग्लादेश, श्रीलंका, अमेरिका, ऑस्ट्रेलिया और कनाडा जैसे देशों में उपभोक्ताओं को गैस के लिए अधिक कीमत चुकानी पड़ती है।
सरकार का यह भी कहना है कि वैश्विक आपूर्ति संकट के दौरान देश में एलपीजी की उपलब्धता बनाए रखने के लिए घरेलू उत्पादन में 60 प्रतिशत से अधिक वृद्धि की गई। साथ ही अमेरिका, कनाडा और अल्जीरिया जैसे देशों से अतिरिक्त आयात की व्यवस्था भी की गई।
क्यों बढ़ाए गए दाम?
सरकार के मुताबिक अंतरराष्ट्रीय बाजार में गैस की कीमतों में लगातार बढ़ोतरी, आयात लागत में इजाफा और तेल कंपनियों पर बढ़ते वित्तीय दबाव को देखते हुए यह फैसला लिया गया है। सरकार का दावा है कि कीमतों में यह सीमित बढ़ोतरी उपभोक्ताओं को वैश्विक बाजार के पूरे प्रभाव से बचाने और देशभर में एलपीजी की निर्बाध आपूर्ति सुनिश्चित करने के लिए की गई है।
हालांकि, महंगाई के दौर में रसोई गैस की कीमत बढ़ने से आम उपभोक्ताओं के घरेलू बजट पर अतिरिक्त बोझ पड़ना तय माना जा रहा है।