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चीन की कंपनियां भारत में क्यों कर रही हैं निवेश? इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और बैटरी सेक्टर किन सेक्टर्स में आएगा पैसा?

भारत में 2026-27 के दौरान चीन की कई कंपनियां इलेक्ट्रॉनिक्स, सोलर और बैटरी सेक्टर में बड़े निवेश की तैयारी में हैं। FDI में गिरावट के बाद यह नई रणनीति भारत-चीन व्यापार संतुलन और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को नई मजबूती दे सकती है।

 

नई दिल्ली: वैश्विक आर्थिक बदलावों के बीच भारत में निवेश को लेकर एक बड़ा संकेत मिला है। चीन की कई प्रमुख कंपनियां वित्त वर्ष 2026-27 के दौरान भारत में बड़े पैमाने पर निवेश की तैयारी कर रही हैं। यह निवेश खासतौर पर इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स, कैपिटल गुड्स, सोलर सेक्टर, एडवांस बैटरी और क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग जैसे अहम क्षेत्रों में आने की संभावना है।

सरकार की ओर से विदेशी निवेश को लेकर अपनाई जा रही नई नीतियों और कुछ प्रतिबंधों में ढील के संकेतों के बीच यह कदम दोनों देशों के आर्थिक रिश्तों में एक नई दिशा देने वाला माना जा रहा है।

क्यों बढ़ रहा है चीन का भारत में निवेश?

जानकारों के मुताबिक, भारत तेजी से ग्लोबल मैन्युफैक्चरिंग हब के रूप में उभर रहा है। उत्पादन से जुड़ी प्रोत्साहन योजनाएं (PLI), मजबूत बाजार और सप्लाई चेन को विविध बनाने की रणनीति के चलते विदेशी कंपनियां भारत की ओर आकर्षित हो रही हैं। चीन की कंपनियों के लिए भी भारत एक बड़ा उपभोक्ता बाजार है, जहां निवेश के जरिए वे अपनी पकड़ मजबूत करना चाहती हैं।

FDI में गिरावट के बाद नई रणनीति

पिछले कुछ वर्षों में भारत में चीन के प्रत्यक्ष विदेशी निवेश (FDI) में गिरावट देखी गई थी। 2020 के बाद सुरक्षा कारणों से भारत ने चीनी निवेश पर कड़े नियम लागू किए थे, जिसके चलते निवेश में कमी आई। हालांकि अब बदले हालात में चीन की कंपनियां निवेश के जरिए व्यापारिक संतुलन बनाने और बाजार में हिस्सेदारी बढ़ाने की रणनीति पर काम कर रही हैं।

ट्रेड घाटा कम करने की कोशिश

भारत और चीन के बीच व्यापार घाटा लगातार बढ़ रहा है। ऐसे में माना जा रहा है कि चीन की कंपनियों का भारत में निवेश बढ़ने से यह घाटा कुछ हद तक संतुलित हो सकता है। स्थानीय उत्पादन बढ़ने से आयात पर निर्भरता भी कम होगी।

किन सेक्टरों में होगा बड़ा निवेश?

इस संभावित निवेश का फोकस कई रणनीतिक क्षेत्रों पर रहेगा:

इलेक्ट्रॉनिक्स कंपोनेंट्स
सोलर एनर्जी
एडवांस बैटरी
कैपिटल गुड्स
क्रिटिकल मिनरल्स प्रोसेसिंग

ये सभी सेक्टर भारत के औद्योगिक विकास और आत्मनिर्भरता के लिहाज से बेहद महत्वपूर्ण माने जाते हैं।

भारत को क्या मिलेगा फायदा?

इस निवेश से देश में रोजगार के नए अवसर पैदा होंगे और मैन्युफैक्चरिंग सेक्टर को मजबूती मिलेगी। साथ ही, टेक्नोलॉजी ट्रांसफर और इंफ्रास्ट्रक्चर विकास को भी बढ़ावा मिलेगा। विशेषज्ञों का मानना है कि अगर यह निवेश योजनाएं जमीन पर उतरती हैं, तो भारत की अर्थव्यवस्था को नई रफ्तार मिल सकती है और वह वैश्विक सप्लाई चेन में अपनी स्थिति और मजबूत कर सकता है।