ढाई से 3 लाख में बेचते थे बच्चे...पुलिस ने पकड़ा अंतरराज्यीय बच्चा चोर गैंग, 9 माह का मासूम बरामद
May 20, 2026, 20:58 IST
यूपी पुलिस ने बुधवार को बच्चा चोरी करने वाले एक अंतरराज्यीय गिरोह का बड़ा खुलासा करते हुए नौ आरोपियों को गिरफ्तार किया है। पकड़े गए आरोपियों में बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश के लोग शामिल हैं। गिरोह में तीन महिलाएं भी शामिल थीं। पुलिस ने आरोपियों के कब्जे से चोरी किया गया नौ माह का एक मासूम बच्चा भी बरामद किया है।
पुलिस अधीक्षक Ravi Kumar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि जिले में बच्चा चोर गिरोह सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार, सदर कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह और त्रिपुला चौकी प्रभारी अंकुर दुबे की टीम ने रेलवे स्टेशन के पास छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के अररिया निवासी रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी, उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी किरणजीत उर्फ सरदार आंटी समेत यूपी के रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा के कई लोग शामिल हैं।
रायबरेली स्टेशन से चोरी हुआ था बच्चा
पुलिस जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की रहने वाली सुहागवती अपने पति से नाराज होकर दिल्ली से अपने मायके सिंगरौली जा रही थी। वह अपने दो साल और नौ माह के बच्चों के साथ त्रिवेणी एक्सप्रेस से सफर कर रही थी।
रायबरेली रेलवे स्टेशन पर गिरोह के सदस्य महिला से घुलमिल गए और उसे एक भोजनालय तक ले गए। इसी दौरान मौका पाकर नौ माह के बच्चे को चोरी कर फरार हो गए। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई कार को भी कब्जे में लेकर सीज कर दिया है।
ढाई से तीन लाख रुपये में बेचते थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित गिरोह था, जो अस्पतालों, गांवों और कस्बों में काम करने वाली आशा बहुओं और अन्य माध्यमों से ऐसे लोगों की जानकारी जुटाता था, जिन्हें संतान की जरूरत होती थी।
जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य चोरी किए गए बच्चों को ढाई से तीन लाख रुपये में बेचते थे। गिरोह का मुख्य काम रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाना था।
रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी महिलाओं से दोस्ती कर उनके बच्चों का अपहरण कर लेते थे। बच्चे बिकने के बाद दंपती आधी रकम अपने पास रखते थे, जबकि बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी।
तीन राज्यों में सक्रिय था गिरोह
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पिछले सात-आठ महीनों से बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। अब तक सात बच्चों के चोरी होने की बात सामने आई है। इनमें से एक बच्चा बरामद कर लिया गया है, जबकि बाकी छह बच्चों की तलाश जारी है।
एसपी रवि कुमार ने गिरोह का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।
पुलिस अधीक्षक Ravi Kumar ने प्रेस कॉन्फ्रेंस के दौरान बताया कि जिले में बच्चा चोर गिरोह सक्रिय होने की सूचना मिली थी। इसके बाद सीओ सदर अरुण कुमार नौहवार, सदर कोतवाली प्रभारी शिवशंकर सिंह और त्रिपुला चौकी प्रभारी अंकुर दुबे की टीम ने रेलवे स्टेशन के पास छापेमारी कर गिरोह के नौ सदस्यों को गिरफ्तार किया।
गिरफ्तार आरोपियों में बिहार के अररिया निवासी रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी, उत्तराखंड के उधम सिंह नगर निवासी किरणजीत उर्फ सरदार आंटी समेत यूपी के रामपुर, मुरादाबाद और अमरोहा के कई लोग शामिल हैं।
रायबरेली स्टेशन से चोरी हुआ था बच्चा
पुलिस जांच में सामने आया कि मध्य प्रदेश के टीकमगढ़ जिले की रहने वाली सुहागवती अपने पति से नाराज होकर दिल्ली से अपने मायके सिंगरौली जा रही थी। वह अपने दो साल और नौ माह के बच्चों के साथ त्रिवेणी एक्सप्रेस से सफर कर रही थी।
रायबरेली रेलवे स्टेशन पर गिरोह के सदस्य महिला से घुलमिल गए और उसे एक भोजनालय तक ले गए। इसी दौरान मौका पाकर नौ माह के बच्चे को चोरी कर फरार हो गए। महिला की शिकायत के बाद पुलिस ने जांच शुरू की और पूरे गिरोह का पर्दाफाश कर दिया।
पुलिस ने घटना में इस्तेमाल की गई कार को भी कब्जे में लेकर सीज कर दिया है।
ढाई से तीन लाख रुपये में बेचते थे बच्चे
पुलिस के मुताबिक यह एक संगठित गिरोह था, जो अस्पतालों, गांवों और कस्बों में काम करने वाली आशा बहुओं और अन्य माध्यमों से ऐसे लोगों की जानकारी जुटाता था, जिन्हें संतान की जरूरत होती थी।
जांच में पता चला कि गिरोह के सदस्य चोरी किए गए बच्चों को ढाई से तीन लाख रुपये में बेचते थे। गिरोह का मुख्य काम रेलवे स्टेशन, बस स्टेशन और सार्वजनिक स्थानों पर अकेली महिलाओं को निशाना बनाना था।
रामकुमार दास और उसकी पत्नी रेशमा देवी महिलाओं से दोस्ती कर उनके बच्चों का अपहरण कर लेते थे। बच्चे बिकने के बाद दंपती आधी रकम अपने पास रखते थे, जबकि बाकी रकम गिरोह के अन्य सदस्यों में बांटी जाती थी।
तीन राज्यों में सक्रिय था गिरोह
पुलिस जांच में यह भी सामने आया है कि यह गिरोह पिछले सात-आठ महीनों से बिहार, उत्तराखंड और उत्तर प्रदेश में सक्रिय था। अब तक सात बच्चों के चोरी होने की बात सामने आई है। इनमें से एक बच्चा बरामद कर लिया गया है, जबकि बाकी छह बच्चों की तलाश जारी है।
एसपी रवि कुमार ने गिरोह का खुलासा करने वाली पुलिस टीम को 25 हजार रुपये इनाम देने की घोषणा की है।