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विदाई में भी दिखा दम! दिग्विजय सिंह बोले- अभी खत्म नहीं हुआ मेरा सफर...

 

New Delhi : दिग्विजय सिंह ने बुधवार को राज्यसभा से सेवानिवृत्त होते हुए अपने विदाई भाषण में सद्भाव, संवाद और विचारधारा की राजनीति पर जोर दिया। उन्होंने साफ संकेत दिया कि वह सक्रिय राजनीति से दूर नहीं हो रहे हैं।

‘न मैं टायर्ड हूं, न रिटायर्ड’

अपने संबोधन में उन्होंने पूर्व प्रधानमंत्री Atal Bihari Vajpayee की प्रसिद्ध पंक्ति दोहराई—“मैं न थका हूं, न सेवानिवृत्त हुआ हूं।” इससे उन्होंने इशारों में यह स्पष्ट किया कि आगे भी वह राजनीति में सक्रिय रहेंगे। माना जा रहा है कि वह *मध्य प्रदेश विधानसभा चुनाव 2028* को लेकर पार्टी के लिए काम करेंगे।

दिग्गज नेताओं का किया जिक्र

दिग्विजय सिंह ने अपने राजनीतिक सफर में कई बड़े नेताओं का उल्लेख किया, जिनमें:

- इंदिरा गांधी

- राजीव गांधी

- अटल बिहारी वाजपेयी

- चन्द्रशेखर

उन्होंने कहा कि इन नेताओं से प्रेरित होकर ही उन्होंने अपना राजनीतिक सफर तय किया।

‘विचारधारा से कभी समझौता नहीं किया’

कांग्रेस नेता ने कहा कि उन्होंने हमेशा विचारधारा के मार्ग पर चलने का प्रयास किया और कभी उससे समझौता नहीं किया।“मतभेद स्वाभाविक हैं, लेकिन मैंने कभी मनभेद नहीं होने दिया।”

सदन में व्यवधानों के खिलाफ

उन्होंने संसद में बढ़ते व्यवधानों पर चिंता जताते हुए कहा कि लोकतंत्र की असली ताकत संवाद और चर्चा में है।

- सत्ता पक्ष की जिम्मेदारी है कि वह विपक्ष से संवाद करे

- बिना चर्चा के बिल पास करना लोकतंत्र के खिलाफ है

उन्होंने पूर्व उपराष्ट्रपति Hamid Ansari का जिक्र करते हुए कहा कि उनके कार्यकाल में बिना पर्याप्त चर्चा के बिल पास नहीं होते थे।

सांप्रदायिक माहौल पर चिंता

दिग्विजय सिंह ने देश में बढ़ती सांप्रदायिक कटुता पर चिंता जताई और कहा कि यह न तो भारतीय संस्कृति के अनुरूप है और न ही संविधान की भावना के।
उन्होंने भारतीय राष्ट्रीय कांग्रेस का आभार जताते हुए कहा कि पार्टी ने उन्हें हर स्तर पर सेवा करने का मौका दिया।

अंत में उन्होंने संत कबीर का दोहा सुनाते हुए अपना संदेश दिया कि कबीरा खड़ा बाज़ार में, सबकी मांगे खैर, ना काहू से दोस्ती, ना काहू से बैर।