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JPSC परीक्षा में कथित गड़बड़ी का मामला सुप्रीम कोर्ट पहुंचा, परीक्षा रद्द कर CBI जांच की मांग

 

New Delhi : झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 2025 प्रारंभिक परीक्षा में कथित अनियमितताओं का मामला अब सुप्रीम कोर्ट पहुंच गया है। याचिकाकर्ता हरिशरण देवगन ने शीर्ष अदालत में याचिका दाखिल कर परीक्षा को रद्द कर नए सिरे से आयोजित कराने और पूरे मामले की CBI जांच कराने की मांग की है।

याचिका में सेवानिवृत्त न्यायाधीशों की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित कर जांच की निगरानी कराने का भी अनुरोध किया गया है। याचिका वकील सत्यम सिंह राजपूत के जरिए दाखिल की गई है।

वायरल OMR कॉपी के बाद उठे सवाल

JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 में कथित गड़बड़ी के आरोप 2 जुलाई को सामने आए थे। उस समय एक सफल अभ्यर्थी की OMR कार्बन कॉपी वायरल हुई थी। आरोप लगाया गया कि अभ्यर्थी ने पेपर-1 में केवल 48 प्रश्न हल किए, इसके बावजूद उसे अगले चरण की परीक्षा के लिए योग्य घोषित कर दिया गया।

मामला सामने आने के बाद छात्रों ने विरोध प्रदर्शन शुरू कर दिया। राज्य सरकार ने मामले की जांच CID को सौंप दी, लेकिन प्रदर्शनकारी छात्र इससे संतुष्ट नहीं हैं। छात्र 25 जुलाई से रांची में आंदोलन कर रहे हैं।

सुप्रीम कोर्ट से क्या-क्या मांग की गई?

याचिकाकर्ता ने सुप्रीम कोर्ट से कई अहम निर्देश देने की मांग की है—

- JPSC प्रारंभिक परीक्षा-2025 को रद्द कर सुरक्षा उपायों के साथ दोबारा परीक्षा कराई जाए।

- कथित अनियमितताओं की विस्तृत और समयबद्ध CBI जांच कराई जाए।

- सुप्रीम कोर्ट के सेवानिवृत्त जज या झारखंड से बाहर के किसी हाई कोर्ट के सेवानिवृत्त मुख्य न्यायाधीश की अध्यक्षता में स्वतंत्र जांच समिति गठित की जाए।

- OMR स्कैनिंग, कोडिंग, मूल्यांकन और रिजल्ट तैयार करने की प्रक्रिया का स्वतंत्र ऑडिट कराया जाए।

- अनियमितता में शामिल अभ्यर्थियों और निर्दोष अभ्यर्थियों की अलग-अलग पहचान की संभावना की जांच हो।

- मूल OMR शीट, कार्बन कॉपी, प्रश्नपत्र, आंसर-की, अटेंडेंस और बायोमेट्रिक रिकॉर्ड सुरक्षित रखे जाएं।

- परीक्षा केंद्रों के CCTV फुटेज, डिस्पैच रजिस्टर और स्कैनिंग रिकॉर्ड समेत सभी इलेक्ट्रॉनिक साक्ष्य संरक्षित किए जाएं।

- परीक्षा से संबंधित सभी डिजिटल रिकॉर्ड को सुरक्षित रखने के निर्देश दिए जाएं।

अब इस मामले में सुप्रीम कोर्ट का रुख अहम होगा। यदि अदालत याचिका पर सुनवाई करती है, तो JPSC परीक्षा की निष्पक्षता और जांच की दिशा को लेकर बड़ा फैसला सामने आ सकता है।