क्या बिहार में हो गया बड़ा राजनीतिक उलटफेर? बीजेपी के गढ़ बांकीपुर में प्रशांत किशोर सबसे आगे
Bankipur Bypoll Result 2026: बिहार की सबसे चर्चित विधानसभा सीटों में शामिल बांकीपुर उपचुनाव की मतगणना ने बड़ा राजनीतिक संदेश देना शुरू कर दिया है। शुरुआती रुझानों में जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर बढ़त बनाए हुए हैं, जबकि भारतीय जनता पार्टी (BJP) के उम्मीदवार नीरज कुमार सिन्हा दूसरे स्थान पर चल रहे हैं। राष्ट्रीय जनता दल (RJD) की उम्मीदवार रेखा गुप्ता तीसरे स्थान पर हैं। यह सीट लंबे समय से बीजेपी का मजबूत गढ़ मानी जाती रही है, ऐसे में शुरुआती बढ़त ने राजनीतिक हलकों में हलचल बढ़ा दी है।
पहले चुनाव में ही प्रशांत किशोर ने दिखाई दमदार चुनौती
बांकीपुर उपचुनाव प्रशांत किशोर के राजनीतिक करियर का पहला विधानसभा चुनाव है। चुनावी रणनीतिकार से नेता बने प्रशांत किशोर ने जन सुराज पार्टी के बैनर तले सीधे बीजेपी के गढ़ में चुनाव लड़ने का फैसला किया था। शुरुआती मतगणना में उनकी बढ़त को बिहार की राजनीति में संभावित बदलाव के संकेत के तौर पर देखा जा रहा है।
बीजेपी और आरजेडी के बीच नहीं, इस बार बना त्रिकोणीय मुकाबला
इस उपचुनाव में मुकाबला बीजेपी, जन सुराज और आरजेडी के बीच त्रिकोणीय रहा। बीजेपी ने नीरज कुमार सिन्हा को मैदान में उतारा, जबकि कांग्रेस समर्थित आरजेडी की ओर से रेखा गुप्ता चुनाव लड़ रही हैं। हालांकि शुरुआती रुझानों में मुकाबला मुख्य रूप से प्रशांत किशोर और बीजेपी उम्मीदवार के बीच सिमटता दिखाई दे रहा है।
क्यों अहम है बांकीपुर सीट?
बांकीपुर विधानसभा सीट को बीजेपी का परंपरागत मजबूत गढ़ माना जाता है। यह सीट बीजेपी के राष्ट्रीय अध्यक्ष नितिन नवीन के इस्तीफे के बाद खाली हुई थी, जिसके चलते यहां उपचुनाव कराया गया। यदि प्रशांत किशोर इस सीट पर जीत दर्ज करते हैं तो यह न सिर्फ उनकी पहली चुनावी जीत होगी, बल्कि बिहार की राजनीति में जन सुराज पार्टी के लिए भी बड़ी उपलब्धि मानी जाएगी।
मतगणना जारी, अंतिम नतीजे का इंतजार
मतगणना अभी जारी है और अंतिम परिणाम आना बाकी है। चुनाव आयोग के आधिकारिक आंकड़ों के अनुसार राउंड दर राउंड स्थिति बदल सकती है। ऐसे में सभी दलों की नजर अंतिम नतीजों पर टिकी हुई है। यदि शुरुआती बढ़त बरकरार रहती है, तो यह बिहार की राजनीति में बड़ा बदलाव साबित हो सकता है।
राजनीतिक महत्व बढ़ा
बांकीपुर उपचुनाव को केवल एक विधानसभा सीट का चुनाव नहीं, बल्कि 2027 के बिहार विधानसभा चुनाव से पहले जनता के मूड की परीक्षा भी माना जा रहा है। इसलिए इस सीट का परिणाम राज्य की आगामी राजनीतिक रणनीतियों पर भी असर डाल सकता है।