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पेपर लीक मुद्दे पर चर्चा करने प्रयागराज पहुंचे सांसद संजय सिंह, कार्यक्रम रोकने पहुंचे अफसरों पर भड़के, सुनाई खरी-खोटी

 

प्रयागराज में भर्ती परीक्षाओं में कथित धांधली और पेपर लीक के मुद्दे पर आयोजित एक कार्यक्रम के दौरान आम आदमी पार्टी के राज्यसभा सांसद Sanjay Singh और प्रशासनिक अधिकारियों के बीच तीखी नोकझोंक देखने को मिली। सर्किट हाउस में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम के दौरान एडीएम सिटी सत्यम मिश्रा और डीसीपी सिटी मनीष कुमार शांडिल्य पुलिस बल के साथ पहुंचे, जिसके बाद माहौल गर्म हो गया।

"क्या पेपर लीक पर चर्चा करना अपराध है?" - संजय सिंह

प्रतियोगी छात्रों से बातचीत कर रहे संजय सिंह से एडीएम सिटी ने अलग चलकर बातचीत करने का आग्रह किया। इस पर सांसद नाराज हो गए और अधिकारियों से कहा कि वह कोई कानून-व्यवस्था नहीं बिगाड़ रहे हैं, बल्कि छात्रों के भविष्य से जुड़े मुद्दों पर चर्चा कर रहे हैं।

उन्होंने कहा कि सर्किट हाउस कोई निजी संपत्ति नहीं, बल्कि जनता के पैसे से बना सरकारी परिसर है। यदि लोकतंत्र में पेपर लीक और भर्ती घोटालों पर चर्चा भी नहीं की जा सकती, तो यह बेहद चिंताजनक स्थिति है। सांसद ने अधिकारियों की कार्रवाई को अपने विशेषाधिकारों का उल्लंघन बताते हुए इसकी शिकायत विशेषाधिकार समिति में करने की बात कही।

कार्यक्रम रोकने की कोशिश, फिर पीछे हटे अधिकारी

बताया जा रहा है कि अधिकारियों का तर्क था कि सर्किट हाउस में छात्रों के साथ संवाद कार्यक्रम के लिए आवश्यक अनुमति नहीं ली गई थी। हालांकि संजय सिंह अपनी बात पर अड़े रहे और कार्यक्रम जारी रखा। कुछ देर बाद अधिकारी दूसरे कमरे में जाकर बैठ गए और संवाद कार्यक्रम चलता रहा।

कार्यक्रम समाप्त होने के बाद जब संजय सिंह मीडिया से बातचीत करने बाहर निकले, तो सभागार की बिजली कटने का भी आरोप लगाया गया।

दो छात्र हिरासत में

इस पूरे घटनाक्रम के बीच पुलिस ने संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच के संयोजक पंकज पांडेय और छात्र नेता आशुतोष पांडेय को हिरासत में ले लिया। दोनों छात्र हाल ही में हुए विरोध प्रदर्शनों में भी सक्रिय भूमिका निभा चुके हैं।

29 मई के प्रदर्शन के बाद बढ़ा विवाद

गौरतलब है कि 29 मई को प्रयागराज में करीब दो हजार प्रतियोगी छात्रों ने सड़कों पर उतरकर प्रदर्शन किया था। छात्रों ने विभिन्न भर्ती परीक्षाओं में धांधली और पेपर लीक के आरोप लगाते हुए विरोध जताया था।

प्रदर्शन के बाद प्रशासन ने तीन प्रमुख कोचिंग संस्थानों पर कार्रवाई करते हुए उन्हें सील कर दिया। इनमें एग्जामपुर वाला कोचिंग, सुपर क्लाइमेक्स कोचिंग और टारगेट ऑन कोचिंग शामिल हैं।

छात्रों की प्रमुख मांगें

छात्र संगठनों ने सरकार के सामने चार प्रमुख मांगें रखी हैं—

यूपी दरोगा भर्ती का स्कोर कार्ड जारी किया जाए।
लेखपाल भर्ती परीक्षा को रद्द किया जाए।
भर्ती परीक्षाओं की प्रक्रिया पूरी तरह पारदर्शी बनाई जाए।
पेपर लीक मामलों में दोषियों पर सख्त कार्रवाई हो।
12 जून को "लखनऊ चलो" आंदोलन

संयुक्त प्रतियोगी छात्र हुंकार मंच ने 12 जून को "लखनऊ चलो" आंदोलन का ऐलान किया है। संगठन का कहना है कि यदि सरकार ने छात्रों की मांगों पर गंभीरता से विचार नहीं किया तो आंदोलन को और व्यापक बनाया जाएगा।

सरकार पर साधा निशाना

संजय सिंह ने आरोप लगाया कि सरकार अपनी नाकामियों को छिपाने की कोशिश कर रही है। उन्होंने कहा कि भर्ती परीक्षाओं में लगातार सामने आ रही गड़बड़ियों से लाखों युवाओं का भविष्य प्रभावित हो रहा है और सरकार वास्तविक समस्याओं का समाधान करने के बजाय आवाज उठाने वालों पर कार्रवाई कर रही है।

इस पूरे घटनाक्रम ने एक बार फिर उत्तर प्रदेश में भर्ती परीक्षाओं की पारदर्शिता और युवाओं के रोजगार से जुड़े मुद्दों को राजनीतिक बहस के केंद्र में ला दिया है।