{"vars":{"id": "130921:5012"}}

अब विदेशों से तेल मंगाने की जरूरत नहीं? भारत में मिला 24 करोड़ बैरल तेल का खजाना!

अमेरिका-ईरान तनाव के बीच हार्मुज स्ट्रेट बंद होने से भारत के सामने तेल संकट गहराने लगा है। इसी बीच पश्चिम बंगाल के अशोकनगर में मिले 24 करोड़ बैरल कच्चे तेल के भंडार ने राहत की उम्मीद जगाई है। ONGC जल्द यहां कॉमर्शियल प्रोडक्शन शुरू कर सकती है।

 

अमेरिका और ईरान के बीच बढ़ते तनाव के बीच ईरान ने फारस की खाड़ी से गुजरने वाले दुनिया के सबसे अहम तेल मार्ग ‘स्ट्रेट ऑफ हार्मुज’ को बंद कर दिया है। इस फैसले का सबसे बड़ा असर भारत जैसे देशों पर पड़ सकता है, जो अपनी जरूरत का बड़ा हिस्सा कच्चे तेल के आयात से पूरा करते हैं।

तेल सप्लाई बाधित होने और अंतरराष्ट्रीय बाजार में क्रूड ऑयल की कीमतों में तेजी के बीच भारत के लिए एक राहत भरी खबर सामने आई है। पश्चिम बंगाल का छोटा सा कस्बा ‘अशोकनगर’ अब देश के लिए ऊर्जा सुरक्षा की नई उम्मीद बनकर उभर रहा है।

बंगाल के अशोकनगर में मिला बड़ा ऑयल फील्ड

पश्चिम बंगाल के उत्तर 24 परगना जिले में स्थित अशोकनगर में जल्द ही कच्चे तेल का व्यावसायिक उत्पादन शुरू होने की संभावना है।

मीडिया रिपोर्ट्स के मुताबिक, ONGC ने साल 2018 में यहां बड़े तेल और गैस भंडार की खोज की थी। अब बढ़ते वैश्विक संकट के बीच इस प्रोजेक्ट को तेजी से आगे बढ़ाने की तैयारी शुरू हो गई है।

जमीन के नीचे छिपा है 24 करोड़ बैरल तेल

अशोकनगर ऑयल फील्ड को पूर्वी भारत का सबसे बड़ा संभावित तेल भंडार माना जा रहा है। शुरुआती अनुमान बताते हैं कि यहां करीब 24 करोड़ बैरल से ज्यादा कच्चे तेल का भंडार मौजूद हो सकता है।

विशेषज्ञों का मानना है कि यदि यहां बड़े स्तर पर उत्पादन शुरू होता है, तो भारत की विदेशी तेल आयात पर निर्भरता काफी हद तक कम हो सकती है।

ONGC जल्द शुरू कर सकती है कॉमर्शियल प्रोडक्शन

क्रूड ऑयल की बढ़ती कीमतों और सप्लाई संकट के बीच केंद्र सरकार ने इस प्रोजेक्ट को प्राथमिकता देना शुरू कर दिया है।

हाल ही में भाजपा सांसद शमिक भट्टाचार्य ने केंद्रीय वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण से मुलाकात कर अशोकनगर तेल क्षेत्र में जल्द उत्पादन शुरू कराने की मांग उठाई।

बताया जा रहा है कि प्रशासनिक स्तर पर भी अब इस प्रोजेक्ट को लेकर तेजी दिखाई जा रही है।

चुनावी विवादों के कारण रुका था काम

रिपोर्ट्स के अनुसार, अशोकनगर में तेल उत्पादन का काम पहले ही शुरू हो सकता था, लेकिन स्थानीय विरोध, प्रशासनिक अड़चनों और विधानसभा चुनावों के दौरान पैदा हुए विवादों के कारण ONGC को ड्रिलिंग रोकनी पड़ी थी।

हालांकि अब हालात बदल चुके हैं और केंद्र सरकार के सख्त रुख के बाद परियोजना से जुड़ी अधिकांश बाधाएं दूर हो गई हैं।

भारत के लिए क्यों अहम है अशोकनगर प्रोजेक्ट?

भारत दुनिया के सबसे बड़े क्रूड ऑयल आयातकों में शामिल है। देश अपनी जरूरत का करीब 85-90% तेल विदेशों से मंगाता है।

ऐसे में अगर पश्चिम बंगाल का यह तेल क्षेत्र बड़े पैमाने पर उत्पादन शुरू करता है, तो इससे:

  • तेल आयात बिल कम हो सकता है
  • विदेशी मुद्रा की बचत होगी
  • पेट्रोल-डीजल कीमतों पर दबाव घट सकता है
  • भारत की ऊर्जा सुरक्षा मजबूत होगी

वैश्विक संकट के बीच भारत को मिली नई उम्मीद

मिडिल ईस्ट में बढ़ते तनाव और हार्मुज स्ट्रेट बंद होने जैसी घटनाओं ने दुनिया भर में तेल संकट की आशंका बढ़ा दी है।

ऐसे समय में अशोकनगर ऑयल फील्ड भारत के लिए गेमचेंजर साबित हो सकता है। विशेषज्ञ मानते हैं कि अगर ONGC समय पर उत्पादन शुरू कर देती है, तो आने वाले वर्षों में भारत को ऊर्जा क्षेत्र में बड़ी राहत मिल सकती है।