सुवेंदु अधिकारी सरकार के 150 दिन पूरे, अन्नपूर्णा योजना से निवेश तक बंगाल में कितना बदला माहौल?
पश्चिम बंगाल में सुवेंदु अधिकारी के नेतृत्व वाली BJP सरकार के 150 दिन पूरे हो गए हैं। अन्नपूर्णा योजना, आयुष्मान भारत, सरकारी नौकरियों, औद्योगिक निवेश और इंफ्रास्ट्रक्चर पर सरकार ने कई कदम उठाए हैं। हालांकि रोजगार, कानून-व्यवस्था, योजनाओं के क्रियान्वयन और राजनीतिक हिंसा को लेकर सरकार के सामने अब भी बड़ी चुनौतियां हैं।
West Bengal BJP Government 150 Days: पश्चिम बंगाल में पहली बार बनी BJP सरकार के 150 दिन पूरे हो गए हैं। 4 मई को विधानसभा चुनाव के नतीजों में BJP ने 294 में से 207 सीटें जीतकर सत्ता हासिल की थी और 9 मई को सुवेंदु अधिकारी ने मुख्यमंत्री पद की शपथ ली थी। अब डेढ़ सौ दिन पूरे होने पर सरकार के सामने सबसे बड़ा सवाल यही है कि जिस ‘परिवर्तन’ के वादे के साथ वह सत्ता में आई थी, उसका असर जमीन पर कितना दिख रहा है।
सरकार की ओर से अन्नपूर्णा योजना, आयुष्मान भारत के विस्तार, सरकारी भर्ती, उद्योग और निवेश को लेकर कई बड़े फैसलों को उपलब्धि के तौर पर पेश किया जा रहा है। वहीं, योजनाओं के भुगतान में देरी, रोजगार, कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा जैसे मुद्दे अब भी सरकार के लिए चुनौती बने हुए हैं।
महिलाओं के लिए अन्नपूर्णा योजना बनी बड़ा बदलाव
BJP सरकार के शुरुआती 150 दिनों में सबसे प्रमुख बदलाव कल्याणकारी योजनाओं के स्तर पर देखने को मिला है। सरकार ने TMC की लक्ष्मी भंडार योजना को बदलकर अन्नपूर्णा योजना शुरू की। इसके तहत पात्र 25 से 60 वर्ष की महिलाओं को DBT के जरिए हर महीने 3,000 रुपये देने का प्रावधान किया गया।
सरकार के मुताबिक सितंबर तक करीब 1.5 करोड़ महिलाओं को इसकी चौथी किस्त मिल चुकी थी। हालांकि, योजना का क्रियान्वयन पूरी तरह सुचारू नहीं रहा। कुछ लाभार्थियों को भुगतान में देरी और सत्यापन के कारण नाम बाहर होने जैसी शिकायतों का भी सामना करना पड़ा।
एक लाख सरकारी नौकरियों का वादा
रोजगार BJP सरकार के लिए सबसे बड़ी परीक्षा में से एक है। सरकार के पहले पूर्ण बजट में 1 लाख सरकारी नौकरियों का वादा किया गया है। इसमें महिलाओं के लिए 33 प्रतिशत आरक्षण का प्रावधान भी बताया गया है।
मुख्यमंत्री सुवेंदु अधिकारी ने राज्य से बाहर काम करने वाले प्रवासी मजदूरों से वापस लौटने की अपील भी की है। सरकार ने जॉब कार्ड धारकों के लिए 125 दिनों के काम का वादा किया है।
हालांकि, विशेषज्ञों का मानना है कि 150 दिनों में रोजगार के मोर्चे पर बड़े बदलाव का आकलन करना जल्दबाजी होगी। इसके लिए उद्योगों की स्थापना, निजी निवेश और नए रोजगार के वास्तविक अवसर पैदा होना जरूरी है।
बंगाल में निवेश के बड़े दावे
BJP सरकार ने उद्योग और निवेश को लेकर भी आक्रामक रुख अपनाया है। सितंबर में राज्य में 33 औद्योगिक परियोजनाओं के लिए जमीन आवंटित की गई। सरकार ने इन परियोजनाओं से करीब 60,000 करोड़ रुपये के निवेश और लगभग 62,000 प्रत्यक्ष एवं अप्रत्यक्ष रोजगार की संभावना जताई है।
इसके अलावा अमूल ने 700 करोड़ रुपये के डेयरी प्रोजेक्ट और लक्स कोजी ने डानकुनी में 600 करोड़ रुपये के विस्तार की घोषणा की है। रिलायंस की ओर से परमाणु ऊर्जा परियोजना का प्रस्ताव भी सामने आया है, जिसकी संभावित निवेश राशि करीब 2 लाख करोड़ रुपये बताई गई है।
सबसे बड़ी घोषणा अडानी समूह की ओर से हुई। समूह ने 2035 तक पश्चिम बंगाल में 1 लाख करोड़ रुपये से ज्यादा निवेश की योजना बताई है। न्यू टाउन में 2,000 बेड का अस्पताल भी प्रस्तावित है, जिसमें 4,000 करोड़ रुपये से अधिक निवेश की बात कही गई है।
हालांकि, इन घोषणाओं को अभी वास्तविक निवेश और रोजगार में बदलना बाकी है। यही वजह है कि सरकार के लिए आने वाले महीनों में यह देखना महत्वपूर्ण होगा कि घोषित परियोजनाएं जमीन पर कितनी तेजी से उतरती हैं।
इंफ्रास्ट्रक्चर पर भी सरकार का फोकस
सरकार के शुरुआती कार्यकाल में इंफ्रास्ट्रक्चर को लेकर भी कई योजनाएं सामने आई हैं। प्रस्तावित परियोजनाओं में वाटर मेट्रो, इंटर-सिटी मेट्रो सेवाएं, बस नेटवर्क का विस्तार और कल्याणी में ग्रीनफील्ड एयरपोर्ट शामिल हैं।
कोलकाता मेट्रो की लंबे समय से अटकी कुछ परियोजनाओं में भी आगे बढ़ने की बात कही गई है। इनमें जोका-एस्प्लेनेड, न्यू गरिया-एयरपोर्ट और कवि सुभाष-बारासात कॉरिडोर शामिल हैं। केंद्र ने करीब 400 किलोमीटर लंबे और अनुमानित 4,500 करोड़ रुपये के 17 अटके रेलवे प्रोजेक्ट को भी आगे बढ़ाने की दिशा में कदम उठाए हैं।
कानून-व्यवस्था सरकार के लिए बड़ी परीक्षा
विकास और निवेश के साथ कानून-व्यवस्था का मुद्दा भी सरकार की साख से सीधे जुड़ा है। BJP की ओर से दावा किया गया है कि सत्ता में आने के बाद कानून-व्यवस्था पर नियंत्रण मजबूत हुआ है और वसूली के खिलाफ कार्रवाई की गई है।
हालांकि, इस दौरान राजनीतिक दलों के कार्यालयों में तोड़फोड़ और आगजनी, जादवपुर यूनिवर्सिटी में झड़प और दूसरे संस्थानों में विवाद की घटनाएं भी सामने आई हैं। राजनीतिक विश्लेषकों का कहना है कि राज्य में राजनीतिक हिंसा की समस्या पूरी तरह खत्म नहीं हुई है।
क्या BJP पर भी दिखने लगा TMC की राजनीतिक संस्कृति का असर?
सुवेंदु अधिकारी सरकार के सामने एक और राजनीतिक सवाल उठ रहा है। आरोप है कि TMC के कुछ नेता और कार्यकर्ता BJP में शामिल हो रहे हैं और इससे पुरानी राजनीतिक संस्कृति के नए सत्ताधारी दल में आने की आशंका पैदा हो रही है।
BJP ने इस आरोप को खारिज किया है। पार्टी का कहना है कि उसने TMC से आने वालों के लिए दरवाजे बंद कर दिए थे। वहीं, सरकार के आलोचकों का तर्क है कि जमीनी स्तर पर राजनीतिक नेटवर्क में बदलाव उतना आसान नहीं है। पार्टी ने कथित वसूली और अनुशासनहीनता के मामलों में करीब 25 कार्यकर्ताओं को निलंबित किया और लगभग 300 लोगों को कारण बताओ नोटिस जारी किए हैं।
150 दिन का रिपोर्ट कार्ड क्या कहता है?
सुवेंदु अधिकारी सरकार के 150 दिनों में पश्चिम बंगाल की प्रशासनिक दिशा में बदलाव जरूर दिखाई देता है। केंद्र की योजनाओं को लागू करने, महिलाओं को मिलने वाली आर्थिक सहायता बढ़ाने, रोजगार और उद्योग को प्राथमिकता देने तथा बड़े निवेश आकर्षित करने की कोशिश तेज हुई है।
लेकिन इसे अभी पूर्ण बदलाव कहना जल्दबाजी होगी। अन्नपूर्णा योजना के भुगतान और लाभार्थियों तक पहुंच में समस्याएं हैं, एक लाख नौकरियां अभी वादे के स्तर पर हैं और निवेश की कई घोषणाओं को जमीन पर उतरना बाकी है। कानून-व्यवस्था और राजनीतिक हिंसा भी सरकार की परीक्षा ले रही है।
यानी 150 दिनों में दिशा बदली है, लेकिन बदलाव का अंतिम परिणाम अभी बाकी है। BJP सरकार के लिए असली परीक्षा अब यह होगी कि शुरुआती घोषणाएं कितनी तेजी से रोजगार, निवेश, बेहतर प्रशासन और आम लोगों के रोजमर्रा के जीवन में दिखाई देने वाले बदलाव में बदलती हैं।