32 साल में पांच बार बदला नाम, अब इस नाम से जाना जाएगा भदोही
भदोही। मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने रविवार को भदोही जिले के नाम को लेकर बड़ा ऐलान किया। उन्होंने कहा कि अब जिले को ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। मुख्यमंत्री की इस घोषणा के बाद जनसभा में मौजूद लोगों ने ‘जय श्री राम’ के नारे लगाए।
सीएम योगी ने यह घोषणा कारपेट एक्सपो मार्ट में 50वें अंतरराष्ट्रीय कालीन मेले के उद्घाटन के बाद भिखारीपुर मैदान में आयोजित जनसभा के दौरान की। उन्होंने इस मौके पर संत रविदास के विचारों और उनके योगदान को भी याद किया।
32 साल में पांचवीं बार बदला जिले का नाम
भदोही के नाम का इतिहास राजनीतिक बदलावों से भी जुड़ा रहा है। 30 जून 1994 को तत्कालीन मुलायम सिंह यादव सरकार ने वाराणसी से अलग करके भदोही को नया जिला बनाया था। उस समय जिले का नाम भदोही’ रखा गया था।
इसके करीब तीन साल बाद 4 दिसंबर 1997 को मायावती की सरकार ने जिले का नाम बदलकर *संत रविदास नगर’* कर दिया। यह बदलाव संत रविदास के सम्मान में किया गया था।
इसके बाद 12 नवंबर 1999 को भाजपा की रामप्रकाश गुप्ता सरकार ने दोनों नामों को मिलाकर जिले का नाम संत रविदास नगर भदोही’ कर दिया। हालांकि, यह नाम भी लंबे समय तक कायम नहीं रहा।
6 दिसंबर 2014 को तत्कालीन मुख्यमंत्री अखिलेश यादव की सरकार ने संयुक्त नाम से ‘संत रविदास नगर’ हटाकर जिले का नाम दोबारा ‘भदोही’ कर दिया।
अब करीब 12 साल बाद एक बार फिर योगी सरकार ने जिले के नाम में संत रविदास का नाम जोड़ दिया है। 4 अक्टूबर 2026 को की गई घोषणा के बाद अब जिला ‘संत रविदास नगर भदोही’ के नाम से जाना जाएगा। यानी जिले की स्थापना के बाद से अब तक इसके नाम में कुल पांच बार बदलाव हो चुका है।
संत रविदास के विचारों को किया याद
मुख्यमंत्री योगी आदित्यनाथ ने नाम बदलने की घोषणा के साथ संत रविदास के योगदान और उनके विचारों का भी उल्लेख किया। संत रविदास भारतीय भक्ति परंपरा के प्रमुख संत और कवि माने जाते हैं। उन्होंने अपने संदेशों के जरिए समानता, भाईचारे और सामाजिक समरसता पर जोर दिया।
सरकार की ओर से जिले के नाम में संत रविदास का नाम दोबारा शामिल किए जाने को उनके योगदान के सम्मान से जोड़कर देखा जा रहा है। घोषणा के बाद स्थानीय लोगों और संत रविदास के अनुयायियों में भी उत्साह देखने को मिला।
भदोही की पहचान देश-दुनिया में कालीन उद्योग के लिए भी खास है। ऐसे में जिले के नाम के साथ संत रविदास का नाम जुड़ना स्थानीय स्तर पर सामाजिक और सांस्कृतिक दृष्टि से भी महत्वपूर्ण माना जा रहा है।