शादी का वादा हर बार दुष्कर्म नहीं...इलाहाबाद हाईकोर्ट ने यूपी पुलिस के इंस्पेक्टर के खिलाफ केस किया रद्द
प्रयागराज: इलाहाबाद हाईकोर्ट ने शादी का झांसा देकर दुष्कर्म के आरोप में घिरे पुलिस इंस्पेक्टर अमित कुमार के खिलाफ चल रही आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया है। कोर्ट ने कहा कि किसी महिला और पुरुष के बीच शादी के वादे के आधार पर बने हर संबंध को अपने आप दुष्कर्म नहीं माना जा सकता। ऐसे मामले में यह दिखाना जरूरी है कि संबंध बनाते समय शादी का वादा शुरू से ही झूठा था और महिला की सहमति उसी झूठे वादे के कारण बनी थी। न्यायमूर्ति मदन पाल सिंह की पीठ ने 30 सितंबर 2026 को यह आदेश दिया।
2013 में हुई थी मुलाकात, 2020 में दर्ज हुआ मुकदमा
मामला मथुरा के कोसीकलां की एक युवती की शिकायत से जुड़ा है। युवती ने 8 जनवरी 2020 को वाराणसी के महिला थाने में इंस्पेक्टर अमित कुमार के खिलाफ मुकदमा दर्ज कराया था। शिकायत के मुताबिक, वर्ष 2013 में कोसीकलां में तैनाती के दौरान अमित कुमार ने उससे शादी का प्रस्ताव रखा था। युवती ने आरोप लगाया था कि इंस्पेक्टर ने अपनी पहली शादी की बात उससे छिपाई।
शिकायत में यह भी आरोप लगाया गया था कि सितंबर 2019 में अमित कुमार ने उसे वाराणसी के एक होटल में बुलाया, जहां मिल्क शेक में नशीला पदार्थ मिलाकर उसके साथ दुष्कर्म किया गया। युवती ने अश्लील फोटो और वीडियो बनाकर ब्लैकमेल करने, गर्भवती होने पर जबरन गर्भपात कराने और धमकी देने के आरोप भी लगाए थे।
पुलिस ने जांच के बाद 18 जुलाई 2020 को चार्जशीट दाखिल कर दी थी। इसके बाद आरोपी ने वाराणसी की एसीजेएम तृतीय अदालत में लंबित मुकदमे और चार्जशीट को रद्द कराने के लिए हाईकोर्ट का रुख किया।
व्हाट्सऐप चैट और होटल जाने की परिस्थितियों पर कोर्ट की नजर
सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने मामले से जुड़े कई तथ्यों और जांच के दौरान सामने आए रिकॉर्ड पर विचार किया। कोर्ट ने कहा कि शिकायतकर्ता बालिग और शिक्षित थी तथा वर्ष 2013 से आरोपी को जानती थी। रिकॉर्ड के अनुसार वह अकेले विमान से वाराणसी गई और होटल में रुकी थी। इसके बाद भी वह आरोपी के संपर्क में रही और उसके मेरठ स्थित पैतृक घर भी गई।
कोर्ट के सामने रखी गई व्हाट्सऐप चैट में शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी के तलाक तक इंतजार करने की बात का भी उल्लेख था। अदालत ने इन परिस्थितियों को मामले के समग्र रिकॉर्ड के हिस्से के तौर पर देखा। जांच के दौरान कथित ब्लैकमेल के लिए बनाए गए अश्लील फोटो और वीडियो भी बरामद नहीं हुए थे।
पहली पत्नी से 2023 में हुआ तलाक
अदालत के रिकॉर्ड के अनुसार आरोपी की पहली पत्नी से 14 दिसंबर 2023 को मेरठ के पारिवारिक न्यायालय में तलाक मंजूर हुआ था। आरोपी की ओर से यह भी दलील दी गई कि शिकायत उसकी पहली पत्नी के उकसावे पर दर्ज कराई गई थी।
वहीं, शिकायतकर्ता और राज्य सरकार की ओर से युवती के बयानों को स्पष्ट और एकरूप बताते हुए आरोपी पर शादी का झांसा देकर संबंध बनाने का आरोप कायम रखने की दलील दी गई। शिकायतकर्ता की ओर से आरोपी के खिलाफ 24 से अधिक आपराधिक मामलों का भी दावा किया गया। इसके जवाब में आरोपी के वकील ने इसे मामले के वास्तविक आरोपों से अलग उसकी छवि को प्रभावित करने वाली दलील बताया।
हाईकोर्ट ने चार्जशीट और पूरी कार्यवाही की रद्द
सभी तथ्यों और रिकॉर्ड पर विचार करने के बाद हाईकोर्ट ने माना कि इस मामले में आरोपी के खिलाफ आपराधिक दायित्व स्थापित नहीं होता। अदालत ने कहा कि ऐसी स्थिति में आपराधिक कार्यवाही जारी रखना न्यायिक प्रक्रिया का दुरुपयोग होगा।
इसके साथ ही हाईकोर्ट ने 18 जुलाई 2020 की चार्जशीट और उससे जुड़ी पूरी आपराधिक कार्यवाही को रद्द कर दिया। मामला अमित कुमार बनाम उत्तर प्रदेश राज्य एवं अन्य से संबंधित था।
कोर्ट की कानूनी टिप्पणी का सार: शादी का वादा बाद में पूरा न होना अपने आप में दुष्कर्म का आधार नहीं बनता। ऐसे आरोप में यह महत्वपूर्ण है कि शादी का वादा संबंध बनाते समय ही झूठा था और उसी धोखे के कारण सहमति बनी थी।