तैयार हो जाइये: ₹2,000 से ज्यादा के UPI पेमेंट पर लगेगा चार्ज, जानिए- UPI पेमेंट को लेकर 5 बड़ी बातें
क्या ₹2,000 से अधिक के UPI पेमेंट पर चार्ज लगेगा? सरकार बड़े व्यापारिक UPI ट्रांजैक्शन पर MDR लागू करने पर विचार कर रही है। जानिए किन भुगतान पर शुल्क लग सकता है, आम ग्राहकों पर इसका क्या असर होगा और सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है।
UPI Payment Above 2000: क्या अब ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर अतिरिक्त शुल्क देना होगा? पिछले कुछ दिनों से सोशल मीडिया पर यही सवाल सबसे ज्यादा चर्चा में है। दरअसल, केंद्र सरकार बड़े मूल्य के व्यावसायिक (Business) UPI ट्रांजैक्शन पर मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लागू करने की संभावना पर विचार कर रही है। हालांकि, इस प्रस्ताव को लेकर कई तरह की गलतफहमियां भी फैल रही हैं। ऐसे में जानिए इस प्रस्ताव का आम उपभोक्ताओं, व्यापारियों और डिजिटल पेमेंट सिस्टम पर क्या असर पड़ सकता है।
क्या है सरकार का प्रस्ताव?
सरकार ₹2,000 से अधिक के बिजनेस UPI ट्रांजैक्शन पर 0.25% से 0.40% तक मर्चेंट डिस्काउंट रेट (MDR) लगाने की अनुमति देने पर विचार कर रही है। यह शुल्क सीधे ग्राहकों से नहीं बल्कि व्यापारियों से लिया जाएगा। इसका उद्देश्य UPI इकोसिस्टम से जुड़े बैंकों और पेमेंट सर्विस प्रोवाइडर्स के लिए राजस्व का स्थायी मॉडल तैयार करना है।
क्या आम UPI यूजर्स को देना होगा चार्ज?
फिलहाल उपलब्ध जानकारी के अनुसार सामान्य बैंक-टू-बैंक UPI ट्रांसफर और दो व्यक्तियों (P2P) के बीच होने वाले भुगतान पर कोई शुल्क लगाने का प्रस्ताव नहीं है। यानी यदि आप किसी दोस्त, रिश्तेदार या परिवार के सदस्य को UPI से पैसे भेजते हैं, तो वह पहले की तरह मुफ्त रहेगा।
किन ट्रांजैक्शन पर पड़ सकता है असर?
प्रस्तावित बदलाव मुख्य रूप से बड़े व्यापारियों (Large Merchants) को किए जाने वाले ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर लागू हो सकता है। ऐसे मामलों में MDR का भुगतान व्यापारी करेगा। हालांकि, भविष्य में कुछ व्यापारी इस अतिरिक्त लागत को अपने उत्पादों या सेवाओं की कीमतों में शामिल कर सकते हैं।
सरकार यह बदलाव क्यों करना चाहती है?
UPI आज दुनिया के सबसे बड़े डिजिटल भुगतान प्लेटफॉर्म में शामिल है। हर दिन करोड़ों लेनदेन होने से इसके संचालन, साइबर सुरक्षा और तकनीकी ढांचे पर भारी खर्च आता है। बैंकों और पेमेंट कंपनियों का कहना है कि लंबे समय तक बिना किसी शुल्क के इस व्यवस्था को चलाना आर्थिक रूप से चुनौतीपूर्ण होता जा रहा है। इसी वजह से सरकार MDR का विकल्प तलाश रही है।
RBI गवर्नर ने क्या कहा?
इस मुद्दे पर भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) के गवर्नर ने भी संकेत दिया कि डिजिटल भुगतान प्रणाली को बनाए रखने की एक लागत होती है और "उसका खर्च किसी न किसी को उठाना ही पड़ता है।" हालांकि उन्होंने यह स्पष्ट नहीं किया कि प्रस्ताव कब लागू होगा या अंतिम निर्णय क्या होगा।
फिलहाल क्या है स्थिति?
अभी तक सरकार ने ₹2,000 से अधिक के UPI भुगतान पर MDR लागू करने को लेकर कोई अंतिम अधिसूचना जारी नहीं की है। यह फिलहाल केवल विचाराधीन प्रस्ताव है। यदि इसे मंजूरी मिलती है, तो इसके नियम, लागू होने की तारीख और प्रभावित श्रेणियों की आधिकारिक घोषणा अलग से की जाएगी। तब तक सामान्य UPI उपयोगकर्ताओं के लिए मौजूदा व्यवस्था में कोई बदलाव नहीं हुआ है।