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चीनी की कमी की आशंकाओं को सरकार ने किया खारिज, यूपी में 70.64 लाख क्विंटल का स्टॉक मौजूद

 

लखनऊ। चीनी की बढ़ती कीमतों के बीच प्रदेश में इसकी उपलब्धता को लेकर उठ रही आशंकाओं पर उत्तर प्रदेश सरकार ने स्थिति स्पष्ट की है। चीनी उद्योग एवं गन्ना विकास विभाग का दावा है कि प्रदेश में चीनी का पर्याप्त भंडार मौजूद है और फिलहाल इसकी कोई कमी नहीं है। विभाग के मुताबिक, राज्य में हर महीने करीब 40 लाख क्विंटल चीनी की खपत होती है, जबकि वर्तमान में 70.64 लाख क्विंटल चीनी का स्टॉक उपलब्ध है।

विभाग को उम्मीद है कि इसी महीने के अंत तक चीनी मिलों का संचालन शुरू हो जाएगा। इसके बाद नवंबर में नई उत्पादित चीनी भी बाजार में पहुंचने लगेगी। इससे उपभोक्ताओं को चीनी की उपलब्धता बनाए रखने में मदद मिलेगी।

सहकारी से निजी मिलों तक कितना है चीनी का स्टॉक?

गन्ना विकास विभाग के आंकड़ों के अनुसार, प्रदेश में उपलब्ध कुल चीनी भंडार में सहकारी, निगम और निजी क्षेत्र की मिलों की हिस्सेदारी है। सहकारी चीनी मिलों के पास 13.40 लाख क्विंटल, निगम की मिलों के पास 2.93 लाख क्विंटल और निजी क्षेत्र की चीनी मिलों के पास करीब 54.3 लाख क्विंटल चीनी उपलब्ध है।

सरकार का कहना है कि मौजूदा स्टॉक प्रदेश की जरूरतों को ध्यान में रखते हुए पर्याप्त है। नई चीनी का उत्पादन शुरू होने के बाद बाजार में आपूर्ति और बेहतर होने की उम्मीद है।

स्टॉक और कीमतों पर रहेगी नजर

चीनी की उपलब्धता और कीमतों पर नियंत्रण बनाए रखने के लिए गन्ना आयुक्त मिनिस्थी एस. ने बुधवार को क्षेत्रीय अधिकारियों के साथ बैठक की। उन्होंने अधिकारियों को चीनी के स्टॉक का भौतिक सत्यापन करने और बाजार में इसकी उपलब्धता पर लगातार नजर रखने के निर्देश दिए।

इसके अलावा, सभी जिलाधिकारियों को पत्र भेजकर चीनी मिलों से चीनी की निकासी, बाजार में उपलब्धता और कीमतों की निगरानी करने को कहा गया है। इसमें एक्स-मिल कीमतों के साथ खुदरा और थोक बाजार के भाव पर भी नजर रखने के निर्देश शामिल हैं।

इसके लिए विशेष विभागीय टीमों का गठन कर स्टॉक का भौतिक सत्यापन कराया जाएगा। विभाग का उद्देश्य यह सुनिश्चित करना है कि बाजार में चीनी की आपूर्ति सामान्य बनी रहे और उपलब्धता को लेकर किसी तरह की अनावश्यक परेशानी न हो।

सरकार ने पर्याप्त स्टॉक होने का दावा करते हुए स्पष्ट किया है कि चीनी की कमी की आशंका के बीच स्थिति पर लगातार निगरानी रखी जा रही है। अब देखना होगा कि इस निगरानी और नई चीनी की आवक का बाजार में कीमतों पर कितना असर पड़ता है।