UP पंचायत चुनाव में देरी पर हाईकोर्ट सख्त, पूछा- आरक्षण प्रक्रिया में इतनी देरी क्यों? 10 जुलाई तक देनी होगी रिपोर्ट
Jun 5, 2026, 10:22 IST
10 जुलाई तक देनी होगी रिपोर्ट उत्तर प्रदेश में पंचायत चुनावों में हो रही देरी को लेकर इलाहाबाद हाईकोर्ट की लखनऊ खंडपीठ ने राज्य सरकार और संबंधित आयोगों पर गंभीर सवाल उठाए हैं। अदालत ने कहा कि पंचायत चुनावों के लिए आरक्षण निर्धारण का मुद्दा पहले से ही सरकार के संज्ञान में था, ऐसे में प्रक्रिया को समय रहते पूरा किया जाना चाहिए था।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने पंचायत चुनावों और उनके लोकतांत्रिक स्वरूप से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को 10 जुलाई तक चुनावी तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने जताई देरी पर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए आयोग का गठन किया गया है, लेकिन आयोग की सिफारिशों पर अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए पूरी प्रक्रिया में नियमानुसार लगभग छह महीने का समय लग सकता है, जबकि इसे पहले ही पूरा किया जाना चाहिए था।
प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को चुनौती
यह आदेश आशीष कुमार सिंह, ओम प्रकाश प्रजापति और खुशीराम की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाओं में उस शासनादेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि निर्वाचित कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखना संविधान के अनुच्छेद 243-ई की भावना के विपरीत है, जिसमें पंचायतों के नियमित और समयबद्ध चुनावों का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बताई आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को जानकारी दी कि पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून को प्रस्तावित है। आयोग ने बताया कि चुनावी तैयारियों के विभिन्न चरणों पर काम चल रहा है।
चुनावी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद पंचायत चुनावों की समयसीमा और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर सरकार एवं आयोगों की गतिविधियों पर सभी की नजरें टिक गई हैं। अब 10 जुलाई को दाखिल होने वाली प्रगति रिपोर्ट से चुनावी प्रक्रिया की दिशा और संभावित समय-सीमा को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।
न्यायमूर्ति शेखर बी. सराफ और न्यायमूर्ति अवधेश कुमार चौधरी की खंडपीठ ने पंचायत चुनावों और उनके लोकतांत्रिक स्वरूप से जुड़े मामलों की सुनवाई करते हुए राज्य निर्वाचन आयोग तथा अन्य पिछड़ा वर्ग (ओबीसी) आयोग को 10 जुलाई तक चुनावी तैयारियों और आरक्षण प्रक्रिया की प्रगति रिपोर्ट दाखिल करने का निर्देश दिया है।
अदालत ने जताई देरी पर चिंता
सुनवाई के दौरान अदालत ने टिप्पणी करते हुए कहा कि ओबीसी आरक्षण निर्धारण के लिए आयोग का गठन किया गया है, लेकिन आयोग की सिफारिशों पर अपेक्षित गति से काम नहीं हुआ। कोर्ट ने कहा कि उपलब्ध परिस्थितियों को देखते हुए पूरी प्रक्रिया में नियमानुसार लगभग छह महीने का समय लग सकता है, जबकि इसे पहले ही पूरा किया जाना चाहिए था।
प्रधानों को प्रशासक बनाए जाने को चुनौती
यह आदेश आशीष कुमार सिंह, ओम प्रकाश प्रजापति और खुशीराम की ओर से दाखिल याचिकाओं पर सुनवाई के दौरान दिया गया। याचिकाओं में उस शासनादेश को चुनौती दी गई है, जिसके तहत ग्राम प्रधानों का कार्यकाल समाप्त होने के बाद उन्हें ग्राम पंचायतों का प्रशासक नियुक्त कर दिया गया है।
याचिकाकर्ताओं का तर्क है कि निर्वाचित कार्यकाल समाप्त होने के बाद प्रधानों को प्रशासक के रूप में बनाए रखना संविधान के अनुच्छेद 243-ई की भावना के विपरीत है, जिसमें पंचायतों के नियमित और समयबद्ध चुनावों का प्रावधान किया गया है।
सरकार ने बताई आरक्षण प्रक्रिया की स्थिति
सुनवाई के दौरान राज्य सरकार की ओर से अदालत को बताया गया कि पंचायत चुनावों के लिए ओबीसी आरक्षण निर्धारण की प्रक्रिया फिलहाल जारी है और इस संबंध में आवश्यक कार्यवाही की जा रही है।
वहीं राज्य निर्वाचन आयोग ने अदालत को जानकारी दी कि पंचायत चुनावों के लिए मतदाता सूची का प्रकाशन 10 जून को प्रस्तावित है। आयोग ने बताया कि चुनावी तैयारियों के विभिन्न चरणों पर काम चल रहा है।
चुनावी प्रक्रिया पर टिकी निगाहें
हाईकोर्ट की इस टिप्पणी के बाद पंचायत चुनावों की समयसीमा और आरक्षण प्रक्रिया को लेकर सरकार एवं आयोगों की गतिविधियों पर सभी की नजरें टिक गई हैं। अब 10 जुलाई को दाखिल होने वाली प्रगति रिपोर्ट से चुनावी प्रक्रिया की दिशा और संभावित समय-सीमा को लेकर स्थिति और स्पष्ट हो सकती है।