मणिकर्णिका घाट के पुनर्निर्माण कार्य पर आई मंत्री ए.के. शर्मा की प्रतिक्रिया, बोले- विरासत के साथ विकास सरकार की प्राथमिकता
Jan 17, 2026, 09:42 IST
लखनऊ। काशी के विश्वप्रसिद्ध मणिकर्णिका घाट पर चल रहे पुनर्निर्माण कार्य को लेकर उठ रहे सवालों और सोशल मीडिया पर फैलाए जा रहे भ्रम पर नगर विकास एवं ऊर्जा मंत्री ए.के. शर्मा ने कड़ा और स्पष्ट जवाब दिया है। उन्होंने कहा कि मणिकर्णिका घाट के विकास को लेकर जनता को गुमराह किया जा रहा है, जबकि सच्चाई यह है कि यह कार्य काशी की प्राचीन परंपराओं और धरोहरों को संरक्षित रखते हुए किया जा रहा है।
ए.के. शर्मा ने कहा कि मणिकर्णिका घाट मां गंगा के तट पर स्थित एक अत्यंत प्राचीन और पौराणिक स्थल है, जहां सदियों से निरंतर दाह-संस्कार होते आ रहे हैं। बावजूद इसके, दशकों तक यहां आने वाले लोगों को बैठने, ठहरने, लकड़ी के भंडारण, पूजा सामग्री, मुंडन स्थल और साफ-सफाई जैसी बुनियादी सुविधाओं के अभाव में भारी परेशानी झेलनी पड़ी। पूर्व की सरकारों ने इन समस्याओं की ओर कभी गंभीरता से ध्यान नहीं दिया।
मंत्री ने कहा कि प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के नेतृत्व में काशी विश्वनाथ कॉरिडोर, नमो घाट, अस्सी घाट जैसे कई विकास कार्यों से काशी की भव्यता और दिव्यता को नई पहचान मिली है। इसी क्रम में अब मणिकर्णिका घाट को भी सुव्यवस्थित, सुरक्षित और सुविधाजनक बनाने के लिए पुनर्निर्माण कार्य शुरू किया गया है।
उन्होंने स्पष्ट किया कि इस परियोजना के तहत पौराणिक मंदिरों, ऐतिहासिक चिन्हों और सांस्कृतिक धरोहरों का पूरा संरक्षण किया जा रहा है। शवदाह स्थल, प्लेटफॉर्म, लकड़ी भंडारण, पूजा सामग्री स्टोर, मुंडन स्थल और मढ़ी का पुनर्निर्माण किया जा रहा है। सोशल मीडिया पर वायरल हो रहे कुछ वीडियो और तस्वीरें काम के दौरान अस्थायी रूप से हटाई गई कलाकृतियों की हैं, जिन्हें पूरी तरह सुरक्षित रखा गया है। पुनर्निर्माण पूरा होने के बाद इन्हें यथास्थान फिर से स्थापित किया जाएगा। उन्होंने साफ कहा कि किसी भी मंदिर या धार्मिक संरचना को कोई नुकसान नहीं पहुंचाया गया है।
ए.के. शर्मा ने कहा कि पुण्यश्लोक रानी अहिल्याबाई होलकर की कृतियों सहित घाट की सभी प्राचीन धरोहरों का संरक्षण सरकार की सर्वोच्च प्राथमिकता है। उनकी 300वीं जयंती पूरे सम्मान और श्रद्धा के साथ मनाई गई, जो सरकार की प्रतिबद्धता को दर्शाता है।
उन्होंने विपक्ष पर आरोप लगाया कि कुछ नेता राजनीतिक स्वार्थ के चलते इस निष्ठापूर्ण पुनर्निर्माण कार्य को तोड़-मरोड़कर पेश कर रहे हैं और जनता को भ्रमित कर रहे हैं। मंत्री ने सवाल उठाया कि क्या लंबे समय तक सत्ता में रहने वालों ने कभी मणिकर्णिका घाट की समस्याओं के समाधान के लिए ठोस कदम उठाए थे, या कोरोना काल में यहां उत्पन्न हालात के दौरान कोई प्रभावी व्यवस्था की थी।
अंत में ए.के. शर्मा ने कहा कि सरकार विरासत के साथ विकास के मंत्र पर काम कर रही है और मणिकर्णिका घाट का पुनर्निर्माण इसी सोच का सशक्त उदाहरण है। सरकार काशी की धार्मिक आस्था, सांस्कृतिक विरासत और मानवीय सुविधाओं को एक साथ मजबूत करने के लिए पूरी तरह प्रतिबद्ध है।