UP में बच्चा चोरी गैंग का पर्दाफाश : 5 लाख में होता था मासूमों का सौदा, डॉक्टर-नर्स चला रहे थे नेटवर्क
May 31, 2026, 10:50 IST
उत्तर प्रदेश में बच्चा चोरी और तस्करी करने वाले एक बड़े गिरोह का पुलिस ने खुलासा किया है। इस रैकेट में डॉक्टर, नर्स और क्लीनिक संचालक जैसे मेडिकल क्षेत्र से जुड़े लोग शामिल पाए गए हैं। पुलिस ने अब तक कुल छह आरोपियों को गिरफ्तार किया है, जिनमें दो डॉक्टर और एक नर्स भी शामिल हैं।
डेढ़ साल के बच्चे के अपहरण से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब 24 मई 2026 को Bareilly के आंवला थाना क्षेत्र के मनौना गांव से डेढ़ साल के एक बच्चे के अपहरण की सूचना मिली। जांच के दौरान पुलिस ने पहले योगेश और पवन नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में पूछताछ और जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
डॉक्टर, नर्स और क्लीनिक संचालक गिरफ्तार
पुलिस ने Dr. Sanjay Kumar Biswas, केशवराम उर्फ मंजेश और नर्स सीता को गिरफ्तार किया है।
डॉ. संजय सीतापुर में अस्पताल संचालित करता है।
मंजेश लखीमपुर खीरी में कथित रूप से फर्जी क्लीनिक चला रहा था।
सीता बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में नर्स के रूप में कार्यरत थी।
जांच में सामने आया है कि ये लोग बच्चों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई चेन का हिस्सा थे।
5 लाख रुपये में बेचे जाते थे बच्चे
पुलिस के अनुसार, गिरोह नवजात और छोटे बच्चों को करीब 5 लाख रुपये में बेचता था। आरोपी बच्चों को चोरी कर या अन्य माध्यमों से हासिल कर खरीदारों तक पहुंचाते थे।
पूछताछ में यह भी पता चला है कि नर्स सीता बच्चों को खरीदने वालों तक पहुंचाने और सौदे को पूरा कराने में अहम भूमिका निभाती थी।
अवैध गर्भपात रैकेट की भी आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि गिरोह का संबंध अवैध गर्भपात और नवजात शिशुओं की तस्करी से भी हो सकता है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या गर्भवती महिलाओं को पैसे देकर बच्चों को जन्म के बाद बेचने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
गिरोह में बंटी थीं जिम्मेदारियां
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के हर सदस्य की अलग भूमिका थी।
योगेश और पवन बच्चों के अपहरण का काम करते थे।
उत्तम बाजपेयी बिचौलिये की भूमिका निभाता था।
डॉ. संजय और मंजेश बच्चों की सप्लाई करते थे।
नर्स सीता बच्चों को खरीदारों तक पहुंचाने और सौदे कराने का काम करती थी।
गैंगस्टर एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
Anshika Verma ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ था।
डेढ़ साल के बच्चे के अपहरण से खुला मामला
मामले का खुलासा तब हुआ जब 24 मई 2026 को Bareilly के आंवला थाना क्षेत्र के मनौना गांव से डेढ़ साल के एक बच्चे के अपहरण की सूचना मिली। जांच के दौरान पुलिस ने पहले योगेश और पवन नामक दो आरोपियों को गिरफ्तार किया। बाद में पूछताछ और जांच के आधार पर पूरे नेटवर्क का खुलासा हुआ।
डॉक्टर, नर्स और क्लीनिक संचालक गिरफ्तार
पुलिस ने Dr. Sanjay Kumar Biswas, केशवराम उर्फ मंजेश और नर्स सीता को गिरफ्तार किया है।
डॉ. संजय सीतापुर में अस्पताल संचालित करता है।
मंजेश लखीमपुर खीरी में कथित रूप से फर्जी क्लीनिक चला रहा था।
सीता बरेली के एक मेडिकल कॉलेज में नर्स के रूप में कार्यरत थी।
जांच में सामने आया है कि ये लोग बच्चों की खरीद-फरोख्त और सप्लाई चेन का हिस्सा थे।
5 लाख रुपये में बेचे जाते थे बच्चे
पुलिस के अनुसार, गिरोह नवजात और छोटे बच्चों को करीब 5 लाख रुपये में बेचता था। आरोपी बच्चों को चोरी कर या अन्य माध्यमों से हासिल कर खरीदारों तक पहुंचाते थे।
पूछताछ में यह भी पता चला है कि नर्स सीता बच्चों को खरीदने वालों तक पहुंचाने और सौदे को पूरा कराने में अहम भूमिका निभाती थी।
अवैध गर्भपात रैकेट की भी आशंका
जांच एजेंसियों को शक है कि गिरोह का संबंध अवैध गर्भपात और नवजात शिशुओं की तस्करी से भी हो सकता है। पुलिस इस एंगल पर भी जांच कर रही है कि क्या गर्भवती महिलाओं को पैसे देकर बच्चों को जन्म के बाद बेचने का नेटवर्क संचालित किया जा रहा था।
गिरोह में बंटी थीं जिम्मेदारियां
पुलिस जांच में सामने आया है कि गिरोह के हर सदस्य की अलग भूमिका थी।
योगेश और पवन बच्चों के अपहरण का काम करते थे।
उत्तम बाजपेयी बिचौलिये की भूमिका निभाता था।
डॉ. संजय और मंजेश बच्चों की सप्लाई करते थे।
नर्स सीता बच्चों को खरीदारों तक पहुंचाने और सौदे कराने का काम करती थी।
गैंगस्टर एक्ट के तहत होगी कार्रवाई
Anshika Verma ने बताया कि सभी आरोपियों के खिलाफ गैंगस्टर एक्ट के तहत कार्रवाई की जाएगी। पुलिस को उम्मीद है कि जांच के दौरान इस नेटवर्क से जुड़े और लोगों के नाम भी सामने आ सकते हैं।
फिलहाल पुलिस पूरे मामले की गहन जांच कर रही है और यह पता लगाने का प्रयास कर रही है कि इस गिरोह का नेटवर्क किन-किन जिलों और राज्यों तक फैला हुआ था।