यूपी में अब कैब कंपनियां नहीं वसूल पाएंगी मनमाना किराया, सरकार ने लागू किए नए नियम
लखनऊ। उत्तर प्रदेश में ऐप आधारित कैब से सफर करने वाले यात्रियों को अब मनमाने किराए और खराब सेवा से राहत मिलने की उम्मीद है। योगी सरकार ने ऐप आधारित कैब, यात्री परिवहन, डिलीवरी और लॉजिस्टिक सेवाओं को लेकर नई नियमावली-2026 लागू कर दी है। इसका नाम उत्तर प्रदेश मोटरयान (समूहक एवं वितरण सेवा प्रदाता)-2026 रखा गया है। नई व्यवस्था में कैब के किराए, ड्राइवर के सत्यापन, बीमा, शिकायतों के निपटारे और वाहनों की निगरानी समेत कई अहम प्रावधान किए गए हैं।
सरकार ने एग्रीगेटर और वाहनों की निगरानी के लिए UP My Fleet पोर्टल भी शुरू किया है। पोर्टल पर फिलहाल ग्राहकों को सेवाएं देने वाले दो एग्रीगेटर और उनके 3,15,218 वाहन ऑनबोर्ड किए गए हैं।
पीक टाइम में किराया 50 फीसदी से ज्यादा नहीं बढ़ेगा
नई नियमावली के तहत किसी खास समय में कैब की मांग बढ़ने पर कंपनियां बेस फेयर से अधिकतम 50 फीसदी तक ही किराया बढ़ा सकेंगी। यानी पीक आवर या अचानक बढ़ी डिमांड के नाम पर यात्रियों से मनमाना किराया वसूलना आसान नहीं होगा।
वहीं, बुकिंग स्वीकार करने के बाद अगर ड्राइवर बिना उचित कारण यात्री को लेने नहीं पहुंचता है तो उस पर 100 रुपये का जुर्माना लगाया जाएगा। यह राशि यात्री को अगली यात्रा में लाभ के तौर पर देने
का प्रावधान किया गया है।
ड्राइवर का होगा पुलिस और चरित्र सत्यापन
एग्रीगेटर से जुड़े प्रत्येक ड्राइवर का पुलिस और चरित्र सत्यापन अनिवार्य होगा। इसके साथ ही ड्राइवरों का मनोवैज्ञानिक परीक्षण और समय-समय पर रिफ्रेशर ट्रेनिंग भी कराई जाएगी, ताकि यात्रियों की सुरक्षा और बेहतर सेवा सुनिश्चित की जा सके।
ड्राइवरों के लिए 5 लाख रुपये का स्वास्थ्य बीमा और 10 लाख रुपये का टर्म इंश्योरेंस उपलब्ध कराने का भी प्रावधान किया गया है। वहीं, कैब से सफर करने वाले प्रत्येक यात्री का बीमा कराना एग्रीगेटर की जिम्मेदारी होगी।
शिकायत के लिए नियुक्त होगा अधिकारी
हर ऐप आधारित कंपनी को ग्रिवांस रिड्रेसल ऑफिसर नियुक्त करना होगा। यात्री किराए, बुकिंग, ड्राइवर के व्यवहार या सेवा से जुड़ी शिकायत सीधे दर्ज करा सकेंगे। नियमों या मोटर वाहन कानून का उल्लंघन पाए जाने पर संबंधित कंपनी पर जुर्माना भी लगाया जा सकेगा।
एग्रीगेटर लाइसेंस के लिए 5 लाख रुपये फीस
नई व्यवस्था में एग्रीगेटर के आवेदन की फीस 25 हजार रुपये, जबकि लाइसेंस फीस 5 लाख रुपये तय की गई है। इसके अलावा वाहनों की संख्या के आधार पर जमानत राशि भी निर्धारित की गई है।
- 100 बस या 1,000 अन्य वाहन तक — 10 लाख रुपये
- 1,000 बस या 10,000 अन्य वाहन तक — 25 लाख रुपये
- इससे अधिक वाहन — 50 लाख रुपये
डिलीवरी और लॉजिस्टिक कंपनियां भी दायरे में
नई नियमावली केवल ऐप कैब तक सीमित नहीं रहेगी। ऐसे डिजिटल प्लेटफॉर्म भी इसके दायरे में आएंगे, जो ड्राइवरों को ई-कॉमर्स कंपनियों, विक्रेताओं या अन्य लोगों से जोड़कर पार्सल, पैकेज और कूरियर की डिलीवरी कराते हैं। यानी डिजिटल माध्यम से यात्री या सामान परिवहन की सेवा देने वाले प्लेटफॉर्म पर भी अब नियम लागू होंगे।
प्रदूषण पर भी सरकार की नजर
UP My Fleet पोर्टल के जरिए एग्रीगेटर से जुड़े वाहनों की जानकारी, नियमों के पालन और प्रदूषण की स्थिति पर निगरानी रखी जाएगी। सरकार ने पेट्रोल और डीजल वाहनों के बजाय इलेक्ट्रिक वाहनों को बढ़ावा देने पर भी जोर दिया है। आने वाले समय में फ्लीट को धीरे-धीरे इलेक्ट्रिक वाहनों में बदलने की दिशा में भी काम किया जाएगा।
नई नियमावली लागू होने के बाद उम्मीद है कि ऐप आधारित कैब और डिलीवरी सेवाओं में पारदर्शिता बढ़ेगी, यात्रियों को बेहतर सुरक्षा मिलेगी और कंपनियों की जवाबदेही भी तय होगी।