{"vars":{"id": "130921:5012"}}

ऑनलाइन फ्रॉड होने पर मिल सकता है 25,000 तक मुआवजा, जानिए RBI का नया नियम और पूरा प्रोसेस

RBI ने ऑनलाइन बैंकिंग और UPI फ्रॉड के मामलों में ग्राहकों को राहत देने के लिए नए नियम जारी किए हैं। 1 जनवरी 2027 से लागू होने वाले प्रावधानों के तहत पात्र ग्राहकों को कुछ मामलों में 25,000 रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा। जानिए किन परिस्थितियों में मिलेगा इसका लाभ।

 

Online Fraud Compensation: देश में डिजिटल पेमेंट का दायरा लगातार बढ़ रहा है। UPI, इंटरनेट बैंकिंग और मोबाइल बैंकिंग के जरिए हर दिन करोड़ों लेन-देन हो रहे हैं। लेकिन इसके साथ ही ऑनलाइन ठगी और साइबर फ्रॉड के मामलों में भी तेजी आई है। कई बार लोगों के बैंक खाते से बिना अनुमति पैसे निकल जाते हैं और शिकायत करने के बावजूद पूरी रकम वापस नहीं मिलती। ऐसे मामलों में ग्राहकों को राहत देने के लिए भारतीय रिजर्व बैंक (RBI) ने नए नियम लागू करने की तैयारी की है। प्रस्तावित व्यवस्था के तहत कुछ परिस्थितियों में ऑनलाइन फ्रॉड के शिकार ग्राहकों को 25 हजार रुपये तक का मुआवजा मिल सकेगा। यह व्यवस्था 1 जनवरी 2027 से लागू होगी।

हर डिजिटल पेमेंट पर लागू होंगे नए नियम

RBI ने स्पष्ट किया है कि यह व्यवस्था केवल UPI तक सीमित नहीं रहेगी। नए नियम सभी प्रमुख डिजिटल बैंकिंग सेवाओं पर लागू होंगे। इसमें UPI, इंटरनेट बैंकिंग, मोबाइल बैंकिंग, डेबिट कार्ड, क्रेडिट कार्ड और ऑनलाइन कार्ड पेमेंट जैसे सभी इलेक्ट्रॉनिक ट्रांजैक्शन शामिल होंगे। यानी डिजिटल माध्यम से होने वाले लगभग हर भुगतान पर यह सुरक्षा व्यवस्था लागू रहेगी।

किन मामलों में बैंक लौटाएगा पूरी रकम?

अगर किसी ग्राहक के साथ धोखाधड़ी बैंक की लापरवाही, सुरक्षा में कमी या तकनीकी गड़बड़ी के कारण होती है, तो ग्राहक को किसी तरह का नुकसान नहीं उठाना पड़ेगा। ऐसे मामलों में बैंक पूरी राशि लौटाने का जिम्मेदार होगा।

इसी तरह यदि धोखाधड़ी किसी तीसरे पक्ष, जैसे पेमेंट ऐप, पेमेंट गेटवे या टेलीकॉम सेवा से जुड़ी खामी की वजह से हुई है, तब भी ग्राहक को पूरी रकम वापस मिल सकती है। हालांकि इसके लिए जरूरी होगा कि पीड़ित व्यक्ति घटना के पांच कैलेंडर दिनों के भीतर बैंक में शिकायत दर्ज कराए।

ग्राहक की गलती होने पर भी मिल सकती है राहत

नए नियमों की सबसे खास बात यह है कि कुछ परिस्थितियों में ग्राहक की छोटी गलती होने पर भी उसे राहत मिल सकती है। अगर किसी व्यक्ति ने गलती से फिशिंग लिंक पर क्लिक कर दिया, किसी फर्जी वेबसाइट पर जानकारी साझा कर दी या OTP बता दिया, लेकिन उसने तुरंत बैंक को सूचना देकर शिकायत दर्ज करा दी, तो निर्धारित शर्तों के अनुसार उसे मुआवजा मिल सकता है।

हालांकि यदि जांच में यह साबित हो जाता है कि ग्राहक ने बार-बार दी गई सुरक्षा चेतावनियों को नजरअंदाज किया या गंभीर लापरवाही बरती, तो बैंक उसकी जिम्मेदारी तय कर सकता है।

कितना मिलेगा मुआवजा?

RBI के प्रस्तावित नियमों के अनुसार छोटे डिजिटल फ्रॉड के मामलों में पात्र ग्राहक को हुए नुकसान का 85 प्रतिशत या अधिकतम 25 हजार रुपये, जो भी कम होगा, मुआवजे के रूप में दिया जाएगा।

उदाहरण के लिए यदि किसी व्यक्ति के खाते से 50 हजार रुपये की धोखाधड़ी होती है, तो उसे अधिकतम 25 हजार रुपये तक की राहत मिल सकेगी। हालांकि यह सुविधा किसी भी व्यक्ति को जीवनभर में केवल एक बार मिलेगी।

मुआवजे की राशि कौन देगा?

इस योजना के तहत पूरा बोझ केवल बैंक पर नहीं होगा। मुआवजे की राशि तीन स्तरों पर साझा की जाएगी। इसमें भारतीय रिजर्व बैंक (RBI), ग्राहक का बैंक और जिस बैंक के खाते में धोखाधड़ी की रकम पहुंची है, वह लाभार्थी बैंक भी तय हिस्सेदारी के अनुसार भुगतान करेंगे। इससे बैंकिंग व्यवस्था में जवाबदेही भी बढ़ेगी और पीड़ित ग्राहक को समय पर राहत मिलने की संभावना भी मजबूत होगी।

ऑनलाइन फ्रॉड होने पर क्या करें?

विशेषज्ञों का कहना है कि ऑनलाइन ठगी का शिकार होने पर सबसे पहले अपने बैंक को तुरंत सूचना दें। इसके बाद साइबर हेल्पलाइन 1930 पर शिकायत दर्ज कराएं और राष्ट्रीय साइबर क्राइम पोर्टल पर भी रिपोर्ट करें। समय पर शिकायत दर्ज कराने से रकम वापस मिलने और नए नियमों के तहत मुआवजा पाने की संभावना बढ़ जाती है।

डिजिटल बैंकिंग को सुरक्षित बनाने की कोशिश

RBI का मानना है कि देश में डिजिटल लेन-देन तेजी से बढ़ रहे हैं, इसलिए ग्राहकों का भरोसा बनाए रखना बेहद जरूरी है। नए नियमों का उद्देश्य ऑनलाइन फ्रॉड के मामलों में पीड़ितों को जल्द राहत देना, बैंकिंग व्यवस्था को अधिक जवाबदेह बनाना और डिजिटल भुगतान को पहले से ज्यादा सुरक्षित बनाना है। आने वाले समय में यह व्यवस्था लाखों डिजिटल बैंकिंग ग्राहकों के लिए बड़ी राहत साबित हो सकती है।