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70% चयन गलत हो तब भी नौकरी नहीं छीन सकते...झारखंड में JPSC परीक्षा रद्द करने के फैसले पर हाईकोर्ट की रोक, जानें क्या कहा

 

रांची: झारखंड लोक सेवा आयोग (JPSC) की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा प्रतियोगिता परीक्षा रद्द करने के राज्य सरकार के फैसले पर झारखंड हाईकोर्ट ने रोक लगा दी है। गुरुवार को जस्टिस दीपक रोशन की बेंच ने मामले की सुनवाई करते हुए सरकार के उस आदेश पर रोक लगाई, जिसके तहत 11वीं से 13वीं JPSC परीक्षा के साथ फूड सेफ्टी ऑफिसर परीक्षा भी रद्द की गई थी। अदालत ने राज्य सरकार को अपना जवाब दाखिल करने का निर्देश दिया है।

मामले की सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने अहम टिप्पणी करते हुए कहा कि अगर परीक्षा देने के बाद 70 प्रतिशत लोग भी गलत तरीके से चयनित हुए हैं, तब भी सरकार उन्हें सीधे नौकरी से नहीं हटा सकती। अदालत ने पूरे मामले की तेजी से सुनवाई के लिए फास्ट-ट्रैक कोर्ट के गठन का भी निर्देश दिया है। मामले की अगली सुनवाई 15 सितंबर को होगी।

डिप्टी कलेक्टर सोनम कुमारी ने दी सरकार के फैसले को चुनौती

JPSC की 11वीं से 13वीं संयुक्त सिविल सेवा परीक्षा में चयनित होकर डिप्टी कलेक्टर बनीं सोनम कुमारी ने राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले को झारखंड हाईकोर्ट में चुनौती दी है। सोनम कुमारी उस समय हजारीबाग जिले में पदस्थापित थीं।

याचिका में कहा गया है कि JPSC की विज्ञापन संख्या 01/2024 के तहत हुई परीक्षा को राज्य सरकार ने मेमो नंबर 5404/18.8.2026 के जरिए रद्द कर दिया। सोनम कुमारी ने चयन के बाद बिहार के गया जिले में शिक्षक की नौकरी छोड़कर झारखंड में योगदान दिया था।

उन्हें 24 नवंबर 2025 को नियुक्ति पत्र मिला था और इसके बाद उन्होंने डिप्टी कलेक्टर के पद पर योगदान देकर अपनी जिम्मेदारियां संभालनी शुरू कर दी थीं। अब परीक्षा रद्द होने के बाद उनकी नियुक्ति पर भी संकट खड़ा हो गया था। याचिका के माध्यम से उन्होंने सरकार की अधिसूचना को रद्द करने की मांग की है।

करीब 200 उप समाहर्ताओं की ट्रेनिंग पर भी लगा ब्रेक

राज्य सरकार के परीक्षा रद्द करने के फैसले का असर करीब 200 नवनियुक्त उप समाहर्ताओं पर पड़ा है। इन अधिकारियों की ट्रेनिंग बीच में ही रोक दी गई है। हाल ही में इन्हें श्रीकृष्ण लोक प्रशासन प्रशिक्षण संस्थान से प्रशिक्षण के बाद अलग-अलग जिलों में प्रोबेशन पीरियड के लिए भेजा गया था।
परीक्षा रद्द होने के बाद इन अधिकारियों की नौकरी को लेकर असमंजस की स्थिति पैदा हो गई। कई प्रोबेशन उप समाहर्ता अब रांची लौटने लगे हैं और अपने भविष्य को लेकर स्थिति साफ होने का इंतजार कर रहे हैं।

बाबा धाम और बासुकीनाथ में भी ड्यूटी से हटाए गए अधिकारी

JPSC से चयनित प्रोबेशन उप समाहर्ताओं में से 40 अधिकारियों को देवघर के बाबा धाम में विधि-व्यवस्था की जिम्मेदारी सौंपी गई थी। वहीं, दुमका जिले के बासुकीनाथ में 23 प्रोबेशन उप समाहर्ताओं को दंडाधिकारी के रूप में तैनात किया गया था, लेकिन परीक्षा रद्द होने के बाद तकनीकी रूप से उनकी सेवा समाप्त मानी जाने लगी, जिसके चलते उन्हें इन ड्यूटी से भी हटा दिया गया। हाईकोर्ट के आदेश के बाद अब इन अधिकारियों को राहत की उम्मीद जगी है।