‘वंदे मातरम्’ का अपमान अब पड़ेगा भारी! राष्ट्रपति की मंजूरी के बाद नया कानून लागू, जानें क्या है सजा
नई दिल्ली। राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को लेकर सरकार ने नए प्रावधान किए हैं। संसद के दोनों सदनों से विधेयक पारित होने के बाद अब राष्ट्रगीत के गायन में बाधा डालने या जानबूझकर इसे रोकने पर सजा का प्रावधान किया गया है। केंद्रीय गृह मंत्रालय के अनुसार, इस बार स्वतंत्रता दिवस समारोह में पहली बार लाल किले की प्राचीर से ‘वंदे मातरम्’ का गायन किया जाएगा।
गायन रोकने पर 3 साल तक की सजा
नए कानून के तहत यदि कोई व्यक्ति जानबूझकर ‘वंदे मातरम्’ के गायन को रोकता है या इसे गा रही सभा में व्यवधान डालता है, तो उसे अधिकतम तीन साल तक की जेल, जुर्माना या दोनों की सजा हो सकती है।
वहीं, यदि कोई व्यक्ति दोबारा या बार-बार ऐसा अपराध करता है तो उसके लिए कम से कम एक साल की अनिवार्य जेल का प्रावधान किया गया है।
राष्ट्रगान के समान सुरक्षा का प्रावधान
अब तक राष्ट्रीय गौरव अपमान निवारण अधिनियम के तहत राष्ट्रगान ‘जन गण मन’ के अपमान को लेकर सजा का प्रावधान था। नए संशोधन के जरिए राष्ट्रगीत ‘वंदे मातरम्’ को भी इसी तरह के कानूनी संरक्षण के दायरे में लाया गया है।
डॉ. राजेंद्र प्रसाद के बयान का भी जिक्र
विधेयक के उद्देश्यों में संविधान सभा के अध्यक्ष डॉ. राजेंद्र प्रसाद के 24 जनवरी 1950 के ऐतिहासिक वक्तव्य का उल्लेख किया गया है। इसमें कहा गया था कि बंकिम चंद्र चट्टोपाध्याय द्वारा रचित ‘वंदे मातरम्’, जिसने स्वतंत्रता आंदोलन में महत्वपूर्ण भूमिका निभाई, को राष्ट्रगान के समान सम्मान और दर्जा दिया जाएगा।
राष्ट्रगीत को लेकर नए प्रोटोकॉल
केंद्रीय गृह मंत्रालय ने राष्ट्रगीत के लिए नए दिशा-निर्देश और प्रोटोकॉल भी जारी किए हैं। इसके तहत जिन आधिकारिक कार्यक्रमों में राष्ट्रगीत और राष्ट्रगान दोनों का गायन होगा, वहां पहले ‘वंदे मातरम्’ गाया जाएगा।
राष्ट्रपति के आगमन, ध्वजारोहण और राज्यपालों के संबोधन जैसे आधिकारिक अवसरों पर ‘वंदे मातरम्’ के सभी छह अंतरे गाए जाने का प्रावधान बताया गया है। इसकी कुल अवधि करीब 3 मिनट 10 सेकंड होगी।
गायन के दौरान सावधान की मुद्रा जरूरी
प्रोटोकॉल के मुताबिक राष्ट्रगीत के गायन के दौरान कार्यक्रम में मौजूद लोगों को सावधान की मुद्रा में खड़ा होना होगा। इसके अलावा स्कूलों में दिन की शुरुआत ‘वंदे मातरम्’ के सामूहिक गायन से करने का प्रावधान भी बताया गया है।
इस तरह ‘वंदे मातरम्’ को लेकर नए कानूनी प्रावधानों के साथ इसके सार्वजनिक और आधिकारिक गायन के लिए प्रोटोकॉल भी तय किए गए हैं।