Mirzapur: विंध्याचल मंदिर में अब बिना पहचान पत्र नहीं मिलेगा पंडों को विशेष प्रवेश, जानिए नई व्यवस्था क्या है?
Mirzapur: विंध्य विकास परिषद अब तीर्थ पुरोहितों और पारीवालों को पहचान पत्र जारी करेगी। मंदिर में प्रवेश और पंडा समाज के चुनाव में मतदान के लिए यह पहचान पत्र अनिवार्य होगा। 1982 की नियमावली के आधार पर जारी किए जा रहे इन पहचान पत्रों के बिना अब किसी भी तीर्थ पुरोहित या पारीवाल को विशेष दर्जे में मंदिर प्रवेश नहीं मिलेगा। उन्हें आम श्रद्धालुओं की तरह सामान्य प्रवेश लेना होगा।
Mirzapur जिलाधिकारी प्रियंका निरंजन ने संबंधित अधिकारियों को निर्देश दिए हैं कि 15 दिन में पहचान पत्र प्रक्रिया पूरी की जाए और इसके बाद जल्द चुनाव की तिथि घोषित की जाए। डीएम ने साफ किया है कि यह कोई नई व्यवस्था नहीं है, बल्कि विंध्य विकास परिषद की पुरानी नियमावली के तहत ही काम हो रहा है।
पहचान पत्र होंगे रंग-बिरंगे, बारकोड से होगी सत्यापन
परिषद की ओर से जारी किए जाने वाले पहचान पत्रों की रंगीन पहचान तय कर दी गई है। तीर्थ पुरोहितों को पीले रंग का और पारीवालों को नारंगी रंग का पहचान पत्र मिलेगा। इसमें संबंधित व्यक्ति की पूरी जानकारी होगी और एक बारकोड भी होगा, जिसे स्कैन कर श्रद्धालु सत्यापन कर सकेंगे। हर छह महीने में पहचान पत्र का रिन्यूवल कराना अनिवार्य होगा, जिसके लिए निर्धारित शुल्क लिया जाएगा।
मुकदमे वाले को नहीं मिलेगा परिचय पत्र
Mirzapur पहचान पत्र के लिए जरूरी दस्तावेजों के साथ एक शपथ पत्र भी देना होगा। इसमें यह घोषित करना होगा कि संबंधित व्यक्ति के खिलाफ कोई आपराधिक मुकदमा दर्ज नहीं है। अगर किसी पर मुकदमा लंबित है, तो उसका पहचान पत्र नहीं बनेगा और वह साधारण सभा का सदस्य नहीं बन पाएगा।
परिषद करेगी जांच, विवाद होने पर सिटी मजिस्ट्रेट लेंगे निर्णय
पहचान पत्रों की जांच की जिम्मेदारी पंडा समाज को सौंपी गई है। किसी भी विवाद की स्थिति में अंतिम निर्णय Mirzapur सिटी मजिस्ट्रेट द्वारा लिया जाएगा। परिषद के लिपिक ईश्वरदत्त त्रिपाठी ने बताया कि मंगलवार को पहले दिन 43 फॉर्म जारी किए गए थे, जो एक घंटे में ही खत्म हो गए। जल्द ही और फॉर्म उपलब्ध कराए जाएंगे।
पंडा समाज में उत्साह, लेकिन समय की कमी पर चिंता
श्री विंध्य पंडा समाज के अध्यक्ष पंकज द्विवेदी ने कहा कि अब तक समाज की ओर से पहचान पत्र बनाए जाते थे, जिन पर Mirzapur सिटी मजिस्ट्रेट के हस्ताक्षर होते थे। यह पहली बार होगा जब परिषद की ओर से आईडी कार्ड जारी किया जाएगा। उन्होंने कहा कि कागजात मांगे जा रहे हैं, लेकिन प्रक्रिया पूरी करने के लिए समय कम है। समाज के लोग जल्द ही डीएम से इस संबंध में मुलाकात करेंगे।
उल्लेखनीय है कि 1982 में Mirzapur विंध्य विकास परिषद की स्थापना के समय एक नियमावली बनाई गई थी। उसी के तहत यह पहचान पत्र और सदस्यता प्रक्रिया चलाई जा रही है। वर्तमान में लगभग 1200 तीर्थ पुरोहित और 60 से 65 पारीवाल मंदिर परिसर में सक्रिय हैं। परिषद का मानना है कि इस नई प्रक्रिया से मंदिर व्यवस्था अधिक पारदर्शी, विवाद रहित और व्यवस्थित हो सकेगी।