सपा विधायक रागिनी सोनकर समेत तीन के खिलाफ वारंट, जानें पूरा मामला
जौनपुर/लखनऊ। उत्तर प्रदेश की राजनीति में मतदाता सूची और चुनावी नियमों को लेकर दो अहम मामले सामने आए हैं। जौनपुर की एक अदालत ने समाजवादी पार्टी की विधायक डॉ. रागिनी सोनकर समेत तीन के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है। वहीं, आजमगढ़ में एक व्यक्ति के नाम पर मतदाता सूची में 10 जगह वोट दर्ज होने के मामले को मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने गंभीरता से लेते हुए जांच के निर्देश दिए हैं।
रागिनी सोनकर समेत तीन के खिलाफ वारंट
जौनपुर की अदालत ने व्यक्तिगत रूप से पेश होने के आदेश के बावजूद अनुपस्थित रहने पर सपा विधायक डॉ. रागिनी सोनकर समेत तीन के खिलाफ गैर-जमानती गिरफ्तारी वारंट जारी किया है।
यह मामला विधानसभा चुनाव-2022 के दौरान कथित तौर पर आचार संहिता और कोविड-19 संबंधी दिशानिर्देशों के उल्लंघन से जुड़ा है। अदालत की ओर से जारी आदेश के बाद मामले ने राजनीतिक हलकों में चर्चा तेज कर दी है। हालांकि, विधायक रागिनी सोनकर ने इस खबर को भ्रामक बताया है। ऐसे में मामले में अदालत की कार्रवाई और विधायक की प्रतिक्रिया, दोनों पक्ष चर्चा में हैं।
विकास यादव के नाम पर 10 वोट दर्ज होने की जांच
दूसरी ओर, लखनऊ में मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने आजमगढ़ में विकास यादव नाम के एक व्यक्ति के नाम पर 10 जगह वोट दर्ज होने के मामले को असामान्य बताया है। उन्होंने कहा कि मामले की गंभीरता से जांच कराई जा रही है और जिला निर्वाचन अधिकारी, आजमगढ़ को आवश्यक निर्देश दिए गए हैं।
जांच में यह पता लगाया जाएगा कि एक ही व्यक्ति का नाम मतदाता सूची में 10 स्थानों पर कैसे दर्ज हुआ। निर्वाचन विभाग यह भी जांच करेगा कि इसके पीछे मानवीय गलती, किसी तरह की साजिश या कोई अन्य कारण है।
नवदीप रिणवा ने स्पष्ट किया कि यदि जांच में जानबूझकर गड़बड़ी करने की बात सामने आती है, तो संबंधित लोगों के खिलाफ कानून के तहत कड़ी कार्रवाई की जाएगी।
अखिलेश यादव ने उठाया था फर्जी वोट का मुद्दा
यह मामला तब चर्चा में आया, जब समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने दावा किया कि आजमगढ़ सदर विधानसभा क्षेत्र की मतदाता सूची में विकास यादव नाम के एक व्यक्ति के नाम पर 10 जगह वोट दर्ज हैं।
अखिलेश यादव ने इस मामले को उठाते हुए भाजपा पर चुनाव जीतने के लिए फर्जी और अतिरिक्त वोट बनवाने का आरोप लगाया था। अब निर्वाचन विभाग की जांच में यह स्पष्ट करने की कोशिश की जाएगी कि मतदाता सूची में एक ही नाम के कई स्थानों पर दर्ज होने की वास्तविक वजह क्या है। फिलहाल, इस मामले में जांच पूरी होने से पहले किसी निष्कर्ष पर पहुंचना उचित नहीं होगा।
मतदाता सूची की शिकायतों पर भी निर्वाचन विभाग का बयान
मुख्य निर्वाचन अधिकारी नवदीप रिणवा ने मतदाता सूची में कथित गड़बड़ियों को लेकर मिली शिकायतों के बारे में भी जानकारी दी। उन्होंने बताया कि 10 अप्रैल से 30 सितंबर के बीच इस संबंध में 20 ज्ञापन दिए गए थे।
उनके मुताबिक, इन शिकायतों की जांच में करीब 85 प्रतिशत दावे सही नहीं पाए गए, जबकि शेष मामलों में जो कमियां मिलीं, उन्हें दूर किया गया।
दोनों मामलों के बीच एक ओर अदालत की कार्रवाई और दूसरी ओर मतदाता सूची की पारदर्शिता को लेकर जांच अहम बनी हुई है। अब सबकी नजरें आजमगढ़ के मामले में निर्वाचन विभाग की जांच रिपोर्ट और जौनपुर के न्यायिक प्रकरण में आगे होने वाली कार्रवाई पर रहेंगी।