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ट्रेन टिकट कैंसिलेशन के नियम बदले: 8 घंटे पहले टिकट रद्द करने पर रिफंड, 30 मिनट पहले तक बदलें बोर्डिंग स्टेशन
 

 

नई दिल्ली: भारतीय रेलवे ने ट्रेन टिकट कैंसिलेशन और बोर्डिंग स्टेशन बदलने के नियमों में बड़ा बदलाव किया है। रेल मंत्री Ashwini Vaishnaw ने मंगलवार को बताया कि यह कदम टिकटों की कालाबाजारी और दलालों की जमाखोरी पर रोक लगाने के लिए उठाया गया है। नए नियम 1 से 15 अप्रैल 2026 के बीच अलग-अलग चरणों में लागू किए जाएंगे।

नए नियमों के अनुसार अब यात्रियों को रिफंड पाने के लिए ट्रेन के निर्धारित समय से कम से कम 8 घंटे पहले टिकट रद्द करना होगा। इससे पहले यह समय सीमा 4 घंटे थी। वहीं, यदि कोई यात्री 24 घंटे से 8 घंटे के बीच टिकट कैंसिल करता है, तो उसे टिकट राशि का 50 प्रतिशत ही रिफंड मिलेगा।

रेल मंत्री ने बताया कि कई एजेंट और दलाल बड़ी संख्या में टिकट बुक कर लेते थे और ग्राहक न मिलने पर ट्रेन छूटने से ठीक पहले टिकट कैंसिल कर रिफंड ले लेते थे। रिफंड नियमों को सख्त करने से टिकटों की ‘कॉर्नरिंग’ यानी दबाकर रखने की प्रवृत्ति कम होगी और आम यात्रियों को कंफर्म टिकट मिलने की संभावना बढ़ेगी।

रेलवे ने बोर्डिंग स्टेशन बदलने की सुविधा को भी आसान बना दिया है। अब यात्री ट्रेन के निर्धारित प्रस्थान समय से 30 मिनट पहले तक अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकेंगे। पहले यह सुविधा केवल चार्ट बनने से पहले तक ही उपलब्ध थी। यह नियम खासतौर पर उन बड़े शहरों में यात्रियों के लिए फायदेमंद होगा, जहां एक से अधिक रेलवे स्टेशन हैं। यात्री अपनी सुविधा के अनुसार नजदीकी स्टेशन से ट्रेन पकड़ सकेंगे।

यात्री IRCTC की वेबसाइट, मोबाइल एप या रेलवे काउंटर के माध्यम से अपना बोर्डिंग स्टेशन बदल सकते हैं। हालांकि, एक बार बोर्डिंग पॉइंट बदलने के बाद यात्री पुराने स्टेशन से ट्रेन नहीं पकड़ पाएंगे।

रेलवे ने यह भी स्पष्ट किया है कि कुछ विशेष परिस्थितियों में यात्रियों को पहले की तरह पूरा रिफंड मिलेगा। यदि ट्रेन पूरी तरह रद्द हो जाती है या अपने निर्धारित समय से 3 घंटे से अधिक लेट होती है, तो यात्री TDR फाइल कर पूरा रिफंड क्लेम कर सकते हैं। इसके अलावा, चार्ट बनने के बाद भी अगर टिकट पूरी तरह वेटिंग में रहता है, तो वह स्वतः कैंसिल हो जाएगा और पूरा पैसा वापस कर दिया जाएगा।