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US Tariff Update: भारत पर 10% शुल्क, चीन समेत 43 देशों पर ज्यादा टैक्स, जानिए क्या होगा असर

अमेरिका ने भारत से आयात होने वाले सामान पर 10% शुल्क बरकरार रखा है, जबकि चीन, वियतनाम और ब्राजील समेत 43 देशों पर 12.5% टैरिफ लगाया गया है। इससे भारतीय टेक्सटाइल, जेम्स-ज्वेलरी, इंजीनियरिंग और इलेक्ट्रॉनिक्स निर्यात को बड़ा फायदा मिलने की उम्मीद है।

 

US Tariff Update: भारत-अमेरिका व्यापार संबंधों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है। अमेरिका ने अपने व्यापार कानून के तहत भारत से आयात होने वाले उत्पादों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क बरकरार रखा है, जबकि चीन, वियतनाम, ब्राजील और तुर्किये समेत 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत शुल्क लगाया गया है। विशेषज्ञों का मानना है कि इस फैसले से भारतीय निर्यातकों को अमेरिकी बाजार में प्रतिस्पर्धात्मक बढ़त मिलेगी और टेक्सटाइल, इंजीनियरिंग, इलेक्ट्रॉनिक्स व जेम्स-ज्वेलरी जैसे क्षेत्रों को सबसे अधिक लाभ होगा।

भारत समेत 16 देशों पर 10% शुल्क

अमेरिका ने अपने व्यापार कानून के सेक्शन 301 के तहत भारत सहित 16 देशों पर 10 प्रतिशत आयात शुल्क लागू किया है। इस सूची में बांग्लादेश, पाकिस्तान, कंबोडिया और ब्रिटेन जैसे देश भी शामिल हैं। वहीं चीन, वियतनाम, ब्राजील और तुर्किये सहित 43 देशों पर 12.5 प्रतिशत का शुल्क लगाया गया है।

इस बीच, सेक्शन 122 के तहत सभी देशों पर लगाया गया 10 प्रतिशत अस्थायी शुल्क 24 जुलाई से समाप्त हो गया है। ऐसे में भारत पर फिलहाल वही 10 प्रतिशत शुल्क लागू रहेगा जो सेक्शन 301 के तहत निर्धारित किया गया है।

सेक्शन 301 की जांच में भारत को मिली राहत

अमेरिका ने सेक्शन 301 के तहत 59 देशों में यह जांच शुरू की थी कि कहीं वहां उत्पादों के निर्माण में जबरन श्रम (Forced Labour) का इस्तेमाल तो नहीं हो रहा।

ग्लोबल ट्रेड रिसर्च इनिशिएटिव (GTRI) के अनुसार जांच के दौरान अमेरिका भारत के खिलाफ जबरन श्रम के इस्तेमाल का कोई ठोस प्रमाण पेश नहीं कर सका। भारत ने भी इस दौरान उन देशों से आयात पर सख्ती दिखाई, जहां जबरन श्रम से उत्पादन होने की आशंका जताई गई थी।

विशेषज्ञों का मानना है कि भारत पर लागू 10 प्रतिशत शुल्क सेक्शन 301 की जांच से अधिक, सेक्शन 122 की अवधि समाप्त होने के बाद की नई व्यापारिक व्यवस्था का हिस्सा है।

चीन और वियतनाम के मुकाबले भारत को मिलेगा फायदा

कम आयात शुल्क का सबसे बड़ा लाभ भारत के निर्यात क्षेत्र को मिल सकता है। खासकर वे सेक्टर, जहां भारत पहले से मजबूत स्थिति में है।

इन क्षेत्रों को फायदा मिलने की संभावना है-

  • टेक्सटाइल एवं गारमेंट्स
  • लेदर उत्पाद
  • जेम्स एवं ज्वैलरी
  • इंजीनियरिंग गुड्स
  • इलेक्ट्रॉनिक्स उत्पाद

अब अमेरिकी बाजार में भारतीय उत्पाद चीन और वियतनाम के मुकाबले अपेक्षाकृत अधिक प्रतिस्पर्धी होंगे।

100 अरब डॉलर से अधिक का व्यापार

अमेरिका भारत से हर साल करीब 100 अरब डॉलर के उत्पाद आयात करता है, जबकि चीन से उसका आयात 300 अरब डॉलर से अधिक का है।

पहले बांग्लादेश, कंबोडिया और मलेशिया जैसे देशों को भारत के मुकाबले कम शुल्क का फायदा मिलता था। अब इन देशों पर भी भारत के बराबर 10 प्रतिशत शुल्क लागू होने से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धात्मक स्थिति मजबूत होगी।

किन उत्पादों पर नहीं लगेगा अतिरिक्त शुल्क?

अमेरिका ने कुछ प्रमुख उत्पादों को पहले की तरह अतिरिक्त शुल्क से बाहर रखा है। इनमें शामिल हैं-

  • स्मार्टफोन
  • दवाइयां (फार्मास्यूटिकल्स)
  • पेट्रोलियम उत्पाद
  • ऊर्जा एवं ईंधन से जुड़े उत्पाद

इन उत्पादों पर पहले की तरह कोई अतिरिक्त शुल्क लागू नहीं होगा। हालांकि अन्य वस्तुओं पर 10 प्रतिशत शुल्क के साथ पहले से लागू मोस्ट फेवर्ड नेशन (MFN) के तहत लगने वाले शुल्क भी जारी रहेंगे।

निर्यातकों ने फैसले का किया स्वागत

फेडरेशन ऑफ इंडियन एक्सपोर्ट ऑर्गेनाइजेशंस (FIEO) के अध्यक्ष एस.सी. रल्हन ने कहा कि भारत के लिए यह स्थिति सकारात्मक है। कम शुल्क से भारतीय निर्यातकों की प्रतिस्पर्धा बढ़ेगी और कई क्षेत्रों को नया अवसर मिलेगा।

वहीं कन्फेडरेशन ऑफ इंडियन टेक्सटाइल इंडस्ट्रीज के पूर्व चेयरमैन संजय जैन ने कहा कि नए वैश्विक टैरिफ माहौल में भारत को चीन और वियतनाम की तुलना में स्पष्ट लाभ मिलता दिखाई दे रहा है।

व्यापार समझौते पर अमेरिका से लगातार संपर्क में सरकार

सरकार ने भी स्पष्ट किया है कि वह अमेरिका के साथ प्रस्तावित द्विपक्षीय व्यापार समझौते (BTA) को लेकर लगातार बातचीत कर रही है। राज्यसभा में वाणिज्य एवं उद्योग राज्यमंत्री जितिन प्रसाद ने कहा कि सरकार अमेरिकी आयात शुल्क से जुड़े हर घटनाक्रम पर नजर बनाए हुए है। किसानों, उद्योग संगठनों, निर्यात परिषदों और विभिन्न मंत्रालयों के साथ लगातार चर्चा की जा रही है ताकि भारतीय निर्यातकों के हित सुरक्षित रह सकें।

उन्होंने बताया कि राज्यों से मिले सुझावों को भी केंद्र सरकार गंभीरता से ले रही है और व्यापारिक हितों की रक्षा के लिए अमेरिका के साथ निरंतर संवाद जारी है।