UP Panchayat Election: पंचायत चुनाव के लिए ओबीसी आयोग गठित, रिटायर्ड जज राम अवतार सिंह बने अध्यक्ष
उत्तर प्रदेश सरकार ने पंचायत चुनाव में पिछड़ा वर्ग आरक्षण तय करने के लिए राज्य स्थानीय ग्रामीण निकाय समर्पित पिछड़ा वर्ग आयोग (ओबीसी आयोग) का गठन कर दिया है। आयोग का कार्यकाल छह महीने का होगा और इसकी रिपोर्ट नवंबर 2026 तक आने की संभावना है।
सरकार ने Ram Autar Singh को आयोग का अध्यक्ष नियुक्त किया है। उनके साथ आयोग में दो रिटायर्ड अपर जिला जज और दो सेवानिवृत्त आईएएस अधिकारियों को सदस्य बनाया गया है।
आयोग में रिटायर्ड अपर जिला जज बृजेश कुमार और संतोष विश्वकर्मा के अलावा रिटायर्ड आईएएस Dr. Arvind Chaurasia और एसपी सिंह को शामिल किया गया है।
इस गठन के बाद साफ माना जा रहा है कि पंचायत चुनाव अब विधानसभा चुनाव 2027 के बाद ही कराए जा सकेंगे। गौरतलब है कि 4 फरवरी 2025 को Allahabad High Court ने राज्य सरकार को आयोग गठित करने का निर्देश दिया था।
पहले भी नगर निकाय चुनाव में निभा चुके हैं अहम भूमिका
आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह और दोनों रिटायर्ड अपर जिला जज इससे पहले वर्ष 2022 में नगर निकाय चुनाव के लिए गठित ओबीसी आयोग में भी शामिल रहे थे। उस समय आयोग ने तीन महीने के भीतर अपनी रिपोर्ट सरकार को सौंपी थी। बाद में Supreme Court of India ने भी रिपोर्ट पर सहमति जताते हुए निकाय चुनाव कराने की अनुमति दी थी।
नए आयोग में रिटायर्ड आईएएस डॉ. अरविंद चौरसिया और एसपी सिंह को सदस्य के रूप में जोड़ा गया है। आयोग में एसपी सिंह को छोड़कर बाकी सभी सदस्य पिछड़े वर्ग से आते हैं।
कौन हैं राम औतार सिंह?
आयोग के अध्यक्ष राम औतार सिंह मूल रूप से Bijnor के रहने वाले हैं। उनका जन्म 15 जनवरी 1949 को हुआ था। उन्होंने 1976 में पीसीएस न्यायिक सेवा से करियर की शुरुआत की थी।
1991 में वे उच्च न्यायिक सेवा में पदोन्नत हुए और 2005 में जिला जज बने। इसके बाद वर्ष 2008 से 2011 तक वे इलाहाबाद हाईकोर्ट में जज रहे।
आयोग क्यों जरूरी था?
पंचायत चुनाव में ओबीसी आरक्षण लागू करने से पहले सुप्रीम कोर्ट ने राज्यों के लिए ‘ट्रिपल टेस्ट’ प्रक्रिया अनिवार्य की थी। इसी के तहत यह आयोग गठित किया गया है।
आयोग स्थानीय निकायों में पिछड़े वर्ग की आबादी, राजनीतिक प्रतिनिधित्व और आरक्षण की जरूरत का अध्ययन करेगा। आयोग की रिपोर्ट के आधार पर तय होगा कि कौन-सी पंचायत सीट ओबीसी वर्ग के लिए आरक्षित होगी और कौन-सी सामान्य रहेगी।
यदि सरकार आयोग की रिपोर्ट के बिना सीधे आरक्षण लागू करती, तो मामला अदालत में फंस सकता था और चुनावों पर रोक लगने की आशंका रहती।
आयोग के मुख्य कार्य
1. पिछड़े वर्ग के आंकड़े जुटाना
आयोग पंचायत और ब्लॉक स्तर पर पिछड़ी जातियों की आबादी और राजनीतिक प्रतिनिधित्व का अध्ययन करेगा।
2. 50 प्रतिशत आरक्षण सीमा का पालन
आयोग यह सुनिश्चित करेगा कि एससी, एसटी और ओबीसी आरक्षण मिलाकर कुल आरक्षण 50 प्रतिशत से अधिक न हो।
3. आरक्षण का अनुपात तय करना
आयोग की सिफारिशों के आधार पर स्थानीय निकायों में ओबीसी आबादी के अनुसार आरक्षित सीटों की संख्या तय की जाएगी।