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सरकारी ठेकों से जौहर यूनिवर्सिटी तक पहुंचा पैसा? ED खंगाल रही 2012-17 का पूरा मनी ट्रेल

 

लखनऊ/रामपुर। जौहर यूनिवर्सिटी और जौहर ट्रस्ट से जुड़े ठिकानों पर प्रवर्तन निदेशालय (ईडी) की छापेमारी के बाद जांच में कई अहम जानकारियां सामने आने का दावा किया जा रहा है। एजेंसी सरकारी ठेकों से जुड़ी रकम के कथित डायवर्जन और उसके जौहर ट्रस्ट व यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण कार्यों में इस्तेमाल की जांच कर रही है।

ईडी सूत्रों के मुताबिक, सरकारी ठेके हासिल करने वाले कुछ निजी ठेकेदारों ने कथित तौर पर अपनी कमाई का एक हिस्सा जौहर ट्रस्ट या यूनिवर्सिटी से जुड़े निर्माण और अन्य कार्यों में लगाया। जांच में कुछ भुगतान चेक के जरिए, जबकि कुछ रकम आरटीजीएस के माध्यम से ट्रांसफर किए जाने के सुराग मिलने की बात कही जा रही है।

2012 से 2017 के बीच के लेनदेन पर फोकस

ईडी की जांच में वर्ष 2012 से 2017 के बीच कई सरकारी विभागों के ठेकेदारों, उनके सहयोगियों और जौहर ट्रस्ट व यूनिवर्सिटी से जुड़े लोगों के बीच हुए वित्तीय लेनदेन की पड़ताल की जा रही है। एजेंसी यह पता लगाने में जुटी है कि ट्रस्ट और यूनिवर्सिटी से जुड़े कार्यों के नाम पर पैसा किस माध्यम से पहुंचाया गया।

जांच का एक प्रमुख बिंदु यह भी है कि ठेकेदारों की ओर से ट्रस्ट को दिया गया पैसा वास्तविक दान, कारोबारी भुगतान या धर्मार्थ लेनदेन था या कथित तौर पर अपराध से अर्जित रकम को छिपाने और स्थानांतरित करने के लिए इसका इस्तेमाल किया गया।

59 भवनों पर 494 करोड़ रुपये के खर्च का दावा

ईडी सूत्रों के अनुसार, जांच के दौरान यूनिवर्सिटी परिसर में बने 59 भवनों के निर्माण से जुड़े खर्च को लेकर भी अंतर सामने आया है। ट्रस्ट की ओर से इन भवनों के निर्माण पर करीब 45 करोड़ रुपये खर्च किए जाने का दावा किए जाने की बात सामने आई है, जबकि एजेंसी की जांच में वास्तविक खर्च करीब 494 करोड़ रुपये होने का दावा किया जा रहा है।

एजेंसी अब यह पता लगाने में जुटी है कि निर्माण में लगी रकम का स्रोत क्या था और इसमें सरकारी धन के अलावा किसी अन्य स्रोत से प्राप्त धन का इस्तेमाल हुआ या नहीं।

आठ सरकारी विभागों के फंड की भी जांच

जौहर यूनिवर्सिटी के निर्माण में आठ सरकारी विभागों से जुड़े धन के इस्तेमाल की भी जांच की जा रही है। ईडी के मुताबिक, यूनिवर्सिटी निर्माण में सरकारी विभागों से करीब 110 करोड़ रुपये खर्च होने की जानकारी सामने आई है। वहीं, एजेंसी को विभागों की ओर से करीब 150 करोड़ रुपये खर्च किए जाने से संबंधित दस्तावेज मिलने का भी दावा किया जा रहा है।

इसके अलावा, जांच एजेंसी सांसद और विधायक निधि से यूनिवर्सिटी के निर्माण के लिए दिए गए करीब 4.57 करोड़ रुपये के इस्तेमाल की भी पड़ताल कर रही है।

मनी ट्रेल की आखिरी कड़ी तलाश रही ईडी

छापेमारी के दौरान मिले दस्तावेजों, बैंक खातों और डिजिटल सामग्री की जांच के आधार पर ईडी अब पूरे कथित मनी ट्रेल को जोड़ने में जुटी है। एजेंसी यह पता लगाने की कोशिश कर रही है कि रकम कहां से आई, किन खातों के जरिए ट्रांसफर हुई और आखिरकार उसका इस्तेमाल कहां किया गया।

जांच में सामने आए दस्तावेजों और डिजिटल सबूतों की विस्तृत पड़ताल के बाद मामले में आगे और खुलासे होने की संभावना है। हालांकि, जांच से जुड़े आरोपों की अंतिम पुष्टि जांच पूरी होने और संबंधित कानूनी प्रक्रिया के बाद ही स्पष्ट होगी।