शीतला धाम चौकिया बनेगा काशी विश्वनाथ और विंध्यवासिनी की तर्ज पर भव्य, इस महीने शुरू होगा निर्माण कार्य
जौनपुर। पूर्वांचल में आस्था का प्रमुख केंद्र मां शीतला धाम चौकिया अब काशी विश्वनाथ मंदिर और मां विंध्यवासिनी धाम की तरह नव्य-भव्य स्वरूप में नजर आएगा। शासन द्वारा धाम के सुंदरीकरण और पर्यटन विकास के लिए करीब छह करोड़ रुपये स्वीकृत किए गए हैं। इसी महीने से निर्माण कार्य शुरू होने जा रहा है।
धाम क्षेत्र का सर्वे पूरा हो चुका है और डिजाइन फाइनल कर ली गई है। हालांकि, आवश्यकतानुसार इसमें मामूली बदलाव किए जा सकते हैं। दो दिन पहले अधिकारियों की टीम ने धाम का निरीक्षण किया और विकास कार्यों को भविष्योन्मुखी बनाने पर जोर दिया।
मुख्य द्वार नए आकर्षक लुक में तैयार होगा, जिसमें विशेष डिजाइन अपनाई गई है। मुख्य हिस्से में दोनों तरफ मां शीतला की बड़ी तस्वीरें लगाई जाएंगी, जबकि मुख्य द्वार पर माता रानी की छोटी-छोटी तस्वीरें सजाई जाएंगी। प्रवेश द्वार पर गणेश जी की प्रतिमा स्थापित की जाएगी। आसपास के पुराने हॉल तोड़कर नए और भव्य बनाए जाएंगे, ताकि धाम का समग्र दृश्य आकर्षक बने।
मंदिर के पीछे कुंड में दो नए फव्वारे लगाए जाएंगे और मौजूदा फव्वारों की मरम्मत होगी। ग्रेनाइट की जगह आकर्षक स्टोन सेटिंग की जाएगी। दीवारों पर भी डिजाइन वाली स्टोन सेटिंग होगी। जगह-जगह कूड़ेदान लगाए जाएंगे। मुख्य प्रवेश द्वार का जीर्णोद्धार होगा और दो नए प्रवेश द्वार बनेंगे—एक शाहगंज मार्ग पर और दूसरा पचहटिया से आने वाले रास्ते पर।
पर्यटन विकास के दौरान कोई तोड़फोड़ नहीं होगी। धार्मिक और सांस्कृतिक कार्यक्रमों को ध्यान में रखते हुए स्टेज बनाया जाएगा। सुलभ कॉम्प्लेक्स (शौचालय) की व्यवस्था होगी। धाम की गलियों में इंटरलॉकिंग की जगह सीसी रोड बनाई जाएंगी। नालियों की सफाई और समग्र स्वच्छता पर विशेष ध्यान दिया जाएगा।
प्रभारी जिला पर्यटन अधिकारी मनोकामना राय ने बताया कि कार्यदायी संस्था से बातचीत हो चुकी है और जल्द ही काम शुरू हो जाएगा। इससे पूर्वांचल में मां शीतला धाम की महत्ता और बढ़ेगी।
मान्यता और महत्व
मान्यता है कि चौकिया शीतला धाम के दर्शन के बाद विंध्याचल में मां विंध्यवासिनी के दर्शन से मनोकामनाएं पूरी होती हैं। जौनपुर, आजमगढ़, सुल्तानपुर, अयोध्या, गोरखपुर आदि जिलों के श्रद्धालु यहां नियमित मत्था टेकने आते हैं। सोमवार और शुक्रवार को भारी भीड़ रहती है, जबकि सामान्य दिनों में भी करीब 10 हजार भक्त दर्शन करते हैं। यहां कढ़ाई, हलवा और पूड़ी चढ़ाने की परंपरा है।