{"vars":{"id": "130921:5012"}}

राम मंदिर ट्रस्ट की अहम बैठक आज, अचानक बदला स्थान; चंपत राय के इस्तीफे पर लग सकती है मुहर

 

अयोध्या राम मंदिर में चढ़ावा चोरी के कथित मामले के सामने आने के बाद सोमवार को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट की पहली अहम बैठक होने जा रही है। इस बैठक में ट्रस्ट के महासचिव चंपत राय और ट्रस्टी डॉ. अनिल मिश्रा के इस्तीफों पर विचार किया जाएगा। सूत्रों के मुताबिक, दोनों के इस्तीफे स्वीकार किए जाने की संभावना जताई जा रही है।

आखिरी समय पर बदला गया बैठक का स्थान

बैठक को लेकर रविवार देर रात बड़ा बदलाव किया गया। पहले यह बैठक मणिरामदास छावनी में प्रस्तावित थी, लेकिन अब दोपहर 3 बजे इसे राम मंदिर परिसर में आयोजित किया जाएगा। सूत्रों के अनुसार, सुरक्षा कारणों और मीडिया की पहुंच सीमित रखने के उद्देश्य से यह फैसला लिया गया है।

दोनों पदाधिकारियों को भी भेजा गया निमंत्रण

बैठक में चंपत राय और डॉ. अनिल मिश्रा को भी बुलाया गया है। दोनों ने 26 जून को अपने पद से इस्तीफा दिया था। गौरतलब है कि 5 फरवरी 2020 को श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के गठन के बाद अब तक हुई सभी बैठकों का संचालन चंपत राय ही करते रहे हैं।

CCTV फुटेज में चोरी का दावा

इस बीच चढ़ावा चोरी मामले की जांच में भी नए खुलासे सामने आए हैं। सूत्रों के अनुसार, आरोपी कथित तौर पर नकदी को मोजों और जेब में छिपाकर बाहर ले जाते थे। जांच के दौरान पुलिस ने आईटी विशेषज्ञों की मदद से डिलीट किए गए CCTV फुटेज भी रिकवर कर लिए हैं।

बताया जा रहा है कि फुटेज में कुछ लोग चोरी करते दिखाई दे रहे हैं, हालांकि उनकी पहचान स्पष्ट नहीं हो पा रही है। पुलिस अब वीडियो की गुणवत्ता बेहतर कराने की प्रक्रिया में जुटी है, ताकि आरोपियों की पहचान सुनिश्चित की जा सके।

ट्रस्टी के इस्तीफे और हटाने का क्या है नियम?

श्रीराम जन्मभूमि तीर्थ क्षेत्र ट्रस्ट के नियमों के अनुसार, यदि कोई ट्रस्टी ट्रस्ट के हितों के खिलाफ कार्य करता है तो उसे दो-तिहाई बहुमत से हटाया जा सकता है। इसके लिए पहले संबंधित ट्रस्टी को कारण बताओ नोटिस देना और अपना पक्ष रखने का अवसर देना अनिवार्य होता है।

वहीं, किसी ट्रस्टी का इस्तीफा भी तुरंत प्रभाव से लागू नहीं होता। नियम के अनुसार ट्रस्टी को कम से कम एक महीने पहले लिखित नोटिस देना होता है। इसके बाद ट्रस्ट की बैठक में इस्तीफे पर विचार कर उसे स्वीकार या अस्वीकार किया जाता है।

ऐसे में सोमवार की यह बैठक न केवल चढ़ावा चोरी प्रकरण, बल्कि ट्रस्ट की प्रशासनिक व्यवस्था और भविष्य की कार्यप्रणाली के लिहाज से भी बेहद महत्वपूर्ण मानी जा रही है।