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प्रशांत किशोर ने की नीतीश कुमार की तारीफ, बोले- बिहार के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में होगी गिनती

प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार को बिहार के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में शामिल बताते हुए उनकी तारीफ की, लेकिन पिछली सरकार पर प्रॉक्सी के जरिए चलाए जाने का आरोप भी लगाया। जानिए अनंत सिंह के बयान, वैशाली नाव हादसे और बिहार की राजनीति को लेकर जन सुराज प्रमुख ने क्या कहा।

 

जन सुराज पार्टी के संस्थापक प्रशांत किशोर ने बिहार की राजनीति को लेकर बड़ा बयान दिया है। उन्होंने जनता दल यूनाइटेड (JDU) के अध्यक्ष नीतीश कुमार को राज्य के अब तक के 10 सर्वश्रेष्ठ राजनीतिक नेताओं में शामिल बताया। हालांकि, तारीफ के साथ उन्होंने नीतीश कुमार के नेतृत्व वाली पिछली सरकार पर भी सवाल उठाए और आरोप लगाया कि सरकार प्रॉक्सी के जरिए चलाई जा रही थी। प्रशांत किशोर ने ये बातें शनिवार को बिहार विधान परिषद चुनाव के प्रचार के दौरान कहीं। उनके बयान ने बिहार के सियासी गलियारों में एक बार फिर नीतीश कुमार को लेकर चर्चा तेज कर दी है।

नीतीश कुमार को बताया बिहार के 10 सर्वश्रेष्ठ नेताओं में से एक

प्रशांत किशोर ने कहा कि नीतीश कुमार बिहार के सबसे समझदार राजनेताओं में से एक रहे हैं। उनके मुताबिक, राज्य के राजनीतिक इतिहास में नीतीश कुमार की गिनती उन 10 नेताओं में होगी, जिन्होंने बिहार में बदलाव लाने की कोशिश की।

उन्होंने यह भी कहा कि नीतीश कुमार को ऐसे नेता के रूप में याद किया जाएगा, जिन्होंने राज्य की स्थिति सुधारने का प्रयास किया। हालांकि, प्रशांत किशोर ने उनके राजनीतिक नेतृत्व पर सवाल उठाते हुए कहा कि जब उन्होंने नीतीश कुमार का विरोध किया था, तब उनकी आपत्ति इस बात को लेकर थी कि उन्हें खराब होती मानसिक स्थिति के बावजूद सत्ता में बनाए रखा जा रहा था और सरकार कथित तौर पर दूसरे लोगों के जरिए चलाई जा रही थी।

यह बयान इसलिए भी अहम है, क्योंकि प्रशांत किशोर पहले नीतीश कुमार के करीबी रहे हैं, लेकिन बाद में उनके मुखर आलोचक बन गए।

अनंत सिंह के बयान पर क्या बोले प्रशांत किशोर?

पत्रकारों ने प्रशांत किशोर से मोकामा के विधायक अनंत कुमार सिंह के उस बयान को लेकर भी सवाल किया, जिसमें राजनीतिक विरोधियों की हत्या का जिक्र किया गया था। बाद में अनंत सिंह ने अपने बयान को वापस लेते हुए कहा था कि जिन नौ हत्याओं का उन्होंने उल्लेख किया, वे उनके परिवार के सदस्यों की थीं।

इस सवाल पर प्रशांत किशोर ने कहा कि अनंत सिंह जनता दल यूनाइटेड से जुड़े हैं और जेडीयू सरकार का हिस्सा है, जबकि राष्ट्रीय जनता दल मुख्य विपक्षी पार्टी है। उन्होंने कहा कि इस मामले पर दोनों दलों को आपस में विचार करना चाहिए।

प्रशांत किशोर ने यह भी कहा कि अगर दोनों पार्टियां उचित समझती हैं, तो मामले की जांच करा सकती हैं। उन्होंने स्पष्ट किया कि जन सुराज पार्टी का इस विवाद से कोई लेना-देना नहीं है।

नीतीश कुमार के साथ पहले काम कर चुके हैं प्रशांत किशोर

प्रशांत किशोर और नीतीश कुमार के बीच राजनीतिक संबंधों का पुराना इतिहास रहा है। प्रशांत किशोर ने वर्ष 2015 के बिहार विधानसभा चुनाव में नीतीश कुमार के चुनाव प्रचार की रणनीति तैयार करने में अहम भूमिका निभाई थी। उस समय वह अपनी चुनावी रणनीति कंपनी IPAC के जरिए काम कर रहे थे।

बाद में वह जनता दल यूनाइटेड के राष्ट्रीय उपाध्यक्ष भी बने। हालांकि, समय के साथ दोनों के बीच राजनीतिक दूरियां बढ़ीं और प्रशांत किशोर ने नीतीश कुमार की नीतियों तथा सरकार के कामकाज की आलोचना शुरू कर दी।

ताजा बयान में नीतीश कुमार के राजनीतिक योगदान की तारीफ और उनकी सरकार को लेकर आलोचना, दोनों बातें एक साथ सामने आई हैं।

वैशाली नाव हादसे पर भी सरकार को घेरा

प्रशांत किशोर ने बिहार के वैशाली जिले में हुए नाव हादसे को लेकर भी राज्य सरकार पर निशाना साधा। इस दुर्घटना में 13 बच्चों की मौत हुई थी। उन्होंने इसे बड़ी त्रासदी बताते हुए कहा कि पीड़ित परिवारों को मदद और संवेदना की जरूरत है।

उन्होंने मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी के प्रभावित गांव नहीं पहुंचने पर भी सवाल उठाए। प्रशांत किशोर ने आरोप लगाया कि गांव नेता प्रतिपक्ष तेजस्वी यादव के विधानसभा क्षेत्र में आता है, इसलिए मुख्यमंत्री वहां नहीं पहुंचे। यह उनका राजनीतिक आरोप है।

प्रशांत किशोर ने कहा कि वह 20 अक्टूबर को दशहरा के अवसर पर प्रभावित गांव जाएंगे और शोक संतप्त परिवारों के बीच समय बिताकर उन्हें सहायता देने का प्रयास करेंगे।

बिहार की राजनीति में क्यों अहम है यह बयान?

प्रशांत किशोर का यह बयान ऐसे समय आया है, जब बिहार में विधान परिषद चुनाव को लेकर राजनीतिक गतिविधियां तेज हैं। नीतीश कुमार की राजनीतिक विरासत, जेडीयू की भूमिका और मौजूदा सरकार के कामकाज को लेकर अलग-अलग दलों के बीच बयानबाजी जारी है।

नीतीश कुमार की तारीफ करते हुए प्रशांत किशोर ने जहां उनके पुराने योगदान को स्वीकार किया, वहीं सरकार चलाने के तरीके पर अपनी पुरानी आपत्तियां भी दोहराईं। ऐसे में उनका बयान बिहार की मौजूदा राजनीतिक बहस में एक नया पहलू जोड़ता है।