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ताजमहल के सामने हाथ जोड़कर महिलाओं ने किया प्रणाम, बोलीं- ये हमारा शिव मंदिर है; जानिए क्या है ‘तेजो महालय’ विवाद

 

आगरा का ताजमहल एक बार फिर ‘तेजो महालय’ के दावे को लेकर चर्चा में है। हाल ही में मथुरा और राजस्थान के धौलपुर से ताजमहल देखने पहुंचीं कुछ महिलाएं मुख्य द्वार पर हाथ जोड़कर और सिर झुकाकर प्रणाम करती नजर आईं। महिलाओं का कहना था कि उनके लिए यह सिर्फ ताजमहल नहीं, बल्कि भगवान शिव का मंदिर यानी ‘तेजो महालय’ है।

मथुरा की कमलेश जब ताजमहल के मुख्य गेट पर पहुंचीं तो उन्होंने पहले हाथ जोड़े और फिर जमीन को छूकर नमन किया। उन्होंने कहा कि जिस तरह वह मंदिर में जाकर भगवान के सामने हाथ जोड़ती हैं और सिर झुकाती हैं, उसी तरह यहां भी उन्होंने प्रणाम किया, क्योंकि उनके अनुसार यह शिव मंदिर है।

वहीं, धौलपुर की बंटी देवी ने भी ताजमहल में प्रवेश से पहले चप्पल उतार दी और हाथ जोड़कर सिर झुकाया। इसके बाद उन्होंने ‘बम भोले’ के जयकारे लगाए। बंटी देवी का कहना था कि उन्होंने सुना है कि ताजमहल के नीचे भगवान भोलेनाथ विराजमान हैं और उनके लिए यह स्थान शिव मंदिर है। हालांकि, ताजमहल को ‘तेजो महालय’ नामक शिव मंदिर बताने का दावा ऐतिहासिक रूप से स्थापित तथ्य नहीं है। इसी दावे को लेकर लंबे समय से विवाद चला आ रहा है और मामला अदालतों तक पहुंच चुका है।

हिंदू महासभा भी कई बार उठा चुका है मुद्दा

ताजमहल को ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर बताने का दावा अखिल भारत हिंदू महासभा की ओर से लंबे समय से उठाया जाता रहा है। संगठन से जुड़े लोगों की ओर से अलग-अलग मौकों पर ताजमहल में पूजा, जलाभिषेक और धार्मिक गतिविधियां करने की कोशिश भी की गई है।

11 मार्च 2021 को महाशिवरात्रि के मौके पर हिंदू महासभा से जुड़े कार्यकर्ताओं ने ताजमहल परिसर में पूजा करने की कोशिश की थी। इस दौरान तीन कार्यकर्ताओं को पकड़ा गया था। 1 अगस्त 2022 को सावन के सोमवार के दिन संगठन ने ताजमहल में जलाभिषेक का ऐलान किया था। पुलिस ने कार्यकर्ताओं को रोका और कुछ लोगों को नजरबंद किया। इसके बाद संगठन से जुड़े लोगों ने यमुना के दूसरी ओर से ताजमहल की तरफ मुंह करके जलाभिषेक किया था।

17 फरवरी 2023 को शाहजहां के उर्स के विरोध में हिंदू महासभा के नेता संजय जाट को आगरा में गिरफ्तार किया गया था। इसके बाद 6 फरवरी 2024 को संगठन के कार्यकर्ताओं ने ताजमहल के पीछे मेहताब बाग की ओर जलाभिषेक और शिव चालीसा का पाठ किया।

9 मार्च 2024 को महाशिवरात्रि के मौके पर हिंदू महासभा से जुड़े लोगों ने मेहताब बाग से ताजमहल की ओर जलाभिषेक किया और तांडव नृत्य किया। इस मामले में पुलिस ने एक कार्यकर्ता को हिरासत में लिया था।

3 अगस्त 2024 को हिंदू महासभा से जुड़े दो युवकों ने ताजमहल के अंदर गंगाजल चढ़ाने का दावा किया था। CISF ने दोनों को हिरासत में लिया और बाद में पुलिस ने उन्हें गिरफ्तार किया। अक्टूबर 2025 में कथावाचिका बाल विदुषी लक्ष्मी का एक वीडियो भी सामने आया था, जिसमें वह ताजमहल के अंदर शिव तांडव मंत्र का पाठ करती नजर आई थीं। उन्होंने करीब 1 मिनट 10 सेकेंड का यह वीडियो सोशल मीडिया पर पोस्ट किया था।

इसके बाद 17 अगस्त 2026 को मेहताब बाग में कथित तौर पर शिव पूजा, गंगाजल और आरती किए जाने का वीडियो सामने आया। मामले में पुलिस ने केस दर्ज किया था।

2015 में अदालत पहुंचा था मामला

ताजमहल को ‘तेजो महालय’ शिव मंदिर घोषित करने का विवाद अदालत तक भी पहुंच चुका है। साल 2015 में आगरा की अदालत में इस संबंध में मुकदमा दायर किया गया था। याचिका में भगवान श्री अग्रेश्वर महादेव नागनाशेश्वर विराजमान को पक्षकार बनाया गया था।

याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल को शिव मंदिर घोषित करने और हिंदुओं को वहां पूजा-दर्शन की अनुमति देने की मांग की थी। मामले में केंद्र सरकार, संस्कृति मंत्रालय, गृह मंत्रालय और भारतीय पुरातत्व सर्वेक्षण (ASI) को भी पक्षकार बनाया गया।बाद में याचिकाकर्ताओं की ओर से ताजमहल के बंद कमरों और परिसर का सर्वे कराने के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई।

2019 में सर्वे की मांग खारिज

18 जुलाई 2019 को आगरा की सिविल कोर्ट ने ताजमहल के सर्वे के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग को खारिज कर दिया। इसके बाद इस आदेश को आगे चुनौती दी गई। 4 अप्रैल 2026 को आगरा की अतिरिक्त जिला अदालत ने भी पुनरीक्षण याचिका खारिज कर दी। इसके बाद याचिकाकर्ताओं ने इलाहाबाद हाईकोर्ट का रुख किया।

30 जून 2026 को इलाहाबाद हाईकोर्ट में याचिका दाखिल कर आगरा की अदालतों के आदेशों को चुनौती दी गई। इसमें ताजमहल का निरीक्षण कराने के साथ फोटोग्राफी और वीडियोग्राफी के लिए एडवोकेट कमिश्नर नियुक्त करने की मांग की गई।

जुलाई 2026 में इलाहाबाद हाईकोर्ट ने इस मामले में केंद्र सरकार और ASI से जवाब मांगा। याचिकाकर्ताओं ने ताजमहल में मौजूद 109 कथित ऐतिहासिक और पुरातात्विक विशेषताओं का हवाला देते हुए इसे हिंदू मंदिर होने के आधार के तौर पर पेश किया है।