यूपी में 30 हजार करोड़ की अटकी संपत्तियों पर सरकार का मेगा प्लान, मरम्मत कराकर फिर बेचे जाएंगे प्लॉट-फ्लैट
उत्तर प्रदेश के विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से बिक्री का इंतजार कर रही करीब 30 हजार करोड़ रुपये की संपत्तियों को अब नया रूप देने की तैयारी है। सरकार इन संपत्तियों की हालत सुधारकर उन्हें दोबारा बाजार में उतारने की योजना बना रही है। इसके तहत पुराने और कम आकर्षक दिखने वाले मकान, फ्लैट, दुकान और व्यावसायिक संपत्तियों की मरम्मत से लेकर रंगाई-पुताई तक कराई जाएगी, ताकि खरीदारों को संपत्तियां बेहतर और आकर्षक नजर आएं।
मुरादाबाद विकास प्राधिकरण (एमडीए) की ही बात करें तो उसकी कई आवासीय योजनाओं में बड़ी संख्या में प्लॉट, दुकान, फ्लैट और आवासीय-वाणिज्यिक संपत्तियां अब भी बिक्री के लिए उपलब्ध हैं। इनमें सीतापुरी-दससराय, अमृत कुंज, उद्यम विहार, ढक्का क्षेत्र की अरावली योजना और पीएम आवास योजना समेत कई परियोजनाएं शामिल हैं।
इनमें आवासीय प्लॉट के अलावा स्कूल के लिए आरक्षित जमीन भी शामिल है। बताया जा रहा है कि पिछले एक साल में एमडीए की विभिन्न योजनाओं के करीब 60 से 70 आवास ही बिक पाए हैं। प्रदेश के 28 विकास प्राधिकरणों में भी बड़ी संख्या में ऐसी संपत्तियां बिक्री का इंतजार कर रही हैं।
पुरानी संपत्तियों की बदलेगी सूरत
सरकार अब इन संपत्तियों को प्रदेशभर में री-लॉन्च करने की तैयारी कर रही है। जिन संपत्तियों को मरम्मत की जरूरत है, वहां रंगाई-पुताई, बाहरी स्वरूप में सुधार और बिजली-पानी जैसी सुविधाओं को दुरुस्त कराया जाएगा। आसपास के क्षेत्र का भी सुंदरीकरण कराया जाएगा, ताकि संपत्ति के साथ उसका पूरा माहौल खरीदारों को आकर्षित कर सके।
खाली प्लॉटों को बेचने के लिए भी सिर्फ जमीन दिखाने के बजाय वहां मौजूद सुविधाओं को बेहतर तरीके से प्रस्तुत किया जाएगा। सड़क, स्ट्रीट लाइट, पार्क और अन्य सुविधाओं को व्यवस्थित और आकर्षक तरीके से दिखाया जाएगा, जिससे संभावित खरीदारों को संपत्ति की पूरी तस्वीर मिल सके।
इन सुधार कार्यों के लिए प्रदेश सरकार की ओर से धन उपलब्ध कराया जाएगा। इसके बाद संबंधित विकास प्राधिकरण मौजूदा दरों पर इन संपत्तियों की बिक्री करेगा।
एजेंसी को बेचने की कोशिश रही नाकाम
बिक्री बढ़ाने के लिए पहले एजेंसी के माध्यम से इन संपत्तियों को बेचने की कोशिश की गई थी। इसके लिए टेंडर भी जारी किया गया, लेकिन किसी एजेंसी ने इसमें रुचि नहीं दिखाई। इसके बाद संपत्तियों की मूल कीमत में करीब 15 से 20 प्रतिशत तक की कमी करके बिक्री का प्रस्ताव तैयार किया गया। इसके बावजूद बिक्री में खास तेजी नहीं आई और कुछ ही आवास बिक सके।
अब सरकार और विकास प्राधिकरणों ने रणनीति बदलने का फैसला किया है। संपत्तियों की कीमत कम करने के बजाय पहले उनकी स्थिति और प्रस्तुतीकरण बेहतर किया जाएगा और फिर उन्हें दोबारा बाजार में उतारा जाएगा।
बिक्री बढ़ाने पर फोकस
एमडीए उपाध्यक्ष अनुभव सिंह के मुताबिक, बिक्री के लिए बची संपत्तियों का बेहतर तरीके से प्रस्तुतीकरण किया जाएगा। जहां आवश्यकता होगी, वहां सुविधाओं और बाहरी स्वरूप में सुधार कराया जाएगा। सरकार की योजना के अनुरूप संपत्तियों को री-लॉन्च कर उनकी बिक्री बढ़ाने पर काम किया जा रहा है।
सरकार को उम्मीद है कि बेहतर सुविधाओं और आकर्षक स्वरूप के साथ दोबारा बाजार में उतारी गई इन संपत्तियों से खरीदारों की रुचि बढ़ेगी और विकास प्राधिकरणों में लंबे समय से फंसी बड़ी पूंजी को बाहर निकालने में मदद मिलेगी।