21 राज्यों में UCC का दावा... ओवैसी का विरोध, नीतीश की बैठक- आखिर क्या है पूरा प्लान?
देश में समान नागरिक संहिता यानी UCC को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। अमित शाह के 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC बिल पेश करने के बयान के बाद यूपी में बिल जल्द लाने की तैयारी है। वहीं बिहार में JDU की बैठक और ओवैसी के विरोध ने बहस बढ़ा दी है।
बिहार न्यूज: देश में समान नागरिक संहिता (UCC) को लेकर सियासी हलचल तेज हो गई है। केंद्रीय गृह मंत्री अमित शाह के 2029 से पहले 21 राज्यों में UCC लागू करने से जुड़े बयान के बाद विपक्षी दलों और क्षेत्रीय पार्टियों की प्रतिक्रियाएं सामने आने लगी हैं। उत्तर प्रदेश में जहां सरकार जल्द विधानसभा में UCC बिल पेश करने की तैयारी में है, वहीं बिहार में सहयोगी JDU के भीतर इसे लेकर मतभेद के संकेत मिले हैं।
अमित शाह के बयान के बाद AIMIM प्रमुख असदुद्दीन ओवैसी ने UCC का विरोध करते हुए इसे गैर-हिंदुओं पर हिंदू कानून थोपने की कोशिश बताया। भोपाल में पार्टी की रैली को संबोधित करते हुए ओवैसी ने सरकार को चुनौती दी कि पहले देश के आदिवासियों को UCC के दायरे में लाकर दिखाया जाए। उन्होंने आरोप लगाया कि सरकार लगातार मुसलमानों को निशाना बना रही है।
अमित शाह के बयान के बाद बढ़ी हलचल
UCC को लेकर मौजूदा राजनीतिक बहस की शुरुआत अमित शाह के उस बयान के बाद हुई, जिसमें उन्होंने कहा था कि 2029 से पहले देश के 21 राज्यों में यूनिफॉर्म सिविल कोड का बिल पेश कर दिया जाएगा। इस बयान के बाद बीजेपी शासित और उसके सहयोगी दलों वाली सरकारों में भी इस मुद्दे पर गतिविधियां तेज हो गई हैं।
उत्तर प्रदेश में अगले विधानसभा चुनाव से पहले UCC अहम राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। मंगलवार को मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने दिल्ली में अमित शाह से मुलाकात की। इसी दौरान लखनऊ में उत्तर प्रदेश सरकार के वरिष्ठ मंत्री भूपेंद्र चौधरी ने कहा कि UCC बिल जल्द ही विधानसभा में पेश किया जाएगा।
इसके बाद प्रदेश में इस मुद्दे को लेकर राजनीतिक बयानबाजी तेज हो गई है।
बिहार में JDU की बैठक पर टिकी नजर
बिहार में UCC को लेकर बीजेपी के लिए स्थिति अपेक्षाकृत जटिल दिखाई दे रही है। JDU के दो विधायकों ने सार्वजनिक तौर पर UCC का विरोध किया है, जबकि पार्टी के दूसरे नेताओं ने इस मुद्दे पर जल्दबाजी में कोई अंतिम रुख अपनाने से बचने की कोशिश की है।
इसी बीच पूर्व मुख्यमंत्री नीतीश कुमार ने JDU के सभी सांसदों, विधायकों और विधान परिषद सदस्यों की बैठक बुलाई है। माना जा रहा है कि बैठक में UCC के साथ फरक्का जल संधि समेत दूसरे मुद्दों पर भी चर्चा हो सकती है।
बैठक से पहले बिहार के डिप्टी सीएम और JDU नेता विजय चौधरी ने कहा कि पार्टी सभी आशंकाओं को दूर करने के बाद ही UCC पर अपना रुख तय करेगी। ऐसे में JDU की बैठक के बाद पार्टी का रुख स्पष्ट होने की उम्मीद है।
यूपी-बिहार के अलावा इन राज्यों में भी UCC पर काम
UCC को लेकर अलग-अलग राज्यों की स्थिति भी चर्चा में है। उत्तराखंड में 2025 से समान नागरिक संहिता लागू है, जबकि गोवा में लंबे समय से समान नागरिक कानून की व्यवस्था लागू है।
इसके अलावा गुजरात, असम और मध्य प्रदेश की विधानसभाओं में UCC से संबंधित बिल पास हो चुका है। महाराष्ट्र, पश्चिम बंगाल, राजस्थान और छत्तीसगढ़ में भी इस दिशा में काम आगे बढ़ने की बात कही जा रही है।
पश्चिम बंगाल में भी UCC को लेकर तैयारी शुरू होने के संकेत मिले हैं। मुख्यमंत्री शुभेंदु अधिकारी विधानसभा में इसे लाने की बात कह चुके हैं। वहीं महाराष्ट्र सरकार UCC से जुड़ी कमेटी की रिपोर्ट का इंतजार कर रही है।
क्यों अहम है यूपी और बिहार का रुख?
बीजेपी के लिए UCC का मुद्दा इसलिए भी महत्वपूर्ण है क्योंकि उत्तर प्रदेश देश का सबसे बड़ा राज्य है और यहां विधानसभा चुनाव से पहले यह बड़ा राजनीतिक मुद्दा बन सकता है। दूसरी ओर बिहार में बीजेपी की सहयोगी JDU के भीतर UCC को लेकर अलग-अलग राय सामने आना गठबंधन की राजनीति के लिहाज से महत्वपूर्ण है।
ऐसे में आने वाले दिनों में उत्तर प्रदेश में UCC बिल को विधानसभा में पेश किए जाने और बिहार में JDU के रुख पर सबकी नजर रहेगी। अमित शाह के 21 राज्यों वाले बयान के बाद अब UCC सिर्फ कानूनी सुधार का मुद्दा नहीं रहा, बल्कि राज्यों की राजनीति में भी इसका असर दिखाई देने लगा है।