{"vars":{"id": "130921:5012"}}

राम मंदिर के चढ़ावे में करोड़ों की हेराफेरी का आरोप, अखिलेश ने उठाए सवाल; बोला ट्रस्ट- ऑडिट में नहीं मिली कोई गड़बड़ी

 
अयोध्या स्थित राम मंदिर में आए चढ़ावे को लेकर नया विवाद खड़ा हो गया है। समाजवादी पार्टी के राष्ट्रीय अध्यक्ष अखिलेश यादव ने आरोप लगाया है कि मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब हुई है। उन्होंने इस मामले में सरकार की चुप्पी पर सवाल उठाते हुए अदालत से स्वत: संज्ञान लेने की मांग की है।

रविवार को सोशल मीडिया प्लेटफॉर्म X पर पोस्ट करते हुए अखिलेश यादव ने कहा कि राम मंदिर करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है और चढ़ावे की रकम में कथित गड़बड़ी बेहद गंभीर मामला है। उन्होंने कहा कि इस पूरे प्रकरण पर सरकार और ट्रस्ट की चुप्पी कई सवाल खड़े करती है।

चढ़ावे की रकम गायब होने का लगाया आरोप

अखिलेश यादव ने अपनी पोस्ट में लिखा कि राम मंदिर के चढ़ावे की करोड़ों रुपये की राशि गायब होने की खबर पूरे सनातन समाज के लिए चिंताजनक है। उन्होंने कहा कि यदि आरोप सही हैं तो यह मंदिर ट्रस्ट के लिए अत्यंत शर्मनाक स्थिति है और यदि आरोप गलत हैं तो ट्रस्ट को पूरी पारदर्शिता के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

सपा अध्यक्ष ने न्यायालय से मामले का स्वत: संज्ञान लेने की मांग करते हुए कहा कि यह करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था से जुड़ा विषय है।

पूर्व मंत्री पवन पांडेय का दावा

समाजवादी पार्टी के वरिष्ठ नेता और पूर्व मंत्री पवन पांडेय ने दावा किया कि राम मंदिर के दानपात्रों में जमा चढ़ावे में 5 करोड़ से 7.5 करोड़ रुपये तक की गड़बड़ी हुई है। उन्होंने कहा कि यदि चोरी नहीं हुई है तो ट्रस्ट के महासचिव सार्वजनिक रूप से सामने आकर आरोपों का खंडन करें।

पवन पांडेय ने मामले की निष्पक्ष जांच कराने और दोषियों के खिलाफ एफआईआर दर्ज करने की मांग भी की है।

ट्रस्ट ने आरोपों को बताया निराधार

राम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय ने आरोपों को खारिज करते हुए कहा कि ट्रस्ट का नियमित रूप से आंतरिक ऑडिट कराया जाता है। इस प्रक्रिया में ट्रस्ट और बैंक प्रतिनिधि शामिल रहते हैं तथा सभी लेन-देन का रिकॉर्ड रखा जाता है।

उन्होंने कहा कि वर्तमान में भी ऑडिट की प्रक्रिया जारी है और अब तक किसी प्रकार की वित्तीय अनियमितता सामने नहीं आई है।

अखिलेश ने सफाई पर भी उठाए सवाल

ट्रस्ट की सफाई के बाद अखिलेश यादव ने दोबारा प्रतिक्रिया देते हुए कहा कि दिया गया स्पष्टीकरण स्पष्ट नहीं है। उन्होंने मांग की कि ट्रस्ट के सभी सदस्य एक साथ सामने आकर पूरे मामले पर विस्तृत जानकारी दें और सीसीटीवी फुटेज समेत सभी रिकॉर्ड सार्वजनिक किए जाएं।

अखिलेश ने कहा कि यदि सब कुछ पारदर्शी है तो ट्रस्ट को तथ्यों के साथ स्थिति स्पष्ट करनी चाहिए।

संतों और ट्रस्ट सदस्यों ने किया बचाव

राम मंदिर ट्रस्ट से जुड़े संतों और पदाधिकारियों ने आरोपों को राजनीति से प्रेरित बताया है।

ट्रस्ट सदस्य महंत दिनेंद्र दास महाराज ने कहा कि ट्रस्ट के सभी फैसले सामूहिक रूप से लिए जाते हैं और प्रत्येक लेन-देन का विधिवत रिकॉर्ड रखा जाता है। उन्होंने दावा किया कि ट्रस्ट पूरी पारदर्शिता के साथ कार्य कर रहा है।

वहीं, ट्रस्ट प्रशासक गोपालजी राव ने कहा कि आरोप लगाना आसान है, लेकिन बिना प्रमाण के इस तरह के आरोपों का कोई आधार नहीं है।

जांच और पारदर्शिता पर टिकी नजर

राम मंदिर देश और दुनिया के करोड़ों श्रद्धालुओं की आस्था का केंद्र है। ऐसे में चढ़ावे को लेकर उठे आरोपों ने राजनीतिक और धार्मिक दोनों स्तरों पर चर्चा को तेज कर दिया है। अब सभी की नजर इस बात पर है कि ट्रस्ट की ऑडिट प्रक्रिया और संभावित जांच में क्या तथ्य सामने आते हैं।