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अयोध्या राम मंदिर को लेकर AAP सांसद संजय सिंह का आरोप- 2.92 करोड़ की जमीन 24 करोड़ में खरीदी

वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता में AAP सांसद संजय सिंह ने राम मंदिर ट्रस्ट पर दानपात्र चोरी, चढ़ावे में कथित भ्रष्टाचार और जमीन खरीद में अनियमितता के गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने निष्पक्ष जांच, दोषियों की गिरफ्तारी और ट्रस्ट को भंग कर नई व्यवस्था लागू करने की मांग की।

 

वाराणसी: आम आदमी पार्टी (AAP) के नेता और राज्यसभा सांसद संजय सिंह ने सोमवार को वाराणसी में आयोजित प्रेस वार्ता में राम मंदिर ट्रस्ट, दानपात्र चोरी, चढ़ावे में कथित अनियमितताओं और जमीन खरीद को लेकर गंभीर आरोप लगाए। उन्होंने पूरे मामले की निष्पक्ष जांच कर दोषियों की गिरफ्तारी तथा ट्रस्ट के पुनर्गठन की मांग की।

संजय सिंह ने कहा कि वह काशी की धरती से उन मुद्दों को उठा रहे हैं, जो करोड़ों रामभक्तों की आस्था से जुड़े हैं। उनका आरोप है कि राम मंदिर के नाम पर प्राप्त चंदे और दान के उपयोग को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं और हाल में सामने आए कुछ मामलों ने इन आशंकाओं को और मजबूत किया है।

जमीन खरीद मामले पर उठाए सवाल

संजय सिंह ने दावा किया कि अयोध्या की गाटा संख्या 247 स्थित 0.645 हेक्टेयर भूमि, जिसे सरकारी अभिलेखों में नजूल भूमि बताया गया है, उसका सरकारी मूल्य लगभग 2 करोड़ 92 लाख 86 हजार रुपये था। आरोप है कि इसी भूमि को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की ओर से लगभग 24 करोड़ रुपये में खरीदा गया।

उन्होंने कहा कि यदि सरकारी अभिलेखों में भूमि का मूल्य कुछ करोड़ रुपये है और खरीद कहीं अधिक कीमत पर होती है, तो इसकी निष्पक्ष जांच होनी चाहिए। उनके अनुसार यह मामला श्रद्धालुओं के चंदे और ट्रस्ट के वित्तीय प्रबंधन से जुड़े गंभीर सवाल खड़े करता है।

चंपत राय समेत जिम्मेदार लोगों पर कार्रवाई की मांग

संजय सिंह ने कहा कि जमीन खरीद से जुड़े दस्तावेजों में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय का नाम सामने आया है। उन्होंने मांग की कि पूरे प्रकरण की स्वतंत्र एजेंसी से जांच कराई जाए और यदि कोई अनियमितता पाई जाती है तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानूनी कार्रवाई की जाए।

दानपात्र और चढ़ावे में कथित गड़बड़ी का मुद्दा भी उठाया

AAP सांसद ने आरोप लगाया कि राम मंदिर के दानपात्र और चढ़ावे से जुड़े मामलों में भी गंभीर अनियमितताओं की शिकायतें सामने आई हैं। उन्होंने दावा किया कि कई कर्मचारियों की भूमिका संदिग्ध बताई गई है और कुछ मामलों में गिरफ्तारी भी हुई है।

उन्होंने कहा कि यदि मंदिर के दान और श्रद्धालुओं के चढ़ावे को लेकर लगातार सवाल उठ रहे हैं, तो इसकी उच्चस्तरीय जांच कराई जानी चाहिए ताकि सच्चाई जनता के सामने आ सके।

प्रधानमंत्री से भी पूछा सवाल

संजय सिंह ने कहा कि श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट का गठन सर्वोच्च न्यायालय के फैसले के बाद हुआ था, इसलिए पूरे मामले की जवाबदेही तय होनी चाहिए। उन्होंने केंद्र सरकार से पूछा कि यदि भ्रष्टाचार और अनियमितताओं के आरोप सामने आ रहे हैं तो जांच एजेंसियां अब तक सक्रिय क्यों नहीं हुईं।

ट्रस्ट भंग करने की मांग

संजय सिंह ने मांग की कि आरोपों की निष्पक्ष जांच पूरी होने तक वर्तमान ट्रस्ट को भंग किया जाए और उसकी जगह समाज के प्रतिष्ठित, निष्पक्ष एवं भरोसेमंद लोगों को जिम्मेदारी सौंपी जाए।

उन्होंने कहा कि प्रभु श्रीराम के नाम पर मिलने वाले चंदे और श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़े मामलों में पारदर्शिता सर्वोच्च प्राथमिकता होनी चाहिए। इसलिए पूरे प्रकरण की निष्पक्ष जांच कर सच्चाई देश के सामने लाई जानी चाहिए।