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आज रात आसमान में होगी उल्काओं की बारिश, 50-100 टूटते तारों से जगमगाएगा आकाश
 

 

12 अगस्त की रात आसमान में एक बेहद खूबसूरत खगोलीय नजारा देखने को मिलेगा। सावन की फुहारों के बीच आसमान में उल्काओं की चमकती बारिश यानी पर्सिड मेटीयोर शावर नजर आएगी। आधी रात के बाद से भोर से पहले तक आसमान में 50 से 100 तक जलती हुई उल्काएं दिखाई देने की संभावना है।

आर्यभट्ट प्रेक्षण विज्ञान शोध संस्थान (एरीज) के वरिष्ठ खगोल वैज्ञानिक डॉ. शशिभूषण पांडेय के अनुसार, इस बार उल्का वर्षा को देखने के लिए परिस्थितियां काफी अनुकूल हैं। 12 अगस्त को न्यू मून होने के कारण आसमान में चांदनी का प्रभाव नहीं रहेगा। ऐसे में अंधेरे आसमान में उल्काओं की चमक साफ नजर आ सकती है।

बिना दूरबीन के देख सकेंगे उल्काएं

इस खगोलीय घटना को देखने के लिए किसी विशेष उपकरण या दूरबीन की जरूरत नहीं होगी। इसे सामान्य आंखों से ही देखा जा सकेगा। हालांकि, उल्का वर्षा का बेहतर नजारा देखने के लिए शहर की रोशनी से दूर किसी अंधेरे स्थान पर जाना बेहतर रहेगा।

पर्सिड मेटीयोर शावर हर साल दिखाई देने वाली प्रमुख उल्का वर्षाओं में से एक है। सामान्य तौर पर वर्ष में कई बार उल्का वर्षा होती है, लेकिन चंद्रमा की तेज रोशनी के कारण कई बार इनका नजारा स्पष्ट नहीं हो पाता। इस बार अमावस्या के कारण आसमान अपेक्षाकृत अधिक अंधेरा रहेगा।

मानसून बन सकता है सबसे बड़ी बाधा

पर्सिड उल्का वर्षा मध्यरात्रि के बाद सक्रिय होगी और भोर से पहले तक इसे देखा जा सकेगा। दुनिया के कई हिस्सों से इस खगोलीय घटना का आनंद लिया जा सकता है। हालांकि भारत में अगस्त के मानसून के कारण बादल और बारिश इस नजारे में बाधा डाल सकते हैं। साफ आसमान होने पर ही उल्काओं को बेहतर तरीके से देखा जा सकेगा।

अगस्त में कई और खगोलीय घटनाएं

अगस्त में उल्का वर्षा के अलावा कई अन्य महत्वपूर्ण खगोलीय घटनाएं भी देखने को मिलेंगी। 12 अगस्त को पूर्ण सूर्य ग्रहण होगा, लेकिन यह भारत से दिखाई नहीं देगा। यह मुख्य रूप से उत्तरी रूस, ग्रीनलैंड, आइसलैंड, उत्तरी स्पेन और पुर्तगाल के कुछ हिस्सों में दिखाई देगा।

इसके बाद 28 अगस्त की रात आंशिक चंद्र ग्रहण होगा। यह उत्तरी और दक्षिणी अमेरिका, यूरोप तथा अफ्रीका के कई हिस्सों से देखा जा सकेगा, जबकि भारत में यह दिखाई नहीं देगा।

इसके अलावा पूरे अगस्त महीने में भोर से पहले आसमान में ग्रहों की परेड का भी नजारा देखने को मिलेगा। सूर्योदय से कुछ घंटे पहले मंगल, यूरेनस, शनि और नेपच्यून एक साथ आकाश में नजर आ सकते हैं, जबकि बुध और बृहस्पति भी भोर के समय पूर्वी क्षितिज के पास दिखाई देंगे।